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शराब के कारोबारी ने बाघिन और  2 शावकों को मार डाला

शराब के कारोबारी ने बाघिन और  2 शावकों को मार डाला

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  अवैध शराब का कारोबार चलता रहे, इसलिए ताड़ोबा अंधारी व्याघ्र प्रकल्प की एक बाघिन और दो शावकों की हत्या कर दी गईै। इसे साजिश के तहत क्षेत्र में महुआ शराब का अवैध कारोबार करने वाले तीन ग्रामीणों ने अंजाम दिया है। इस संबंध में पकड़े गए आरोपियों ने वन-विभाग के पास अपराध भी कबूला है। आरोपियोंं में कोंडेगांव निवासी सूर्यभान गोविंद ठाकरे (60), श्रावण श्रीराम मडावी (47) व नरेंद्र पुंडलिक दडमल (49) शामिल हैं।   इस घटना ने ताड़ोबा के बाघोंं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

सड़ा-गला शव मिला
लॉकडाउन के कारण इन दिनों ताड़ोबा अंधारी व्याघ्र प्रकल्प बंद है। 10 जून को ताड़ोबा के मोहर्ली (बफर जोन) वन परिक्षेत्र के सीताराम पेठ बीट के संरक्षित वन कक्ष क्र.956 के नाले में सड़ी-गली अवस्था में एक बाघिन का शव  मिला था। परिसर की छानबीन करने पर फिर 14 जून को बाघिन के दो शावकों के भी शव उसी अवस्था में मिले थे। वहीं दो बंदर भी मृत अवस्था में पाए गए थे। 

ऐसे दिया घटना को अंजाम
मोहर्ली के आरएफओ मून के अनुसार उक्त सभी आरोपी कोंडेगांव खेत में महुआ शराब निकालने का काम करते हैं। अवैध शराब का कारोबार रुके नहीं, इसलिए उन्होंने शराब निकालने के बाद सड़वे पर विषाक्त पदार्थ (थिमेट) डाल दिया, ताकि उसे सुअर खा कर मर जाएं और सुअर को खाने से बाघ मर जाएं। जिस परिसर में घटना हुई है, उधर अक्सर बाघ घूमते रहते हैं, जिससे अवैध कारोबारियों को खतरा बना रहता है। बाघों के कारण आरोपियों के कारोबार पर असर पड़ता है। आरोपी के बयान लेकर उन्हें गिरफ्तार किया गया है।

इस तरह लगा सुराग 
बाघिन, शावकों व लंगूरों के अंग जांच के लिए हैदराबाद की प्रयोगशाला में भेजे गए। प्राथमिक दृष्टि से बाघिन व दो शावकों की मृत्यु विष प्रयोग से होने के संदेह पर वन विभाग ने जांच शुरू की। बुधवार को कोंडेगांव निवासी सूर्यभान ठाकरे, श्रावण मडावी व नरेंद्र दडमल को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने घटना को अंजाम देेने की बात कबूल की । 

कार्यप्रणाली पर सवाल
यह गंभीर मामला सामने आने के बाद ताड़ोबा प्रबंधक व वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। ताड़ोबा व परिसर में वन विभाग की टीम नियमित गश्त करती है, फिर भी बाघिन व उसके शावकों के शव सड़ने-गलने तक कैसे पता नहीं चल पाया। दूसरी ओर शराब बंदी वाले चंद्रपुर जिले के ताड़ोबा परिसर में बड़े पैमाने पर अवैध महुआ शराब निकाली जाती है, फिर भी वन विभाग सोया रहता है।

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