पलामू टाइगर रिजर्व में टाइगर की मौजूदगी पर सस्पेंस, लेकिन 15 साल में खर्च हो गये 60 करोड़ से ज्यादा

Suspense over presence of tiger in Palamu Tiger Reserve, but spent more than 60 crores in 15 years
पलामू टाइगर रिजर्व में टाइगर की मौजूदगी पर सस्पेंस, लेकिन 15 साल में खर्च हो गये 60 करोड़ से ज्यादा
झारखंड पलामू टाइगर रिजर्व में टाइगर की मौजूदगी पर सस्पेंस, लेकिन 15 साल में खर्च हो गये 60 करोड़ से ज्यादा
हाईलाइट
  • पलामू टाइगर रिजर्व में टाइगर की मौजूदगी पर सस्पेंस
  • लेकिन 15 साल में खर्च हो गये 60 करोड़ से ज्यादा

डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व की अजब कहानी है। यह ऐसा टाइगर रिजर्व है, जहां कोई टाइगर भी है या नहीं, इस बारे में वन विभाग के पास पुख्ता प्रमाण के साथ जानकारी नहीं है। यह हाल तब है, जब इस टाइगर रिजर्व पर पिछले पंद्रह साल में 60 करोड़ से भी ज्यादा की राशि खर्च कर दी गई है।

पलामू के बेतला में 1974 में जब तत्कालीन बिहार सरकार ने इसे टाइगर रिजर्व के रूप में नोटिफाई किया था, तब यहां लगभग 50 बाघ थे। पलामू टाइगर रिजर्व 1,026 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है जबकि इसका कोर एरिया 226 वर्ग किलोमीटर में हैं। रिजर्व के पूरे इलाके में 250 से अधिक गांव हैं। टाइगर प्रोजेक्ट के कोर एरिया में नौ गांव हैं।

झारखंड अलग राज्य बनने के बाद यहां पहली बार 2005 में बाघों की गिनती करायी गयी। सरकार की फाइल के अनुसार उस वक्त यहां कुल 38 बाघ थे। अगले ही साल यानी 2006 में यहां बाघों की संख्या 17 बतायी गयी। आधिकारिक तौर पर 2009 में दूसरी बार गिनती हुई तो इनकी संख्या आठ थी। 2010 में छह बाघ रह गये और 2014 में इतनी संख्या सिर्फ तीन बतायी गयी। 2018 में यहां एक भी बाघ की मौजूदगी के प्रमाण नहीं थे।

अब इस साल फिर बाघों की गिनती कराई जा रही है। पलामू टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर आशुतोष बताते हैं कि पिछले 22 दिसंबर को यहां छह स्केट (मल) के सैंपल जांच के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीच्यूट ऑफ इंडिया देहरादून भेजे गये थे। इनमें से एक स्केट का सैंपल टाइगर से मैच हुआ है। इसके आधार पर यह माना जा सकता है कि यहां कम से कम एक टाइगर की मौजूदगी है।

टाइगर रिजर्व में वन्य प्राणियों की घटती संख्या पर वन विभाग के अपने तर्क है। विभाग का कहना है कि टाइगर रिजर्व एरिया में पुलिस पिकेट बना दिये गये हैं। नियमत: कोर एरिया में पुलिस पिकेट नहीं होना चाहिये। वर्तमान में बेतला, कुटकू, बरवाडीह, गारू, बारसेन, महुआटांड सहित अन्य इलाकों में एक दर्जन से अधिक पुलिस पिकेट हैं। नक्सलियों के खिलाफ गोलीबारी से जानवरों पर विपरित असर पड़ता है। इस कारण जंगली जानवर पड़ोस के जंगलों की ओर रुख करते हैं।

पलामू टाइगर रिजर्व की गड़बड़ियों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में भी एक याचिका पर सुनवाई चल रही है। अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई के दौरान पिछली तारीखों ने वन विभाग के खिलाफ सख्त टिप्पणी भी की है। अदालत ने यहां तक कहा कि यह अजब विरोधाभास है कि एक तरफ वन्य प्राणियों की संख्या लगातार घटती गयी और दूसरी तरफ वन विभाग में अफसरों और कर्मियों की संख्या बढ़ती गयी।

इस मामले में झारखंड के निर्दलीय विधायक सरयू राय ने भी अदालत में हस्तक्षेप याचिका दायर कर रखी है। उन्होंने याचिका में कहा है कि केंद्र से मिले फंड से रिजल्ट क्षेत्र में एक चाहरदीवारी बना दी गई है, जिससे जानवरों के जाने का मार्ग अवरुद्ध हो गया है। यहां 100 वाच टावरों बनाये गये हैं, लेकिन वो कार्यरत नहीं हैं। याचिका में पलामू टाइगर रिजर्व की कई अन्य गड़बड़ियों के बारे में बताया गया है।

 

(आईएएनएस)

Created On :   23 March 2022 3:01 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story