कुलभूषण मामला: ICJ में भारत की बड़ी जीत, मिलेगा कॉन्सुलर एक्सेस, फांसी पर रोक

कुलभूषण मामला: ICJ में भारत की बड़ी जीत, मिलेगा कॉन्सुलर एक्सेस, फांसी पर रोक

Bhaskar Hindi
Update: 2019-07-16 15:33 GMT
कुलभूषण मामला: ICJ में भारत की बड़ी जीत, मिलेगा कॉन्सुलर एक्सेस, फांसी पर रोक
हाईलाइट
  • इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में भारत को बड़ी जीत मिली है
  • कुलभूषण जाधव की फांसी पर इंटरनेशनल कोर्ट ने रोक लगा दी है
  • जाधव को पाकिस्तान में मौत की सजा सुनाई थी

डिजिटल डेस्क, द हेग। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में भारत को बड़ी जीत मिली है। भारतीय नौसेना के रिटायर्ड अधिकारी कुलभूषण जाधव की फांसी पर इंटरनेशनल कोर्ट ने रोक लगा दी है। भारत को कॉन्सुलर एक्सेस भी दिया गया है। ICJ में 15-1 से भारत के पक्ष में फैसला सुनाया गया है। जज अब्दुलकवी अहमद यूसुफ ने द हेग में अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला पढ़ा। बता दें कि जाधव को पाकिस्तान में मौत की सजा सुनाई थी।

क्या कहा कोर्ट ने?
कोर्ट ने पाया कि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव से संपर्क करने और उनके लिए कानूनी प्रतिनिधित्व की व्यवस्था करने के अधिकार से भारत को वंचित किया। यह विएना संधि के तहत कॉन्सुलर रिलेशन नियमों का उल्लंघन है। पाकिस्तान ने जाधव की गिरफ्तारी की जानकारी देने में तीन हफ्ते की देरी की, यह भी विएना संधि की शर्तों का उल्लंघन है। कोर्ट के 16 जजों में से 15 ने भारत का साथ देते हुए पाकिस्तान के इस पर विरोध को खारिज किया। केवल पाकिस्तान के एडहॉक जज जिलानी ने अपना विरोध जताया।

क्या कहा वकील हरीश साल्वे ने?
कुलभूषण जाधव मामले में भारत की तरफ से वकील हरीश साल्वे ने कहा, "ICJ का आभार व्यक्त करना चाहता हूं जिस तरह से उन्होंने मामले में हस्तक्षेप किया। इसने कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा से बचाया।" उन्होंने कहा कि "पाकिस्तान बार-बार अपने एक ही दावे पर अड़ा रहा कि उसने जाधव के पास से पासपोर्ट जब्त किया है। कोर्ट न केवल इस बात की तह पर गई बल्कि पाकिस्तान की इस बात को खारिज कर दिया कि जाधव की राष्ट्रीयता अनिश्चित है।" साल्वे ने कहा, "हमारे लिए यह सुनिश्चित करने का समय है कि जाधव को आईसीजे की तरह निष्पक्ष सुनवाई का मौका मिले। यदि पाकिस्तान अभी भी उसे निष्पक्ष सुनवाई देने में विफल रहता है, तो हम वापस ICJ में जा सकते हैं।"  

पीएम मोदी ने किया ICJ के फैसले का स्वागत
कुलभूषण जाधव फैसले पर पीएम मोदी ने कहा, "हम आईसीजे में आज के फैसले का स्वागत करते हैं। सत्य और न्याय की जीत हुई। तथ्यों के गहन अध्ययन के आधार पर फैसले के लिए आईसीजे को बधाई। मुझे यकीन है कि जाधव को न्याय मिलेगा। हमारी सरकार हमेशा हर भारतीय की सुरक्षा और कल्याण के लिए काम करेगी।"

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "कुलभूषण जाधव पर ICJ का फैसला भारत के लिए बड़ी जीत है। आईसीजे ने पाकिस्तान को जाधव तक कॉन्सुलर एक्सेस देने और उन्हें सजा की समीक्षा करने का निर्देश दिया। यह एक स्वागत योग्य निर्णय है। यह पीएम नरेन्द्र मोदी की कूटनीतिक पहल की भी एक बड़ी जीत है।"

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि "मैं कुलभूषण जाधव के मामले में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के फैसले का तहे दिल से स्वागत करती हूं। यह भारत के लिए बहुत बड़ी जीत है। मैं अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के समक्ष जाधव के मामले को लेने की हमारी पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देती हूं। मैं हरिश साल्वे को ICJ के समक्ष भारत के मामले को बहुत प्रभावी ढंग से और सफलतापूर्वक प्रस्तुत करने के लिए धन्यवाद देती हूं। मुझे उम्मीद है कि फैसले से कुलभूषण जाधव के परिवार के सदस्यों को सांत्वना मिलेगी जिसकी उन्हें बहुत ज्यादा जरूरत है।"

क्या है पूरा मामला?
कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। कुलभूषण जाधव तक राजनयिक पहुंच के पाकिस्तान के इनकार के बाद भारत ने मई 2017 में ICJ का रुख किया था। भारत ने 48 वर्षीय कुलभूषण जाधव के खिलाफ पाकिस्तान की सैन्य अदालत में "फार्सिकल ट्रायल" को भी चुनौती दी थी। ICJ ने 18 मई, 2017 को फैसला आने तक पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव की मौत की सजा देने से रोक दिया था।

इंटरनेशनल कोर्ट ने फरवरी में इस मामले में चार दिवसीय सुनवाई की थी। इस दौरान भारत और पाकिस्तान दोनों ने अपनी विस्तृत दलीलें और प्रतिक्रियाएं प्रस्तुत कीं। भारत ने दो व्यापक मुद्दों पर अपना मामला आधारित किया - राजनयिक पहुंच पर वियना कन्वेंशन का उल्लंघन और प्रोसेस ऑफ रिजोल्यूशन। भारत ने ICJ से कुलभूषण जाधव की मौत की सजा को रद्द करने और उसकी तत्काल रिहाई का आदेश देने का भी आग्रह किया। भारत ने कहा था कि पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया। यह उचित प्रक्रिया के न्यूनतम मानकों को भी पूरा करने में विफल रहा।

पाकिस्तान ने ICJ में कहा था कि भारतीय नौसेना अधिकारी एक "जासूस" था कोई व्यापारी नहीं। पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षा बलों ने जाधव को 3 मार्च, 2016 को ईरान से कथित तौर पर घुसने के बाद बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया था। हालांकि, भारत का कहना है कि कुलभूषण जाधव को ईरान से अगवा किया गया था, जहां नौसेना से रिटायर होने के बाद उनके व्यापारिक हित थे।

पाकिस्तान ने ICJ में कुलभूषण जाधव के राजनयिक पहुंच के लिए भारत की याचिका को खारिज कर दिया था। पाकिस्तान ने दावा किया था कि भारत अपने "जासूस" द्वारा एकत्रित की गई जानकारी हासिल करना चाहता है। हालांकि, पाकिस्तान ने 25 दिसंबर, 2017 को इस्लामाबाद में कुलभूषण जाधव की उनकी मां और पत्नी के साथ मुलाकात करवाने की अनुमति दी थी।

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