अल नीनो: प्रकाश आंबेडकर ने साधा निशाना - सूखे से निपटने की ठोस योजना नहीं, संकट में है किसान

डिजिटल डेस्क, बुलढाणा. राज्य में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने के बावजूद सरकार ने खाद्यान्न, पानी और चारे की व्यवस्था के लिए कोई ठोस तैयारी नहीं की है। अल नीनो के संभावित प्रभाव की जानकारी होने के बावजूद इस संकट से निपटने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं की गई। यह आरोप वंचित बहुजन आघाड़ी के नेता एड. प्रकाश आंबेडकर ने बुलढाणा में प्रसार माध्यमों से बातचीत के दौरान लगाया। वे 25 अक्टूबर को धम्म परिषद में शामिल होने के लिए बुलढाणा आए थे।
आंबेडकर ने कहा कि अकोला में आयोजित सभा में उनके द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के बाद ही एक मंत्री सक्रिय हुए और नागरिकों से पानी का सावधानीपूर्वक उपयोग करने की अपील की गई। सूखे की स्थिति में आम नागरिकों को खाद्यान्न, पानी और चारा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि शासन इन बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं करता है, तो नागरिकों को मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और सत्ताधारी पदाधिकारियों के घरों के सामने जाकर जवाब मांगना चाहिए। उन्होंने नागरिकों से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया।
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पेड़ों की कटाई और किसानों के मुद्दे पर भी घेरा
भीमाशंकर क्षेत्र में हजारों पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाते हुए आंबेडकर ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्रभर में वृक्षों की कटाई जारी है। उन्होंने कहा कि भगवान के नाम पर मदद मांगने वालों के खिलाफ ही अब कार्रवाई करने का समय आ गया है।
दिवाली से पहले किसानों को 5,000 रुपये की सहायता देने की घोषणा का उल्लेख करते हुए आंबेडकर ने किसानों के मतदान संबंधी रुख पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दों के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं को किसान मतदान नहीं करते। किसान नेता रविकांत तुपकर का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब तुपकर किसानों के लिए संघर्ष कर रहे थे, तो उन्हें मतदान क्यों नहीं मिला?
हाल ही में संपन्न शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव का उल्लेख करते हुए आंबेडकर ने मतदाताओं को पैसे दिए जाने के आरोपों को लेकर शिक्षकों की आलोचना की।
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शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में पैसों के लेन-देन पर सवाल
अमरावती संभागीय शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव का संदर्भ देते हुए आंबेडकर ने आरोप लगाया कि उम्मीदवारों ने मतदाताओं पर पैसे खर्च किए। उन्होंने दावा किया कि 5 उम्मीदवारों ने प्रत्येक मतदाता पर 5,000 रुपये खर्च किए। उन्होंने सवाल उठाया कि इस धनराशि का स्रोत क्या है और क्या आयकर विभाग तथा प्रवर्तन निदेशालय इस मामले की जांच करेंगे?
आंबेडकर ने आदिवासी विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने चुनाव में कथित धनबल के इस्तेमाल की जांच और संबंधित एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए।
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