रॉयल्टी का सत्यापन करने के बजाय कर दिया ठेकेदारों को 2.79 करोड़ रुपए का भुगतान

रॉयल्टी का सत्यापन करने के बजाय कर दिया ठेकेदारों को 2.79 करोड़ रुपए का भुगतान

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मप्र में ठेकेदारों को रॉयल्टी नियमों का पालन नहीं करने के बाद भी 2.79 करोड़ की राशि दे दी गई। कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चयनित 57 में से 31 कार्यों में ठेकेदारों ने लघु खनिजों का उपयोग कर निर्माण कार्य किया। इसके लिए नियम अनुसार मप्र लघु उद्योग निगम लिमिटेड (कंपनी) ने रायल्टी नहीं काटी। कंपनी ने न तो रॉयल्टी सरकारी खातों में जमा की और न ही अंतिम भुगतान करने से पहले ठेकेदारों से रॉयल्टी का नो ड्यूज सर्टिफिकेट लिया। फर्म से केवल रॉयल्टी भुगतान का एक शपथ-पत्र लिया गया। भुगतान की गई रायल्टी सत्यापन के बिना ही 2.79 करोड़ की भुगतान राशि जारी करना शासन के आदेशों का उल्लंघन है। अक्टूबर 2024 में शासन ने जवाब दिया कि पुरानी प्रथा के अनुसार विभाग ठेकेदारों से शपथ-पत्र ले रहे थे। जिसके बाद रॉयल्टी जारी की गई थी। हालांकि जून 2023 से विभागों ने स्वीकृति प्रमाण पत्र जमा करने की पर ठेकेदारों के बिलों से रॉयल्टी काटना शुरू कर दिया था। कंपनी द्वारा लघु खनिज नियमों और मप्र शासन के आदेशों के प्रावधानों का पालन न करने पर कोई उत्तर नहीं दिया गया। कैग ने कहा रॉयल्टी भुगतान के सत्यापन के बिना ही राशि अनियमित जारी हुई है।

इन जगहों में जारी हुई अनियमित रॉयल्टी

भोपाल, जबलपुर, छिंदवाड़ा, टीकमगढ़, शहडोल, उमरिया, ग्वालियर, हरदा, शिवपुरी, उज्जैन सहित अन्य जिलों में अनियमित रॉयल्टी जारी हुई। औद्योगिक क्षेत्र अधारताल जिला जबलपुर में सीमेंट कंक्रीट रोड, आरसीसी नाली, आरसीसी ह्यूम पाइप पुलिया निर्माण कार्य एवं बाह्य विद्युतीकरण कार्य में 8 लाख 26 हजार 666, औद्योगिक क्षेत्र रिछाई, जबलपुर, में आर.सी.सी. नाली निर्माण कार्य में 13 लाख 43 हजार 944, इमलीखेड़ा, जिला छिंदवाड़ा में निर्माण कार्य में 8 लाख 82 हजार 329, सेमी अर्बन टीकमगढ़ में 8 लाख 52 हजार 135, नरसरहा जिला शहडोल में निर्माण कार्य में 8 लाख 96 हजार 937, खरगापुर जिला टीकमगढ़ में निर्माण कार्य में 5 लाख 2 हजार 868, उमरिया में में 2 लाख 27 हजार 465, भोपाल के औद्योगिक क्षेत्र गोविंदपुरा में 23 लाख 5 हजार 710, संस्कृति भवन बाणगंगा में 14 हजार 941 सहित कुल 37 कार्यों में लगभग 2.7 करोड़ की रॉयल्टी अनियमित जारी हुई।

क्या है नियम?

लघु खनिज नियम, 1996 और मप्र शासन लोक निर्माण विभाग के फरवरी 2003 के आदेश अनुसार ठेकेदार को कार्य के लिए अंतिम बिल का भुगतान केवल खनिज विभाग के जारी रायल्टी का नो ड्यूज सर्टिफिकेट देने पर ही किया जाएगा। ऐसा नहीं करने पर रॉयल्टी काटकर संबंधित खनन मद में जमा कर दी जाएगी। खनिज संसाधन विभाग मप्र शासन समय-समय पर रायल्टी की दरें निर्धारित करता है। इसके अलावा जबलपुर उच्च न्यायालय ने एक रिट में फैसले पर आदेश दिया दिया था कि ठेकेदार द्वारा दायर शपथ-पत्र में खरीदे गए खनिजों का विवरण स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए। इसमें उस व्यक्ति का विवरण भी शामिल होना चाहिए जिससे खिनिज खरीदे गए थे। जबकि ठेकेदारों के दिए शपथ-पत्र में ऐसी कोई जानकारी नहीं थी। इसलिए रायल्टी भुगतान का पता नहीं लगाया जा सका।

Created On :   15 April 2026 10:47 PM IST

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