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प्रशासन की मिलीभगत या कारोबारी चाल?: भोपाल का व्यापारी और भगोड़े विजय माल्या का गुप्त सौदा! 50 करोड़ की जमीन मात्र 8 करोड़ में बिकने से मचा बवाल

- 50 करोड़ की सरकारी जमीन मात्र 8 करोड़ 3 लाख में बिकने पर बवाल।
- हर्ष पैकेजिंग फर्म पर शक – बाकी रकम हवाला से ट्रांसफर होने की आशंका।
- जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल – क्या विजय माल्या को फायदा पहुँचाने का खेल?
भोपाल। राजधानी भोपाल में कारोबारी जगत और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। खबर है कि एक व्यापारी ने भगोड़े विजय माल्या को फायदा पहुँचाने की तैयारी कर ली है। मामला भोपाल के सरवर गांव स्थित यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड से जुड़ा है, जो विजय माल्या की कंपनी है। इस कंपनी से संबंधित शराब का बॉटलिंग प्लांट लगभग 20 एकड़ जमीन पर बना हुआ है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस जमीन की सरकारी कीमत करीब 50 करोड़ रुपये आँकी गई है, लेकिन जिला प्रशासन ने इसे मात्र 8 करोड़ 3 लाख रुपये में भोपाल की हर्ष पैकेजिंग फर्म को हस्तांतरित कर दिया है। इस सौदे की रजिस्ट्री पर ही करीब 6 करोड़ 20 लाख रुपये की स्टांप ड्यूटी लग रही है।
यही वजह है कि यह सौदा अब चर्चा और शक-सवालों के घेरे में आ गया है। कारोबारी जगत में ज़ोर-शोर से कहा जा रहा है कि आखिरकार 50 करोड़ की सरकारी संपत्ति केवल 8 करोड़ 3 लाख में कैसे बिक गई? क्या बाक़ी का पैसा किसी गुप्त रास्ते से ट्रांसफर किया जा रहा है? क्या इस पूरे खेल के पीछे मकसद भगोड़े विजय माल्या को फायदा पहुँचाना है?
जानकारों का कहना है कि यदि प्रशासन मामले की गंभीरता से जाँच करे तो यह सौदा हवाला जैसे किसी बड़े खेल का हिस्सा साबित हो सकता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिला प्रशासन ने इतनी बड़ी सरकारी जमीन को औने-पौने दाम पर बेचने की इजाज़त क्यों दी?
अब निगाहें प्रशासन और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि क्या वे इस मामले का सच सामने लाएँगी या फिर यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह दब जाएगा।
कुल मिलाकर, भोपाल में हुआ यह सौदा न केवल कारोबारी जगत बल्कि आम जनता के बीच भी गहरी आशंकाएँ पैदा कर रहा है।
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Created On :   31 Aug 2025 2:05 AM IST