Bhopal: ‘नाट्ययोन्मेष’, 'पारमिता' एवं ‘माटी के लड्डू ’ पुस्तकें हुई लोकार्पित

‘नाट्ययोन्मेष’, पारमिता एवं ‘माटी के लड्डू ’ पुस्तकें हुई लोकार्पित

भोपाल। आईसेक्ट पब्लिकेशन, वनमाली सृजन पीठ एवं स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में शारदा सभागार, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय परिसर में पुस्तक लोकार्पण एवं चर्चा का आयोजन समारोह पूर्वक किया गया।

इस अवसर पर डॉ. साधना शुक्ला का काव्य संग्रह 'पारमिता', एकांकी संग्रह 'नाट्योन्मेष' तथा सुश्री सुधा दुबे की बाल साहित्य पर केन्द्रित पुस्तक ‘माटी के लड्डू' का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया। उल्लेखनीय है कि इन तीनों पुस्तकों का प्रकाशन आकर्षक कलेवर के साथ आईसेक्ट पब्लिकेशन द्वारा किया गया है।

लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में महेश सक्सेना, सचिव-निदेशक, बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र, भोपाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आत्मीय सान्निध्य मुकेश वर्मा, वरिष्ठ कथाकार एवं अध्यक्ष, वनमाली सृजन पीठ, भोपाल, बलराम गुमास्ता, वरिष्ठ कवि, एवं डॉ. साधना गंगराड़े, अध्यक्ष, हिन्दी लेखिका संघ, मध्य प्रदेश भोपाल का प्राप्त हुआ।

लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मुकेश वर्मा, प्रतिष्ठित कथाकार एवं अध्यक्ष, वनमली सृजन पीठ, भोपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि आईसेक्ट पब्लिकेशन ने स्थानीय से लेकर प्रवासी रचनाकारों को रचनात्मक मंच उपलब्ध कराते हुए बहुत कम समय में प्रकाशन जगत में नये कीर्तिमान स्थापित किये हैं। साहित्य की समस्त विधाओं के साथ–साथ विभिन्न विषयों पर उल्लेखनीय पुस्तकों का उत्कृष्ट प्रकाशन किया गया है। स्थापित रचनाकारों के साथ ही नये लेखकों-लेखिकाओं की पुस्तकों का प्रकाशन और उन पर विमर्श का आयोजन करना प्रेरणादायक है।

वरिष्ठ कवि बलराम गुमास्ता ने लोकार्पित पुस्तकों की लेखिकाओं को बधाई देते हुए कहा यह बहुत सुखद है कि बड़ी संख्या में नये रचनाकार अपनी कृतियाँ लेकर साहित्य जगत में प्रवेश कर रहे हैं। इनमें महिला रचनाकारों का विविध विषयों पर लेखन कर सम्मिलित होना और सम्मानित होना शुभ संकेत हैं। उन्होंने आगे कहा कि बाल साहित्य और पाठ्यक्रम में अंतर होना जरूरी होता है, तभी बच्चों का मन बाल साहित्य की पुस्तकों को पढ़ने में रमता है।

लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. महेश सक्सेना ने कहा कि बाल साहित्य हमारी आने वाली पीढ़ी को सँवारने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। एकांकी और कविताएँ समाज को जागरूक करती है। वास्तव में पुस्तक संस्कृति समाज को सही दिशा देने के लिए बहुत आवश्यक है। बड़े पैमाने पर महिला लेखिकाओं द्वारा पुस्तकों की रचना करना आने वाले कल के लिए बहुत सार्थक है।

सर्वप्रथम लोकार्पित पुस्तक 'नाट्योन्मेष' की लेखिका डॉ. साधना शुक्ला ने कहा कि इस एकांकी संग्रह 'नाट्योन्मेष' में उन्होंने अपने द्वारा रचित और निर्देशित मुख्य नाट्य एकांकियों को संग्रहित किया है।

उल्लेखनीय है कि यह पुस्तक 'नाट्योन्मेष' मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चयनित हुई है। इक्यावन हजार रुपये राशि से सम्मानित किया जाएगा। इस पुस्तक को कला मंदिर, भोपाल द्वारा साहित्य कथा रत्न सम्मान–25 से भी सम्मानित किया गया है।

सुश्री कमल चंद्रा जी ने इस पुस्तक की समीक्षा करते हुए कहा कि इसमें ‘इतिहास एवं पुराणों से मोती चुनकर एक सुंदर माला पिरोई है। पुस्तक कि भाषा शैली सरल और पात्रों के अनुकूल है ।

इस कार्यक्रम में डॉ. साधना शुक्ला के ही काव्य संग्रह ‘पारमिता’ का भी लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया। साधना शुक्ला ने पुस्तक के शीर्षक “पारमिता “ का अर्थ बताते हुए कहा कि पारमिता पूर्णता का परिचालक है। उन्होंने अपनी चुनिंदा कवितायों का पाठ भी किया।

उल्लेखनीय है कि प्रयागराज से इस काव्य संग्रह "पारमिता" को काव्य शिरोमणि सम्मान-2025 से सम्मानित किया गया है।

पुस्तक की समीक्षा करते हुए नीलिमा रंजन जी ने कहा कि इस पुस्तक में संग्रहित कविताएँ सामाजिक ताने बाने को बड़ी खूबसूरती से प्रदर्शित करती है। कविताओं की भाषा शैली सरल, सहज एवम् भाव पूर्ण है ।

लोकार्पण समारोह में लेखिका सुधा दुबे कि बाल साहित्य पर आधारित पुस्तक ‘माटी के लड्डू' का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। सुधा दुबे ने पुस्तक के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षक के तौर पर अपने 36 साल के अनुभवों को कहानियों में पिरोया है। इस पुस्तक में कहानियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के महत्व को बच्चों तक पहुचाने कि कोशिश की गई है ।

उल्लेखनीय है कि माटी के लड्डू' पुस्तक को अखिल भारतीय कला मंदिर संस्था, अमृत महोत्सव एवं अलंकरण सम्मान समारोह में बाल साहित्य कला रत्न सम्मान–25, विद्योत्तमा फाउंडेशन नासिक द्वारा 'विद्धोत्तमा साहित्य सारथी'अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मान 2026, सिरसा हरियाणा द्वारा बाल साहित्य रत्न सम्मान, बाल साहित्य शोध केंद्र के वार्षिक उत्सव में भीष्म सिंह चौहान बाल साहित्यकार सम्मान 2025 जैसे महत्वपूर्ण पुरस्कार मिल चुके हैं।

युवा रचनाकार रूपाली सक्सेना ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए कहा कि पुस्तक का शीर्षक आकर्षित करने वाला है एवम् बच्चों में रोचकता उत्पन्न करने वाला है। साथ ही पुस्तक के माध्यम से बच्चों को पर्यावरण से संबंधित प्रेरणादायक संदेश देने का प्रत्न्य किया गया है।

कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए महीप निगम, वरिष्ठ प्रबंधक, आईसेक्ट पब्लिकेशन (मार्केटिंग) ने आईसेक्ट पब्लिकेशन की गौरवमयी यात्रा पर सारगर्भित प्रकाश डाला।

आरंभ में अतिथियों का स्वागत शिक्षाविद् डॉ. सत्येन्द्र खरे, आईसेक्ट पब्लिकेशन के वरिष्ठ प्रबंधक (मार्केटिंग) महीप निगम एवं युवा कवि मोहन सगोरिया द्वारा किया गया। स्वागत वक्तव्य डॉ. विशाखा राजुरकर, युवा कवयित्री द्वारा दिया गया।

लोकार्पण समारोह में बड़ी संख्या में वरिष्ठ साहित्यकारों, लेखकों, शोधार्थियों, शिक्षाविदों एवं साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम ने साहित्यिक संवाद और नई रचनाओं के परिचय के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। कार्यक्रम के अंत में सभी के प्रति आभार डॉ. मौसमी परिहार, युवा कवयित्री द्वारा व्यक्त किया गया।

Created On :   1 July 2026 2:07 PM IST

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