बड़ा आंदोलन: जंगल कटाई के विरोध में कांग्रेस काआंदोलन, भाजपा ने निकाली विपक्ष की महारैली की काट

जंगल कटाई के विरोध में कांग्रेस काआंदोलन, भाजपा ने निकाली विपक्ष की महारैली की काट
  • माइक्रोफाइनेंस कंपनियों पर लगाए गंभीर आरोप
  • 1 नवंबर को दिल्ली में आंदोलन
  • विपक्ष की महारैली की काट में, भाजपा की राष्ट्रव्यापी पदयात्रा

डिजिटल डेस्क, नागपुर/नई दिल्ली। कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने भीमाशंकर के जंगलों में टोरेंट कंपनी के बिजली प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तावित 600 एकड़ जंगल कटाई का विरोध किया। उन्होंने सवाल उठाया कि गुजरात की कंपनी के प्रोजेक्ट के लिए इतने बड़े पैमाने पर जंगल काटने की जरूरत क्या है? इसके बजाय बंजर जमीन का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता? उन्होंने कहा कि जंगल बचाने के लिए कांग्रेस आंदोलन करेगी। सोमवार को पत्रकारों से चर्चा में वडेट्टीवार ने कहा कि मुख्यमंत्री 90 हजार पेड़ लगाने का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन नए पौधे पुराने जंगल और उसकी जैव विविधता की भरपाई तुरंत नहीं कर सकते। भीमाशंकर क्षेत्र में शेकरू जैसे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास और कई नदियों के उद्गम स्थल हैं। जंगल कटाई से पर्यावरण संतुलन बिगड़ सकता है।

माइक्रोफाइनेंस कंपनियों पर लगाए गंभीर आरोप

नांदेड़ जिले के किसान चंद्रकांत शिंदे की मौत के मामले में वडेट्टीवार ने माइक्रोफाइनेंस कंपनी और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वसूली एजेंटों की प्रताड़ना से किसान की जान गई और पुलिस ने शुरुआत में मामला दबाने की कोशिश की। माइक्रोफाइनेंस कंपनियां किसानों को 12 से 14 प्रतिशत ब्याज पर कर्ज देकर वसूली के लिए दबाव बनाती हैं।

अधिवेशन के खर्च पर भी उठाए सवाल

नागपुर में शीतकालीन अधिवेशन की तैयारियों पर उन्होंने कहा कि दीवारों को रंगने, नए पर्दे लगाने और सजावट पर हर साल अनावश्यक खर्च किया जाता है, जबकि ठेकेदारों का भुगतान लंबित है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध व्यवस्थाओं में जरूरी साफ-सफाई कराकर अधिवेशन आयोजित किया जाए और किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता दी जाए।

1 नवंबर को दिल्ली में आंदोलन

वडेट्टीवार ने बताया कि कांग्रेस 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘देश बचाओ, वोट बचाओ’ अभियान के तहत आंदोलन करेगी। उन्होंने भाजपा पर मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों को दबाने का आरोप लगाया। वहीं, चामोर्शी और चिमूर में बाघों के हमलों पर चिंता जताते हुए उन्होंने वन विभाग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने, जरूरत के मुताबिक बाघों के सुरक्षित स्थानांतरण और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के उपाय करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं होने पर जनआंदोलन किया जाएगा।

विपक्ष की महारैली की काट में, भाजपा की राष्ट्रव्यापी पदयात्रा

सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सियासी ताकत दिखाने की होड़ लग गई है। कांग्रेस की अगुवाई में इंडिया गठबंधन एक नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी के रामलीला मैदान में एक विशाल रैली के जरिए अपनी ताकत का प्रदर्शन करने जा रहा है। बताया जा रहा कि विपक्षी खेमे की ओर से ‘वोट बचाओ,देश बचाओ’ महारैली की काट में भाजपा ने भी एक नवंबर से एक ‘राष्ट्रव्यापी पद यात्रा’ निकालने का फैसला किया है। भाजपा की यह पदयात्रा पूरे एक माह तक चलेगी। इस यात्रा में केंद्रीय मंत्रियों के साथ-साथ भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। दरअसल, कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन ने एसआईआर रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एक नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली का आयोजन किया है। विपक्ष के इस आयोजन की घोषणा के बाद से ही भाजपा कांग्रेस के ‘वोट बचाओ,देश बचाओ’ महारैली का रंग फीका करने की कवायद में है। पहले भाजपा ने महारैली की तारीख को सिख दंगों की शुरुआत की तारीख से जोड़ कर कांग्रेस पर पुरजोर हमला बोला। भाजपा ने आरोप लगाया कि 1984 को इसी दिन सिख विरोधी दंगो के दौरान भारी हिंसा हुई थी। इसी वजह से राहुल गांधी रामलीला मैदान में एक नवंबर को होने वाली महारैली की तारीख नहीं बदल रहे। इसके बाद भाजपा ने पदयात्रा निकालने का फैसला किया। सूत्रों के अनुसार, सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष के खिलाफ माहौल बनाने के लिए माह भर चलने वाले राष्ट्रव्यापी पदयात्रा का कार्यक्रम तय किया है। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव की आहट के बीच भाजपा इसी चुनावी राज्य से पदयात्रा की शुरुआत कर सकती है। बताया जा रहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 2 नवंबर के हैदराबाद और 5 नवंबर को हरियाणा में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए तमाम केंद्रीय मंत्री पदयात्रा में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा भाजपा संगठन के वरिष्ठ नेताओं को भी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में पदयात्रा को सफल बनाने की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

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