मौसम की बेरुखी: 50 गायों को बचाने की जद्दोजहद में बेबस किसान ने कृषि मंत्री से लगाई गुहार, फसल बुरी तरह प्रभावित

50 गायों को बचाने की जद्दोजहद में बेबस किसान ने कृषि मंत्री से लगाई गुहार, फसल बुरी तरह प्रभावित
  • किसान ने कृषि मंत्री को फोन कर सुनाई व्यथा
  • खेतों में हरियाली की जगह सूखी जमीन और गहरी दरारें नजर आ रही हैं
  • पशुओं को सीमित पानी में ही गुजारा करना पड़ रहा है

डिजिटल डेस्क, बीड़। इन आंखों में इतनी मायूसी शायद कभी नहीं थी, कम बारिश और फसल सूखने का डर हर पल मानो मन में बस यही सवाल उठा रहा है कि कल क्या होगा? परिवार के सामने खड़ा आर्थिक संकट अब उन 50 गायों के निवाला छीनने को तैयार है, जिनके बल पर कभी परिवार ने आर्थिक खुशहाली के सपने देखे थे, लेकिन कम बारिश और सूखे जैसे हालात ने यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि इन बेजुबान पशुओं को कैसे बचाया जाए, पशुओं के लिए रोजाना चारा और पानी की व्यवस्था करना जरूरी है।


बारिश के अभाव में बुरी तरह प्रभावित

आष्टी तहसील के टाकलसिंग गांव के युवा किसान कुंडलिक जगताप और उनकी पत्नी लक्ष्मी जगताप इस संकट से जूझ रहे हैं। जिस खेती पर उनके परिवार का गुजर-बसर निर्भर है, वह बारिश के अभाव में बुरी तरह प्रभावित हुई है। खेतों में हरियाली की जगह सूखी जमीन और गहरी दरारें नजर आ रही हैं। बड़े-बड़े पेड़ सूखने लगे हैं। जगताप के अनुसार, पशुओं के लिए प्रतिदिन करीब 5 हजार रुपये का चारा लग रहा है। खेती से कोई आय नहीं होने के कारण यह खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। इसके साथ ही पानी की समस्या गंभीर हो रही है। पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण पशुओं को सीमित पानी में ही गुजारा करना पड़ रहा है।


किसान ने कृषि मंत्री को फोन कर सुनाई व्यथा

बिगड़ती स्थिति से परेशान किसान कुंडलिक जगताप ने सीधे खेत से कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे को फोन कर अपनी व्यथा बताई। उन्होंने कहा कि उनकी स्थिति बेहद गंभीर है और सरकार को जल्द से जल्द मदद करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और लोग गर्मी के दिनों की तरह पानी के लिए भटक रहे हैं। पशुओं के चारे और पानी का संकट भी गंभीर हो गया है। जगताप ने अपील की है कि जिले में तत्काल सूखा घोषित कर राहत और आवश्यक उपाययोजनाएं उपलब्ध कराई जाएं।

किसानों के हिस्से में निराशा

आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे किसानों के हिस्से में निराशा आती नजर आ रही है। बारिश के मौसम के साढ़े तीन महीने बीत जाने के बावजूद जिले के कई इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेती संकट में फंस गई है। खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं और किसानों की आंखों के सामने फसलें सूखकर बर्बाद हो रही हैं। ऐसे में किसानों के सामने फसल बचाने के साथ-साथ पशुधन को बचाने का भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि यदि सरकार इन समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेती, तो मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

Created On :   18 Sept 2026 8:03 PM IST

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