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आर्थिक मोर्चों पर भी बेहद सफल थे अटल जी, IT के क्षेत्र में लिया था यह बड़ा फैसला

आर्थिक मोर्चों पर भी बेहद सफल थे अटल जी, IT के क्षेत्र में लिया था यह बड़ा फैसला

हाईलाइट

  • पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी देश की राजनीति के अजातशत्रु होने के साथ-साथ बड़े आर्थिक सुधारक भी थे।
  • आर्थिक क्षेत्र के सुधारों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए याद किया जाएगा।
  • 1998 में सरकार बेहद गंभीर मोड़ पर खड़ी थी, लेकिन नाजुक दौर से अर्थव्यवस्था को अटल सरकार ने बखूबी बाहर निकाल लिया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी देश की राजनीति के अजातशत्रु होने के साथ-साथ बड़े आर्थिक सुधारक भी थे। देश में राजमार्गों के निर्माण की बात हो, विदेशों में तेल क्षेत्रों का अधिग्रहण या फिर आईटी क्षेत्र को बढ़ावा देने की बात हो, अटल जी को हमेशा आर्थिक क्षेत्र के सुधारों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए याद किया जाएगा। 1998 में सरकार की बागडोर संभालने और परमाणू परीक्षण के बाद देश की अर्थव्यवस्था बेहद गंभीर मोड़ पर खड़ी थी, लेकिन नाजुक दौर से अर्थव्यवस्था को अटल सरकार ने बखूबी बाहर निकाल लिया।

1998-99 के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक पूर्वी एशिया के देशों की जीडीपी में तेज गिरावट दर्ज हो रही थी। इंडोनेशिया की जीडीपी 15 फीसदी और दक्षिण कोरिया और थाइलैंड की जीडीपी में 5 से 7 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई थी। इसके अलावा दुनिया की पांच बड़ी इकोनॉमी में जापान मंदी के दौर से गुजर रहा था। दुनियाभर में ऐसी आर्थिक स्थिति के चलते 1998 में ग्लोबल जीडीपी में 2 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई थी। मार्च 1998 में सरकार की बागडोर संभालने के बाद देश की अर्थव्यवस्था बेहद गंभीर मोड़ पर खड़ी थी 1997-98 में विकास दर लुढ़क कर 5 फीसदी के पास पहुंच गई थी। महंगाई दर भी 8.8 फीसदी के उच्चतम स्तर पर जा चुकी थी। इन सब चुनौतियों से अटल जी ने महत्वपूर्ण फैसले लेकर इकोनॉमी को उभारा।

1999 के वसंत में बजट भाषण के बीच में, पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने एक संक्षिप्त, लेकिन महत्वपूर्ण घोषणा की। Y2K बग कंप्यूटर सिस्टम और डाटाबेस में वर्ष 2000 में हिट करेगा। उस समय मेमोरी स्पेस एक प्रीमियम कमोडिटी हुआ करती थी। इस समस्या से निपटने के लिए NDA सरकार ने एक प्लान बनाया। यशवंत सिन्हा ने सदन में कहा, हम सभी इस तथ्य से अवगत हैं कि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र भविष्य का क्षेत्र बन जाएगा। तत्काल संकट, जो इस क्षेत्र में उभर रहा है वो Y2K समस्या से जुड़ा हुआ है। ये समस्या इस कैलेंडर ईयर के करीब हिट करेगी। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि कॉर्पोरेट जगत इस समस्या से निपटने के लिए पूरी तरह से सक्षम नहीं है। इन परिस्थितियों में, बिजनेस सेक्टर को Y2K समस्या से बाहर निकालने के लिए सरकारी मदद दी जाएगी। 1998 से 2004 के बीच आईटी क्षेत्र को लेकर लिए गए फैसलों में से ये एक फैसला था। इसके अलावा भी कई सारे निर्णय इस दौरान लिए गए जिसने कारण आईटी क्षेत्र में भारत का परचम लहराया।

1999-2000 में आईटी उद्योग करीब 6 बिलियन डॉलर था। यह अब 150 बिलियन डॉलर से अधिक का उद्योग है। अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 1998-2004 के बीच भारत के प्रधानमंत्री रहते हुए देश के सुनहरे भविष्य के लिए बार-बार टेक्नोलॉजी पर जोर दिया। उनकी सरकार के हर बजट में आईटी सेक्टर के लिए कुछ न कुछ होता था। इनमें सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रीय फैसला स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) बनाने को लेकर लिया गया फैसला रहा। SEZ बनाने का मकसद एक्सपोर्ट प्रोडक्शन के लिए एक ही स्थान पर व्यापक सुविधाएं प्रदान करना था। इसका परिणाम ये रहा कि इंडियन आईटी एक्सपोर्टर्स भी विदेशी कंपनियों को टक्कर देने के सक्षम बन सके।

उसी साल, वाजपेयी सरकार ने आईटी क्षेत्र से जुड़ी कई वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी को कम करने का प्रस्ताव रखा। अगले साल, वाजपेयी सरकार ने आयकर अधिनियम की धारा 10 ए और 10 बी के तहत आईटी उद्योग को दी गई रियायतें बढ़ा दीं। अटल जी के ये फैसले बेहद अहम साबित हुई। इन्हीं फैसलों की वजह से भारत में फिल्पकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियां भारत में उभर सकी।

आईटी क्षेत्र के अलावा विकास को गति देने के लिये अमेरिका की ‘नेशनल हाईवे सिस्टम’ की तर्ज पर उन्होंने 2001 में देश के चार महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता के बीच 4/6 लेन वाले राजमार्ग के निर्माण तथा श्रीनगर से कन्याकुमारी और पोरबंदर से सिलचर के बीच राजमार्ग के लिये स्वर्णिम चतुर्भुज योजना, उत्तर-दक्षिण और पूर्वी-पश्चिम गलियारा परियोजनाओं की शुरुआत की। इसके पीछे उनकी सरल सोच थी। विकास को गति देने के लिये सड़क का निर्माण कीजिए जैसा कि अमेरिका में हुआ। बाद की सरकारें उसी विचार पर आगे बढ़ी।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।