9 सौ पेड़ झुलसे: शॉर्ट सर्किट की चिंगारी ने उजाड़ा अमरूद का बाग, चार साल की मेहनत पर फिरा पानी, किसान को लाखों का नुकसान

शॉर्ट सर्किट की चिंगारी ने उजाड़ा अमरूद का बाग, चार साल की मेहनत पर फिरा पानी, किसान को लाखों का नुकसान
  • सूखे के बीच अच्छी आमदनी की उम्मीद भी जली, ड्रिप सिंचाई के पाइप खाक
  • चार साल की मेहनत पर फिरा पानी, किसान को लाखों का नुकसान
  • अच्छी पैदावार की उम्मीद पर फिरा पानी

डिजिटल डेस्क, लातूर. जिले में खेतों और फसलों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। 2 दिन पहले जालकोट तहसील में आग लगने से एक किसान का 4 एकड़ गन्ना जलकर राख हो गया था। अब जालकोट शहर में बिजली के रोहित्र (ट्रांसफॉर्मर) में शॉर्ट सर्किट होने से एक किसान के अमरूद के बाग में आग लग गई। इस घटना में अमरूद के करीब 900 पेड़ झुलस गए, जबकि सिंचाई के लिए बिछाए गए ड्रिप पाइप भी जलकर नष्ट हो गए। किसान बापूराव रुकमाजी तीलमिलदार को इस घटना में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

अच्छी पैदावार की उम्मीद पर फिरा पानी

किसान बापूराव तीलमिलदार ने 4 साल पहले एक एकड़ जमीन में अमरूद के 900 पौधे लगाए थे। उन्होंने बच्चों की तरह इन पौधों की देखभाल की। बेहतर प्रबंधन और लगातार मेहनत के चलते इस साल पेड़ों पर अच्छी फलधारणा हुई थी। किसान को इस बार बाग से अच्छी आमदनी होने की उम्मीद थी। लेकिन अचानक लगी आग ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। देखते ही देखते आग ने पूरे बाग को अपनी चपेट में ले लिया। पेड़ों पर लगे फल और शाखाएं बुरी तरह झुलस गईं। सिंचाई के लिए बिछाए गए ड्रिप पाइप भी पूरी तरह जल गए। इससे फसल के साथ सिंचाई व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

रोहित्र में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका

प्राथमिक जानकारी के अनुसार, बाग के पास स्थित बिजली के रोहित्र में शॉर्ट सर्किट होने से आग लगने की आशंका है। माना जा रहा है कि रोहित्र से निकली चिंगारी सूखी घास पर गिरी, जिसके बाद आग तेजी से फैल गई। हालांकि, आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। घटना की जानकारी मिलने के बाद राजस्व प्रशासन ने नुकसान का पंचनामा किया है।

सूखे के बीच आर्थिक संकट बढ़ा

सूखे की स्थिति के बीच बाग में आग लगने से किसान की आर्थिक परेशानी और बढ़ गई है। 4 साल की मेहनत के बाद तैयार हुए बाग से अच्छी कमाई की उम्मीद लगाए बैठे किसान के लिए यह बड़ा झटका है। पेड़ों के झुलसने और सिंचाई व्यवस्था नष्ट होने से अब बाग को दोबारा तैयार करना भी चुनौती बन गया है। खेतों के आसपास स्थित बिजली के रोहित्रों और विद्युत उपकरणों की नियमित जांच, सूखी घास की सफाई तथा आग से बचाव के उपाय किए जाने जरूरी हैं, ताकि ऐसी घटनाओं से किसानों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

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