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बदनामी से बचने के लिए गलत काम को उजागर करे सहकारी क्षेत्र : गोयल

October 13th, 2019 22:31 IST
 बदनामी से बचने के लिए गलत काम को उजागर करे सहकारी क्षेत्र : गोयल

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को कहा कि सहकारी क्षेत्र का निर्माण करनेवालों को सोचना होगा कि स्व-विनियमन से क्षेत्र को किस तरह मजबूत किया जाए और गलत कामों को उजागर किया जाए।

गोयल ने यह बात पंजाब एवं महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक घोटाले के संदर्भ में कही।

उन्होंने कहा, मैं नहीं मानता कि इतने बड़े बैंक में इतना बड़ा घोटाला सैकड़ों लोगों की संलिप्तता के बिना हो सकता है। इतने सारे खाते खुले होंगे। इतने सारे फंड की हेराफेरी हुई होगी। इसमें शाखाएं संलिप्त होंगी, प्रबंधन शामिल होगा, कर्मचारी संलिप्त होंगे।

उन्होंने कहा, मैं समझता हूं कि को-ऑपरेटिव सेक्टर के जो हिंतचिंतक हैं उनका, हम सबका दायित्व है कि पूरे सेक्टर की बदनामी न हो। कोई ऐसा काम न हो जिससे इसके अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लग जाए।

गोयल यहां प्रगति मैदान में आयोजित तीन दिवसीय भारत अंतर्राष्ट्रीय सहकारी व्यापार मेला (आईआईसीटीएफ)-2019 के समापन समारोह में बोल रहे थे।

उन्होंने मेले के आयोजन के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के प्रयासों का जिक्र करते हुए इसे सफल कोशिश करार दिया।

गोयल ने बताया, मेले में देश-विदेश से लगभग 35,000 लोग पहुंचे और तकरीबन 7,000-8,000 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ।

उन्होंने इसे एक अच्छी शुरुआत बताते हुए कहा, यह महज शुरुआत है और इससे अलग-अलग क्षेत्र के को-ऑपरेटिव को जोड़ने का एक सफल प्रयोग हुआ है, जोकि अब देशभर में अलग-अगल स्थानों पर भी हो सकता है।

उन्होंने कहा कि और बड़े स्तर पर इस तरह का आयोजन करने की दिशा में सरकार और सहकारी क्षेत्र की तरफ से कोशिशें होनी चाहिए।

गोयल ने कहा कि देश के जो बड़े उद्योग हैं, उनसे भी चर्चा करके उनको भी इससे जोड़ा जा सकता है।

उन्होंने सहकारी क्षेत्र को बल प्रदान करने के लिए इससे रेलवे को जोड़ने की बात कही। गोयल रेल मंत्री भी हैं।

गोयल ने कहा, हमारे 6500 स्टेशन हैं। क्या इन स्टेशनों पर को-ऑपरेटिव स्टॉल खोले जा सकते हैं, इस दिशा में प्रयास किया जाना चाहिए।

उन्होंने रेलवे स्टेशन के साथ-साथ हवाईअड्डों और बस अड्डों पर को-ऑपरेटिव क्षेत्र में बनने वाली वस्तुओं के आउटलेट खोलने की बात कही।

उन्होंने कहा, इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए हमारे मंत्रालय की ओर से जो मदद की दरकार होगी वह देने के लिए हम तैयार हैं।

उन्होंने छोटे-छोटे सहकारी संगठनों को बढ़ावा देने पर बल दिया।

उन्होंने कहा, जब साथ में काम करेंगे तो सफलता मिलेगी।

उन्होंने कहा कि देश के रिटेल स्टोर और हर माल में को-ऑपरेटिव स्टॉल खोलने का प्रयास किया जाना चाहिए।

गोयल ने कहा, 2022 में जब हम देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे तब हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हर घर में को-ऑपरेटिव सेक्टर में निर्मित उत्पाद पहुंचे।

उन्होंने कहा कि देश में सहकारी आंदोलन को आगे बढ़ाने में सहकार भारती की अहम भूमिका होगी।

तीन दिवसीय इस मेले का उद्घाटन शुक्रवार को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया था। मेले में 35 देशों के सहकारी संगठनों ने हिस्सा लिया।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।