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Gadchiroli News: आधी रात आश्रमशाला से बाहर निकलीं दो छात्राएं, सुबह नाश्ते के समय चला पता

Gadchiroli News सरकारी आश्रमशालाओं में विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और देखरेख को लेकर प्रशासन के दावों की वास्तविकता मसेली की घटना ने उजागर कर दी है। यहां की शासकीय आश्रमशाला में 25 मंजूर पदों में से 12 पद रिक्त हैं। ऐसे में केवल 13 कर्मचारियों के भरोसे 252 विद्यार्थी और स्कूल- छात्रावास का कामकाज चल रहा है। 29 सितंबर की आधी रात को कक्षा दसवीं की दो छात्राएं आश्रमशाला से बाहर चली गईं। हैरानी की बात यह है कि दोनों छात्राओं के गायब होने की जानकारी अगले दिन सुबह 8 बजे नाश्ते के समय मिली। इस घटना ने आश्रमशाला की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मसेली की आश्रमशाला में पहली से 10वीं तक की कक्षाएं होकर यहां 112 छात्र और 140 छात्राएं ऐसे कुल 252 विद्यार्थी शिक्षारत हैं। गत 29 सितंबर की रात करीब 12 बजे दोनों छात्राएं आश्रमशाला से बाहर निकली थीं। लेकिन रात में उनकी अनुपस्थिति का पता नहीं चल पाया। अगले दिन सुबह नाश्ते के समय अन्य छात्राओं ने दोनों के मौजूद नहीं होने की जानकारी शिक्षकों को दी। इसके बाद मामला सामने आया। उल्लेखनीय है कि, 28 सितंबर को शाला प्रबंधन समिति के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आश्रमशाला अधीक्षक वानखेड़े गड़चिरोली गईं थीं।
29 सितंबर को साप्ताहिक अवकाश होने से वे गड़चिरोली से नागपुर रवाना हो गई। उनकी अनुपस्थिति में छात्राओं की देखरेख की जिम्मेदारी शिक्षिका के. एस. नेवारे को सौंपी गई थी। बताया जाता है कि वह रात करीब 10 बजे तक छात्रावास में मौजूद थी। इस पूरे मामले में मोबाइल फोन का भी एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। 27 सितंबर को अधीक्षक वानखेड़े को एक छात्रा के पास एंड्रॉयड मोबाइल फोन मिला था।
आश्रमशाला में मोबाइल इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होने के कारण उन्होंने फोन जब्त कर लिया और इसकी जानकारी प्रधानाचार्य को दी। प्रधानाचार्य ने संबंधित छात्रा के माता-पिता से फोन पर संपर्क कर पूछा कि क्या उन्होंने बेटी को मोबाइल दिया है। इस पर माता-पिता ने मोबाइल नहीं देने की बात कही। इस मामले में प्रधानाचार्य की शिकायत के बाद पुलिस निरीक्षक डोम ने मोबाइल की मदद से दोनों छात्राओं की तलाश शुरू की। आखिरकार मसेली से करीब 45 किलोमीटर दूर कुरखेड़ा में दोनों छात्राएं मिली।
विशेष बात यह है कि पिछले महीने इसी कोरची तहसील के कोटगुल आश्रमशाला में कक्षा नौवीं में पढ़ने वाली एक छात्रा की मलेरिया के कारण मौत हो गई थी। उस घटना के बाद आश्रमशालाओं में स्वास्थ्य सुविधाओं और विद्यार्थियों की देखरेख को लेकर सवाल उठे थे। अब मसेली आश्रमशाला की दो छात्राओं के आधी रात को बाहर जाने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। आश्रमशाला में विद्यार्थियों को शिक्षा देने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी प्रशासन की है। लेकिन कर्मचारियों की कमी और रात के समय निगरानी व्यवस्था में सामने आई खामियों ने छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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Created On :   2 Oct 2026 1:08 PM IST














