Gadchiroli News: धान कटाई के बाद खाली खेतों में सरसों उगाकर बढ़ाएं आमदनी

Gadchiroli News खरीफ सत्र में धान की कटाई के बाद खाली रहने वाली खेतों की जमीन अब किसानों की अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन सकती है। किसान इस जमीन का उपयोग रबी सत्र में सरसों जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए करें। यह आह्वान जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा ने किया है। जिले में इस वर्ष धान कटाई के बाद खाली रहने वाले 2,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषि विभाग और आत्मा के संयुक्त प्रयासों से इस अभियान को गति दी जा रही है।
जिला वार्षिक योजना 2026-27 के तहत फसल विविधीकरण कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को रबी सत्र में सरसों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से मंगलवार, 3 नवंबर को समाज कल्याण भवन में जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा की अध्यक्षता में एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें सरसों की खेती का विस्तार, उन्नत उत्पादन तकनीक, बीज एवं अन्य कृषि निवेशों का नियोजन, फसल प्रबंधन, विपणन और मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन किया।
जिले में खरीफ सत्र के दौरान बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है। कटाई के बाद काफी कृषि भूमि रबी सत्र में खाली रह जाती है। ऐसे में इस जमीन पर कम अवधि वाली वैकल्पिक फसलों की खेती से भूमि का बेहतर उपयोग होने के साथ किसानों को अतिरिक्त आय भी मिल सकती है। इसी संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सरसों की खेती को बढ़ावा देने की पहल की है।
विशेषज्ञों ने दी तकनीकी जानकारी कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र, सोनापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. किशोर झाड़े ने सरसों की खेती, फसल प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा मधुमक्खी पालन के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी कार्यालय के तकनीकी अधिकारी आनंद कांबले ने सरसों के मूल्य संवर्धन के लिए कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी।
इस अवसर पर आत्मा की प्रकल्प संचालक एवं जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी प्रीति हिरलकर ने कार्यक्रम की भूमिका स्पष्ट की। कार्यशाला में उपविभागीय कृषि अधिकारी, तहसील कृषि अधिकारी, मंडल कृषि अधिकारी, कृषि सहायक, कृषि सखियों और किसान उत्पादक कंपनियों के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।
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