दैनिक भास्कर हिंदी: AGR Dues: सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को दी बड़ी राहत, AGR बकाया चुकाने के लिए मिला 10 साल का समय

September 1st, 2020

हाईलाइट

  • सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को दी बड़ी राहत
  • एजीआर से संबंधित बकाया राशि चुकाने के मिले 10 साल
  • टेलिकॉम कंपनियों को 31 मार्च 2021 तक AGR बकाया के 10 फीसदी चुकाने होंगे

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। टेलीकॉम कंपनियों के लिए समायोजित सकल आय (AGR-Adjusted Gross Revenue) पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ी राहत दी है। टेलीकॉम कंपनियों को एजीआर से संबंधित बकाया राशि चुकाने के लिए शीर्ष अदालत में दस साल का समय दिया है। कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि 21 मार्च, 2021 तक वे अपनी कुल राशि का दस फीसदी भुगतान करेंगे।

बता दें कि टेलिकॉम कंपनियों पर कुल 1.6 लाख करोड़ रुपये बकाया हैं। SC ने कहा है, 10 साल की राहत देने की ये अवधि 1 अप्रैल 2021 से शुरू होगी। टेलिकॉम कंपनियों को 31 मार्च 2021 तक एजीआर बकाया के 10 फीसदी चुकाने होंगे। बाकी का पैसा हर साल 7 फरवरी को एक किस्त के रूप में देना होगा।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है कि, किश्तों का भुगतान हर आगामी वर्ष की 7 फरवरी तक हो जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने टेलीकॉम कंपनियों से यह भी कहा कि, इसमें कोई गड़बड़ी होने पर अधिक ब्याज का भुगतान करना पड़ेगा और भुगतान न होने की स्थिति में कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा। इसमें यह भी कहा गया कि, यह वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे की इस बात पर सहमत है कि नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) को पहले यह तय करना चाहिए कि स्पेक्ट्रम संकल्प की कार्यवाही का विषय हो सकता है या नहीं।

सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा, एजीआर पर बकाए का भुगतान करने के लिए 20 साल की समय सीमा तय करने की बात सही है क्योंकि वोडाफोन आइडिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने 58,000 करोड़ रुपये की एजीआर बकाया राशि की मांग को स्वीकार कर लिया और यह कहा कि, इसे चुकाने और शीर्ष अदालत के निर्णय का मान रखने का एक ही तरीका है और वह ये कि उन्हें 20 साल की समयावधि दी जाए। हालांकि, वह बाद में 15 साल की समयावधि के लिए तैयार हो गए।

यहां तक कि एयरटेल ने भी एजीआर बकाया चुकाने के लिए 15 साल मांगे हैं। केंद्र ने शीर्ष अदालत को सूचित किया था, मंत्रिमंडल ने इस मुद्दे पर विचार करते हुए बीस साल की समयावधि पर फैसला किया है और यह राहत अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ने के मद्देनजर प्रदान की गई है।

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