जीआई टैग: अब भंडारा के नाम से पहचाना जाएगा सुगंधित चिन्नौर चावल

July 25th, 2022

डिजिटल डेस्क,भंडारा। आपके भोजन में शामिल सुगंधित चिन्नौर चावल अब भंडारा के नाम से जाना जाएगा। दो साल की अथक मेहनत के बाद भंडारा को चिन्नौर चावल का भौगोलिक नामांकन यानी जीआई टैग (जियोग्राफिक इंडिकेशन) मिल गया है।  इस सफलता की जानकारी स्थानीय सांसद सुनील मेंढे ने रविवार को भंडारा में प्रेस कॉन्फ्रेंस द्वारा दी। मेंढे ने बताया कि चावल उत्पादन के मामले में भंडारा जिला महाराष्ट्रभर में प्रथम स्थान पर है। यहां चावल की कई उत्कृष्ट प्रजातियों का उत्पादन किया जाता है। स्थानीय चिन्नौर चावल को विश्व में अलग पहचान मिले, इसके लिए 12 सितंबर 2019 को जिलाधिकारी और कृषि अधीक्षक को पत्र लिखकर जीआई टैगिंग की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 11 दिसंबर 2019 को इस संबंध में विशेष प्रक्रिया शुरू कर दी गई। भंडारा चिन्नौर धान उत्पादक संघ ने इस मुहिम का नेतृत्व किया।

सभी कसौटियों पर खरा उतरने वाली रिपोर्ट तैयार की
चिन्नौर के लिए जीआई टैग हासिल करने केंद्र सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के तहत भौगोलिक नामांकन विभाग को प्रस्ताव भेजा गया। सभी कसौटियों पर खरा उतरने वाली रिपोर्ट तैयार करने के लिए 27 फरवरी 2020 को जिला प्रशासन और सांसद मेंढे ने पुणे की ग्रेट मिशन ग्रुप कंसलटेंसी को काम सौंपा। हालांकि, वैश्विक महामारी कोरोना के चलते भौगोलिक नामांकन विभाग की समिति की बैठक नहीं हो सकी। इसके बाद केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को इस बाबत जानकारी दी गई। उनके सहयोग से 15 जुलाई 2022 को प्रकाशित केंद्र सरकार की भौगोलिक उपदर्शन पत्रिका यानी गैजेट में 158 नंबर पर भंडारा चिन्नौर का नामांकन किया गया। 

मांग बढ़ेगी, किसानों को फायदा
जीआई टैग मिलने से चिन्नौर चावल का इतिहास, पोषण मूल्य, मनमोहक खुशबू, फैट की मात्रा, ग्लूटेन फ्री आदि विशेषताओं के बारे में जानकारी विस्तृत रूप से साझा की जा सकेगी। चावल की मांग बढ़ेगी। बिक्री बढ़ने से किसानों को लाभ मिलेगा। यह कीर्तिमान हासिल करने में पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ साकोली केंद्र के अधिकारी, धान उत्पादक संघ के सदस्य और कृषि विभाग के प्रशासकीय अधिकारी की विशेष भूमिका रही है।