दैनिक भास्कर हिंदी: आर्थिक मोर्चों पर भी बेहद सफल थे अटल जी, IT के क्षेत्र में लिया था यह बड़ा फैसला

August 18th, 2018

हाईलाइट

  • पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी देश की राजनीति के अजातशत्रु होने के साथ-साथ बड़े आर्थिक सुधारक भी थे।
  • आर्थिक क्षेत्र के सुधारों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए याद किया जाएगा।
  • 1998 में सरकार बेहद गंभीर मोड़ पर खड़ी थी, लेकिन नाजुक दौर से अर्थव्यवस्था को अटल सरकार ने बखूबी बाहर निकाल लिया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी देश की राजनीति के अजातशत्रु होने के साथ-साथ बड़े आर्थिक सुधारक भी थे। देश में राजमार्गों के निर्माण की बात हो, विदेशों में तेल क्षेत्रों का अधिग्रहण या फिर आईटी क्षेत्र को बढ़ावा देने की बात हो, अटल जी को हमेशा आर्थिक क्षेत्र के सुधारों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए याद किया जाएगा। 1998 में सरकार की बागडोर संभालने और परमाणू परीक्षण के बाद देश की अर्थव्यवस्था बेहद गंभीर मोड़ पर खड़ी थी, लेकिन नाजुक दौर से अर्थव्यवस्था को अटल सरकार ने बखूबी बाहर निकाल लिया।

1998-99 के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक पूर्वी एशिया के देशों की जीडीपी में तेज गिरावट दर्ज हो रही थी। इंडोनेशिया की जीडीपी 15 फीसदी और दक्षिण कोरिया और थाइलैंड की जीडीपी में 5 से 7 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई थी। इसके अलावा दुनिया की पांच बड़ी इकोनॉमी में जापान मंदी के दौर से गुजर रहा था। दुनियाभर में ऐसी आर्थिक स्थिति के चलते 1998 में ग्लोबल जीडीपी में 2 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई थी। मार्च 1998 में सरकार की बागडोर संभालने के बाद देश की अर्थव्यवस्था बेहद गंभीर मोड़ पर खड़ी थी 1997-98 में विकास दर लुढ़क कर 5 फीसदी के पास पहुंच गई थी। महंगाई दर भी 8.8 फीसदी के उच्चतम स्तर पर जा चुकी थी। इन सब चुनौतियों से अटल जी ने महत्वपूर्ण फैसले लेकर इकोनॉमी को उभारा।

1999 के वसंत में बजट भाषण के बीच में, पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने एक संक्षिप्त, लेकिन महत्वपूर्ण घोषणा की। Y2K बग कंप्यूटर सिस्टम और डाटाबेस में वर्ष 2000 में हिट करेगा। उस समय मेमोरी स्पेस एक प्रीमियम कमोडिटी हुआ करती थी। इस समस्या से निपटने के लिए NDA सरकार ने एक प्लान बनाया। यशवंत सिन्हा ने सदन में कहा, हम सभी इस तथ्य से अवगत हैं कि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र भविष्य का क्षेत्र बन जाएगा। तत्काल संकट, जो इस क्षेत्र में उभर रहा है वो Y2K समस्या से जुड़ा हुआ है। ये समस्या इस कैलेंडर ईयर के करीब हिट करेगी। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि कॉर्पोरेट जगत इस समस्या से निपटने के लिए पूरी तरह से सक्षम नहीं है। इन परिस्थितियों में, बिजनेस सेक्टर को Y2K समस्या से बाहर निकालने के लिए सरकारी मदद दी जाएगी। 1998 से 2004 के बीच आईटी क्षेत्र को लेकर लिए गए फैसलों में से ये एक फैसला था। इसके अलावा भी कई सारे निर्णय इस दौरान लिए गए जिसने कारण आईटी क्षेत्र में भारत का परचम लहराया।

1999-2000 में आईटी उद्योग करीब 6 बिलियन डॉलर था। यह अब 150 बिलियन डॉलर से अधिक का उद्योग है। अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 1998-2004 के बीच भारत के प्रधानमंत्री रहते हुए देश के सुनहरे भविष्य के लिए बार-बार टेक्नोलॉजी पर जोर दिया। उनकी सरकार के हर बजट में आईटी सेक्टर के लिए कुछ न कुछ होता था। इनमें सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रीय फैसला स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) बनाने को लेकर लिया गया फैसला रहा। SEZ बनाने का मकसद एक्सपोर्ट प्रोडक्शन के लिए एक ही स्थान पर व्यापक सुविधाएं प्रदान करना था। इसका परिणाम ये रहा कि इंडियन आईटी एक्सपोर्टर्स भी विदेशी कंपनियों को टक्कर देने के सक्षम बन सके।

उसी साल, वाजपेयी सरकार ने आईटी क्षेत्र से जुड़ी कई वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी को कम करने का प्रस्ताव रखा। अगले साल, वाजपेयी सरकार ने आयकर अधिनियम की धारा 10 ए और 10 बी के तहत आईटी उद्योग को दी गई रियायतें बढ़ा दीं। अटल जी के ये फैसले बेहद अहम साबित हुई। इन्हीं फैसलों की वजह से भारत में फिल्पकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियां भारत में उभर सकी।

आईटी क्षेत्र के अलावा विकास को गति देने के लिये अमेरिका की ‘नेशनल हाईवे सिस्टम’ की तर्ज पर उन्होंने 2001 में देश के चार महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता के बीच 4/6 लेन वाले राजमार्ग के निर्माण तथा श्रीनगर से कन्याकुमारी और पोरबंदर से सिलचर के बीच राजमार्ग के लिये स्वर्णिम चतुर्भुज योजना, उत्तर-दक्षिण और पूर्वी-पश्चिम गलियारा परियोजनाओं की शुरुआत की। इसके पीछे उनकी सरल सोच थी। विकास को गति देने के लिये सड़क का निर्माण कीजिए जैसा कि अमेरिका में हुआ। बाद की सरकारें उसी विचार पर आगे बढ़ी।

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