MP News: छात्रों का भविष्य बनाने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षकों का भविष्य अधर में, 10 साल से 20 हजार में कर रहे प्रशिक्षण

छात्रों का भविष्य बनाने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षकों का भविष्य अधर में, 10 साल से 20 हजार में कर रहे प्रशिक्षण

डिजिटल डेस्क, भोपाल। प्रदेश भर से आए सरकारी स्कूलों में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने सोमवार को भोपाल के अंबेडकर पार्क में अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रशिक्षकों का कहना है कि पिछले 10 वर्षों से उनके वेतन को नहीं बढ़ाया गया है। जबकि अन्य विभागों और कर्मचारियों के वेतनों में समय-समय पर वृद्धि हुई है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि 10 साल से व्यावसायिक प्रशिक्षक 20 हजार सैलरी पर काम कर रहे।

महंगाई के चलते घर चला पाना मुश्किल हो रहा है। उन्हें न सम्मानजनक वेतन मिल रहा है, न नौकरी की सुरक्षा और न ही श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले बुनियादी अधिकार दिए जा रहे। प्रदर्शनकारी प्रशिक्षकों ने बताया कि एक बार वेतन वृद्धी करने के साथ ही उसे वापस ले लिया गया। यह पहली बार हुआ कि वेतन 22 हजार से घटाकर 20 हजार कर दिया गया। इसके साथ ही उनको मिलने वाली सीएल भी सितम्बर 2025 में खत्म कर दी गई। इसके लिए कोई आदेश भी जारी नहीं किया गया। तकनीकी कारणों से अगर ई-अटेंडेंस नहीं होती तो उनको अनुपस्थित मान लिया जाता है।

प्राचार्यों के कहने पर भी बात नहीं सुनी जाती। व्यावसायिक प्रशिक्षकों को मातृत्व अवकाश पर जाने पर नौकरी से हटा दिया जाता है। महिला कर्मचारी असुरक्षा के घेरे में हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भारत सरकार 12 महीने का वेतन देती है लेकिन अधिकारियों की मनमानी के चलते उनका वेतन कम दिया जाता है।

कई बार दे चुके आवेदन

व्यावसायिक प्रशिक्षक प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि संगठन अपनी मांगों को लेकर कई बार मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और डीपीआई कार्यालय को आवेदन दिया जा चुका है। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिसके चलते वो आंदोलन को मजबूर हैं। प्रदर्शनकारी प्रशिक्षकों ने चेतावनी दी है कि मांगे माने जाने तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रशिक्षकों ने कहा कि अब मांगों को लेकर डीपीआई के बाहर प्रदर्शन करेंगे।

कुशल श्रेणी के हैं शिक्षक

प्रशिक्षकों ने बताया कि राजपत्र वे कुशल श्रेणी में आते हैं। लेकिन सरकार उन्हें कर्मचारी ही नहीं मानती। जबकि वो उच्च कुशल श्रेणी में आते हैं। उसी आधार पर वेतन भी देना चाहिए।

महिला प्रशिक्षक बच्चों के साथ पहुंची प्रदर्शन में

भरी गर्मी के बीच बड़ी संख्या में महिला प्रशिक्षक भी प्रदेश के कई जिलों से भोपाल प्रदर्शन के लिए पहुंची। इस दौरान उनके साथ उनके बच्चे भी थे। महिलाओं ने भी अपनी परेशानी सामने रखी। प्रदेश में व्यावसायिक प्रशीक्षकों की कुल संख्या करीब 6000 है। वेतन में केंद्र और राज्य सरकार दोनों का अंश होता है।

प्रमुख मांगे

दिल्ली-हरियाणा की तर्ज पर सम्मानजनक वेतन मिले। 5-10 प्रतिशत की वेतन वृद्धि करे।

श्रम नियम के तहत अवकाश मिले। सीएल, मेडिकल और महिलाओं को मातृत्व अवकाश मिले।

स्थानीय विभागीय समिति का गठन हो।

12 माह की जॉब सुरक्षा मिले।

Created On :   1 July 2026 12:03 AM IST

Tags

Next Story