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Jabalpur News: पॉल्यूशन की अनदेखी अब भारी पड़ेगी 48 अस्पतालों पर गिर सकती है गाज
डिजिटल डेस्क,जबलपुर। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से उत्पादन सम्मति (CTO- कन्सेंट टू ऑपरेट) लिए बिना संचालित हो रहे जिले के 48 अस्पतालों पर कभी भी गाज गिर सकती है। दरअसल इन अस्पतालों के संचालन के लिए शुरुआत में स्थापना सम्मति (CTE- कन्सेंट टू एश्टेब्लिश) लेकर इन्हें शुरू कर दिया गया, लेकिन बाद में संचालकों द्वारा सीटीओ लेना जरूरी नहीं समझा गया और संस्थान का संचालन करते रहे।
हाई कोर्ट की सख्ती के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जागा और अब जिले के 48 अस्पतालों की सूची तैयार की गई है, जिनके पास सिर्फ सीटीई है और उन्होंने अब तक सीटीओ नहीं लिया है। इस सूची में 46 निजी अस्पताल हैं, जबकि 2 अस्पताल शासकीय क्षेत्र से हैं। पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों की सूची सामने आने के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इन अस्पतालों के विरुद्ध कार्यवाही करने जा रहा है, ताकि बिना बायोमेडिकल वेस्ट के समुचित डिस्पोजल और बोर्ड की अनुमति के एक भी अस्पताल संचालित न हो। आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण बोर्ड की टीमें इन अस्पतालों का निरीक्षण कर तालाबंदी की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
हाई कोर्ट की भी सख्ती
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की यह कार्यवाही उच्च न्यायालय, खंडपीठ इंदौर में लंबित जनहित याचिका के संदर्भ में की जा रही है। न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम 1974 और वायु अधिनियम 1981 के प्रावधानों के बिना किसी भी इकाई का संचालन गैर-कानूनी है। जानकार कहते हैं कि संचालन शुरू होने के 3 माह के अंदर सीटीओ लेना अनिवार्य है।
सीटीओ बिना चल रहे अस्पतालों की सूची तैयार कर उनका वेरिफिकेशन किया जाएगा, जिनके पास सीटीओ नहीं मिलेगा, उन्हें बंद किया जाएगा। जिला स्वास्थ्य विभाग को भी जांच कर कार्रवाई करने पत्र लिखा है।
केपी सोनी, क्षेत्रीय अधिकारी, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा सूची तैयार की गई है। ऐसे अस्पताल जो बिना सीटीओ के चल रहे हैं, उन्हें शीघ्र ही नोटिस दिया जाएगा।
डॉ. संजय मिश्रा, सीएमएचओ
Created On :   16 March 2026 6:19 PM IST












