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‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ पर कोरोना संक्रमण का साया

‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ पर कोरोना संक्रमण का साया

डिजिटल डेस्क, नागपुर। कोरोना संक्रमण से बंद पड़े उद्योगों को फिर से पटरी पर लाने के लिए सरकार ने अपनी तिजोरी खोल दी है, लेकिन कोरोना का डर इस तरह छाया है कि व्यापारी सरकारी योजना का लाभ लेने से भी डर रहे हैं। नागपुर विभाग में 14500 उद्योग हैं, जिसमें से केवल 2470 उद्योगों ने ही ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ का लाभ लिया है। इस योजना के तहत सरकार नियोक्ता व कामगारों का ईपीएफ खुद जमा करती है। 

52 हजार कामगारों को मिला लाभ
लॉकडाउन में अधिकांश उद्योग बंद हो गए थे। इन्हें फिर से पटरी पर लाने के लिए केंद्र सरकार ने नियोक्ता व कामगार दोनों का ईपीएफ खुद भरने का निर्णय लिया था, लेकिन कोरोना का डर ऐसा बना हुआ है कि उद्यमी इस योजना का लाभ लेने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। इस वर्ष अप्रैल में यह योजना शुरू हुई आैर अभी तक नागपुर विभाग (नागपुर, वर्धा, भंडारा, गोंदिया, गड़चिरोली, चंद्रपुर) की केवल 2470 कंपनियां ही इसमें शामिल हुईं है। पहले महीने (अप्रैल) में केवल 700 कंपनियां शामिल हुईं थीं। सरकार ने पहले महीने साढ़े तीन करोड़ रुपए ईपीएफ जमा किया था। जून का ईपीएफ 22 करोड़ तक भरा गया है। 52 हजार कामगारों काे इसका लाभ मिल रहा है। सरकार 30 नवंबर तक नियोक्ता व कामगार के हिस्से का ईपीएफ भरेगी। 

अर्थ व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश 
उद्योगों के पूर्ण क्षमता से शुरू हुए बिना अर्थ व्यवस्था काे पटरी पर लाना मुश्किल है। सरकार हर हाल में अर्थ व्यवस्था को पटरी पर लाना चाहती है, इसीलिए उद्योगों को प्रोत्साहन स्वरूप लाभदायी योजनाएं दे रही है। सरकार ईपीएफ का जितना भी पैसा भरेगी, वह वापस नहीं लेगी।

योजना का लाभ लें कंपनियां 
उद्योग अर्थ व्यवस्था का मजबूत पहिया है। इसे सुचारु रखने के लिए सरकार ने योजना लाई है। कंपनियांे को योजना का लाभ लेना चाहिए। निधि की कोई कमी नहीं है। अभी भी पूरी क्षमता से उद्योग शुरू नहीं हुए हैं। उद्योग कभी शुरू, तो कभी बंद होने जैसी स्थिति बनी हुई है। हमारी कोशिश योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों को देने की है। 
-विकास कुमार, क्षेत्रीय आयुक्त, ईपीएफआे नागपुर
 

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