जिंदगी खत्म: 6 लाख 20 हजार के कर्ज ने छीन ली परिवार की खुशियां, इकलौते कमाने वाले ने दी जान

डिजिटल डेस्क, लातूर। कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी, आंखों में अपनों के बेहतर भविष्य के सपने और सिर पर 6.20 लाख रुपये के कर्ज का बोझ। आर्थिक तंगी और कथित कर्ज वसूली के दबाव के बीच 28 वर्षीय दत्ता सूर्यकांत कुंभार की जिंदगी खत्म हो गई। शिरूर अनंतपाल तहसील के अंकुलगा रानी गांव में सोमवार दोपहर हुई इस दुखद घटना ने एक हंसते-खेलते परिवार को गहरे अंधेरे में धकेल दिया। दत्ता परिवार का इकलौता कमाने वाला था। उसके जाने से पत्नी, मां और 2 बच्चों के सिर से सहारे का हाथ उठ गया है। जिस उम्र में उसे अपने बच्चों का भविष्य संवारना था, उसी उम्र में उसकी मौत से परिवार की खुशियां उजड़ गईं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दत्ता पर 3 से 4 निजी फाइनेंस कंपनियों का कुल 6.20 लाख रुपये का कर्ज था। बताया जा रहा है कि वह कर्ज को लेकर परेशान था। सोमवार दोपहर उसने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसके पास से एक चिट्ठी मिलने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, कर्ज वसूली के दबाव और घटना के बीच संबंधों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार देर रात दत्ता का अंतिम संस्कार किया गया। परिवार के लिए यह केवल एक सदस्य को खोने का दुख नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के बिछड़ने का सदमा है, जिस पर पूरे घर की उम्मीदें टिकी थीं।
'सरकार ने समय रहते कदम उठाए होते, तो शायद बच जाती जान'
दत्ता की मौत से दुखी लातूर के सांसद डॉ. शिवाजी बंडप्पा कालगे ने निजी माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की कर्ज वसूली प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सूखे और आर्थिक तंगी से पहले ही जूझ रहे आम नागरिकों पर कर्ज वसूली का अतिरिक्त दबाव गंभीर चिंता का विषय है। सरकार ने इस समस्या पर समय रहते ध्यान देकर आवश्यक कदम उठाए होते, तो संभवतः यह दुखद घटना टल सकती थी।
सांसद ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कर्ज वसूली के दौरान अवैध दबाव बनाने या मानसिक प्रताड़ना देने की बात सामने आती है, तो संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। दत्ता की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे लोगों को राहत देने और कर्ज वसूली की प्रक्रिया को मानवीय बनाने के लिए आखिर कब प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
जिस घर का सहारा था दत्ता, वहां अब भविष्य की चिंता
दत्ता के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी के सामने जीवन की नई चुनौतियां हैं, मां ने अपना सहारा खो दिया है और 2 बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। परिवार की आजीविका चलाने वाला व्यक्ति ही अब दुनिया में नहीं रहा। ऐसे में बच्चों की परवरिश, शिक्षा और परिवार के रोजमर्रा के खर्चों की जिम्मेदारी कौन उठाएगा, यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
सांसद डॉ. कालगे ने परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति को देखते हुए संबंधित वित्तीय संस्थाओं के साथ समन्वय कर बकाया कर्जमाफी पर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है। साथ ही परिवार को भविष्य में अनुचित कर्ज वसूली के दबाव से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि सूखे के कारण लातूर लोकसभा क्षेत्र के किसान, छोटे व्यापारी, विक्रेता और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार पहले से ही आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। ऐसे हालात में कर्ज वसूली की प्रक्रिया पर प्रभावी निगरानी जरूरी है, ताकि किसी भी कर्जदार को अवैध वसूली या मानसिक उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।
पहले ही सरकार को पत्र लिखकर किया था आगाह
सांसद डॉ. कालगे के अनुसार, उन्होंने माइक्रोफाइनेंस कंपनियों और निजी वित्तीय संस्थाओं की कर्ज वसूली के तौर-तरीकों को लेकर पहले भी राज्य सरकार को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया था। उन्होंने इस दिशा में तत्काल प्रतिबंधात्मक उपाय करने की मांग की थी।
सांसद ने खेद जताया कि यदि सरकार ने उनके पत्र पर समय रहते संज्ञान लेकर जरूरी कदम उठाए होते, तो संभवतः ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना को टाला जा सकता था। अब उन्होंने मुख्यमंत्री से दत्ता कुंभार की मौत की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को आर्थिक राहत देने की मांग की है।
दत्ता की मौत ने पीछे कई सवाल छोड़ दिए हैं। क्या आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों को समय पर मदद मिल पाएगी? क्या कर्ज वसूली की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर लगाम लगेगी? और क्या दत्ता के परिवार को इस मुश्किल घड़ी में सरकारी सहायता मिल सकेगी? इन सवालों के जवाब अब जांच और सरकार की कार्रवाई से ही मिल पाएंगे।
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