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जगदलपुर : भूमिहीन किसान लघुनाथ के लिए वनाधिकार पत्र बना खुशहाल जीवन का आधार

July 25th, 2020 17:17 IST
जगदलपुर : भूमिहीन किसान लघुनाथ के लिए वनाधिकार पत्र बना खुशहाल जीवन का आधार

डिजिटल डेस्क, जगदलपुर 24 जुलाई 2020 छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वन भूमि पर वर्षो से काबिज लोगों को जंगल जमीन का मालिकाना हक प्रदान करने का महत्वाकांक्षी योजना बस्तर जिले के बकावण्ड विकासखण्ड के आदिवासी भूमिहीन व्यक्ति लघुनाथ के खुशहाल जीवन का आधार बन गया है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाले छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना की सरहाना करते हुए किसान लघुनाथ ने बताया कि उनके पूर्वजों के द्वारा इस जमीन पर लगभग 75 साल पहले से काबिज होने के उपरांत भी उसे हमेशा इसकी मालिकाना हक मिलने की चिंता सताती रहती थी। लेकिन राज्य सरकार के अत्यंत संवेदनशील निर्णय के फलस्वरूप उसे इस जमीन का वनाधिकार पत्र मिलने से उनके एवं उनके परिवार के वर्षो पुरानी मुरिद पूरी हो गई है। लघुनाथ ने बताया कि उनके परिवार के द्वारा इस जमीन में वर्षो पहले से काबिज होकर खेती-किसानी करने के कारण जमीन के साथ भावनात्मक संबंध स्थापित हो गया था। राज्य सरकार के निर्णय के फलस्वरूप आज 3.82 हेक्टेयर जमीन का वनाधिकार मिलना उसके लिए किसी बड़े सपने के साकार होने जैसा है। लघुनाथ ने बताया कि आज इस जमीन से धान के अलावा मक्का, सरसों आदि फसलों का भी उत्पादन कर रहे हैं। इस वर्ष उन्होंने कुल 25 हजार 700 रूपए की राशि की समर्थन मूल्य पर धान की बिक्री की है। इसके अलावा मक्के की फसल से 37 हजार 500 सरसों एवं दलहनी की फसलों से की आमदानी हुई है। उन्होंने कहा कि उसे इस जमीन का वनाधिकार पत्र मिलने से उनके परिवार के भरण-पोषण के लिए समुचित मात्रा में अनाज उपलब्ध होने के साथ-साथ फसलों की बिक्री से आर्थिक लाभ होने कारण यह योजना उनके परिवार के आर्थिक समृद्धि का आधार भी बना है। योजना वन अधिकार पत्रक से वनवासी ग्रामीणों को वनक्षेत्र में निवास एवं आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए शासन द्वारा व्यक्तिगत और सामुदायिक पत्रक का वितरण किया जाता है। बस्तर जिले के बकावण्ड विकासखण्ड के अंतर्गत व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र 08 हजार 96 धारक, सामुदायिक वन अधिकार पत्र 779 धारक है क्षेत्र के 414 पंजीकृत वन अधिकार पत्रक धारकों द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लिया गया है। आदिवासियों एवं अन्य परंपरागत वनवासियों को जंगल पर उनके अधिकारों को मान्यता देने के लिए 2006 में अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) कानून पूरे देश में लागू किया गया। 13 दिसम्बर 2005 से पहले वन क्षेत्र में काबिज वासियों को इस वनाधिकार अधिनियम से लाभ दिया जा रहा है। क्रमांक 649/शेखर/चन्द्रेश

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