NPCI Update: अब 2000 रूपए से अधिक के UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा MDR चार्ज, सरकार ने दिवाली तक टाला फैसला

अब 2000 रूपए से अधिक के UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा MDR चार्ज, सरकार ने दिवाली तक टाला फैसला
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि, त्योहारों के मौसम को देखते हुए चुनिंदा UPI लेनदेन पर शुल्क लागू करने की तारीख आगे बढ़ाई गई है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुकानदारों और डिजिटल पेमेंट करने वालों के लिए सरकार ने राहतभरा फैसला लिया है। अब चुनिंदा UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR), तय तारीख यानी 15 अक्टूबर से नहीं लिया जाएगा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मंगलवार को जारी बयान में इसकी जानकारी दी है। हालांकि नई तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है। फिलहाल, इस फैसले से त्योहार के दौरान आम लोगों से दुकानदारों और कारोबारियों का यूपीआई लेनदेन पहले की तरह फ्री रहेगा।

दिवाली तक फैसला क्यों टाला गया?

अक्टूबर से दिसंबर तक का समय भारत में खरीदारी और कारोबार के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। दिवाली के आसपास कपड़ों, गहनों, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहनों और घरेलू उत्पादों की बिक्री बढ़ जाती है। इस दौरान दुकानदार डिजिटल भुगतान का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में व्यापारियों के संगठनों ने पहले चिंता जताई थी। उनका मानना था कि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत आने से कारोबारियों के खर्च बढ़ सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए NPCI ने शुल्क लागू करने की तारीख आगे बढ़ाई गई है।

2,000 रुपए से अधिक के लेनदेन पर शुल्क

आपको बता दें कि, बीते 14 सितंबर 2026 को UPI MDR से जुड़े नए नियमों का फ्रेमवर्क जारी किया गया। इसके अगले ही दिन NPCI ने इस संबंध में विस्तृत सर्कुलर भी जारी कर दिया। सरकार ने इस फ्रेमवर्क के जरिए UPI पेमेंट पर लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के नियमों को तय किया। नए नियम के तहत चुनिंदा दुकानदारों से जुड़े UPI लेनदेन पर MDR लागू करने की तारीख 15 अक्टूबर तय थी।

2,000 रुपए तक के व्यापारी भुगतान और निर्धारित नियमों के तहत आने वाले छोटे कारोबारियों के लेनदेन को भी शुल्क से छूट दी गई। वहीं 2,000 रुपए से ज्यादा के कुछ UPI मर्चेंट भुगतान पर 0.40 प्रतिशत MDR लगाया गया। सरकार ने स्पष्ट किया था कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। फिलहाल, इस तारीख को दिवाली तक टाल दिया गया है।

व्यापारी संगठनों ने किया था विरोध

सरकार द्वारा UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का व्यापारी और कारोबारियों के साथ विपक्ष ने कड़ा विरोध किया था। मप्र में पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने कहा था कि, 2,000 रुपए से अधिक के UPI लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने से डीलर्स पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है। साथ ही 2,000 रुपए से अधिक का UPI भुगतान नहीं लेने की बात भी एसो. ने कही थी। इसके बाद मप्र में 23 सितंबर को व्यापारिक संगठनों द्वारा ‘नो UPI डे’ मनाया गया। बाद में विरोध के रूप में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने देशभर में 2 अक्टूबर को 'नो UPI डे' मनाया था।

MDR चार्ज क्या होता है?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले दुकानदार या व्यापारी की ओर से बैंक और भुगतान सेवा से जुड़ी कंपनियों को दिया जाता है। आसान भाषा में समझें तो जब कोई ग्राहक UPI के जरिए किसी दुकान पर भुगतान करता है, तो उस लेनदेन को पूरा करने में शामिल भुगतान व्यवस्था की सेवाओं के लिए दुकानदार से शुल्क लिया जा सकता है। इसी शुल्क को MDR कहा जाता है। यह समझना जरूरी है कि MDR का मतलब यह नहीं है कि हर UPI भुगतान करने वाले ग्राहक से सीधे अतिरिक्त पैसे वसूले जाएंगे। सरकार की ओर से सितंबर में जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, यह शुल्क चुनिंदा व्यापारी लेनदेन पर लागू होने वाला है और इसे ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं है।

Created On :   13 Oct 2026 3:25 PM IST

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