मारुति-800 के 37 साल: जानिए, पहली कार की कीमत से लेकर अंतिम कार तक का सफर

मारुति-800 के 37 साल: जानिए, पहली कार की कीमत से लेकर अंतिम कार तक का सफर

Bhaskar Hindi
Update: 2020-12-15 11:54 GMT
मारुति-800 के 37 साल: जानिए, पहली कार की कीमत से लेकर अंतिम कार तक का सफर
हाईलाइट
  • पहली बार आई थी 47
  • 500 की कीमत पर
  • मारुति-800 थी फ्रंट-व्हील-ड्राइव सेट वाली पहली कार
  • शुरुआती मॉडल लॉटरी सिस्टम से दिए गए थे

डिजिटल डेस्क,भोपाल। मारुति-800 भारत के लिए एक आइकन की तरह है जो 37 साल पहले लॉन्च की गई थी।  मारुति-800 देश की पहली ऑटोमैटिक गियर वाली कार थी और हरियाणा के गुडगांव स्थित मारुति के कारखाने से पहली कार 14 दिसंबर 1983 को बाहर आई। मारुति सुजूकी लिमिटेड का नाम तब मारुति उद्योग लिमिटेड था। सन् 1983 में इस कार के पहले मालिक दिल्ली के हरपाल सिंह और गुलशनबीर कौर थे। पहली कार की चाबियां उन्हें इंदिरा गांधी ने सौंपी थीं। वहीं, अंतिम कार 2014 में चंडीगढ़ में बेची गई थी। 

आइए, जानते हैं  37 वीं वर्षगांठ पर इस कार से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें... 

  • यह फ्रंट-व्हील-ड्राइव सेट वाली पहली कार थी।
  • ये कार 1983 के वक्त अपने कंपीटिशन की तुलना में सबसे अधिक तकनीकी रूप से उन्नत थी। 
  • मारुति ने 1983 में लॉन्च के समय 800 पर 25.95 kmpl की ईंधन दक्षता का दावा किया था।
  • मारुति 800 ने शुरु किया था सुजुकी फ्रोंटे SS80 के रूप में अपना जीवन 
  • 1986 में दूसरी पीढ़ी के ऑल्टो (SB308) के एरोडायनामिक बॉडीशेल के साथ एक और आधुनिक संस्करण पेश किया गया था।
  • 800 का पहला बैच कंप्लीटली नॉक डाउन (CKD) किट के रूप में खरीदा गया
  • मारुति 800 को भारत के लिए "पीपल्स कार" के रूप में पेश किया गया था। 
  • इसे 47,500 की कीमत पर पेश किया गया था।
  • 1984 में एयर-कंडीशनिंग के साथ एक अधिक प्रीमियम संस्करण पेश किया गया था, जिसकी कीमत लगभग 70,000 थी। 
  • आज आसान पहुँच के विपरीत, जो हमारे पास कार खरीदने के लिए साधन है, वो उस वक्त नही था। बता दें कि 1980-1990 के दशक में एक मारुति 800 को शोरूम से बाहर नहीं निकाल सकते थे।
  • इसकी घोषणा के समय, लगभग 1.2 लाख लोगों ने ₹ 10,000 की टोकन राशि के लिए कार बुक की।
  • शुरुआती मॉडल एक लॉटरी सिस्टम के आधार पर ग्राहकों को आवंटित किए गए थे और प्रतीक्षा अवधि, महीनों और कभी-कभी वर्षों के बाद आखिरी में एक को सौंप दी गई थी। 
  • मारुति-800 के लॉन्च के सिर्फ दो साल में, भारतीय कार बाजार 40,000 कारों से दोगुना हो गया, जो एक साल में लगभग 1 लाख यूनिट तक बेची गई थी।
  • 1987 में पहली बार मारुति 800 को सीटबेल्ट मिला।
  • 2014 तक, मारुति सुजुकी  दुनिया के तीसरे सबसे बड़ी ऑटो इंडस्ट्री बन चुकी थी। 
  • मारुति-800 का उत्पादन फरवरी 2014 से बंद कर दिया गया और आखिरी गाड़ी चंडीगढ़ में बेची गई थी। 2014 में इसकी कीमत 2 लाख 7 हजार से 2 लाख 37 हजार तक पहुंच गई थी। 
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