comScore

भारती एयरटेल और टाटा ग्रुप ने 5जी नेटवर्क सॉल्यूशंस के लिए हाथ मिलाया

June 22nd, 2021 00:29 IST
भारती एयरटेल और टाटा ग्रुप ने 5जी नेटवर्क सॉल्यूशंस के लिए हाथ मिलाया

हाईलाइट

  • भारती एयरटेल और टाटा ग्रुप ने भारत में 5जी नेटवर्क के लिए साझेदारी की
  • जनवरी 2022 से व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होगा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारती एयरटेल और टाटा ग्रुप ने सोमवार को भारत में 5जी नेटवर्क सॉल्यूशंस के लिए रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की। एक बयान में कहा गया, टाटा समूह ने ओ-आरएएन (ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क) आधारित रेडियो और एनएसए/एसए (नॉन-स्टैंडअलोन/स्टैंडअलोन) कोर विकसित किया है। ग्रुप ने भागीदारों की क्षमताओं का लाभ उठाते हुए एक पूरी तरह से स्वदेशी दूरसंचार एकीकृत किया है। यह जनवरी 2022 से व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होगा।

बयान में कहा गया एयरटेल सरकार के नियमों के अनुसार भारत में अपनी 5जी योजनाओं के हिस्से के रूप में स्वदेशी सॉल्यूशंस की परियोजनाओं को जनवरी 2022 में शुरू करेगा। बयान के अनुसार, ये मेड इन इंडिया 5जी उत्पाद और समाधान वैश्विक मानकों के अनुरूप हैं और मानक ओपन इंटरफेस और ओ-आरएएन एलायंस द्वारा परिभाषित अन्य उत्पादों के साथ इंटर-ऑपरेट करते हैं। 5जी समाधान, जो एक बार एयरटेल के विविध और ब्राउनफील्ड नेटवर्क में व्यावसायिक रूप से सिद्ध हो चुका है, भारत के लिए निर्यात के अवसर खोलेगा, जो अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार बाजार है।

भारती एयरटेल के एमडी और सीईओ, (भारत और दक्षिण एशिया), गोपाल विट्टल ने कहा, हम भारत को 5जी और संबद्ध प्रौद्योगिकियों के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाने के लिए टाटा समूह के साथ जुड़कर खुश हैं। अपने विश्व स्तरीय प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र और प्रतिभा पूल के साथ, भारत दुनिया के लिए अत्याधुनिक समाधानों और अनुप्रयोगों के निर्माण के लिए अच्छी स्थिति में है। यह भारत को एक नवाचार और विनिर्माण गंतव्य बनने के लिए बड़े पैमाने पर बढ़ावा देगा।

टाटा ग्रुप के एन. गणपति सुब्रमण्यम ने कहा कि एयरटेल के साथ मिलकर हम एक समूह के तौर पर 5जी नेटवर्क पर काम कर रहे हैं और उससे जुड़ी संभावनाओं को लेकर हम काफी उत्साहित हैं। हम नेटवर्किं ग स्पेस में इन अवसरों को संबोधित करने के लिए एक विश्व स्तरीय नेटवर्किं ग उपकरण और समाधान व्यवसाय बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम इस पहल में एयरटेल को अपने ग्राहक के रूप में पाकर खुश हैं।

एयरटेल ओ-आरएएन गठबंधन का एक बोर्ड सदस्य है और भारत में ओ-आरएएन आधारित नेटवर्क का पता लगाने और लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस साल की शुरुआत में, एयरटेल हैदराबाद में अपने लाइव नेटवर्क पर 5जी का प्रदर्शन करने वाली भारत की पहली दूरसंचार कंपनी बन गई थी। कंपनी ने दूरसंचार विभाग द्वारा आवंटित स्पेक्ट्रम का उपयोग करके प्रमुख शहरों में 5जी परीक्षण शुरू कर दिया है।

टाटा समूह के दूरसंचार और मीडिया उद्यम एसएमई और थोक से घरेलू नेटवर्क तक वैश्विक व्यापारिक घरानों की संचार आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड भी ओ-आरएएन एलायंस का सदस्य है।

5जी नेटवर्क को लेकर भारत के लिए यह एक अच्छी खबर आई है। अब भारत के पास अपना स्वदेशी 5जी नेटवर्क होगा। भारत के लिए 5जी नेटवर्क सॉल्यूशन देश में ही बनेगा।

कमेंट करें
jeQ3V
NEXT STORY

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।