अनोखी पहल: आदिवासी बच्चों को मातृभाषा में पढ़ाने गांव-गांव पहुंची मुहिम, 17 से 20 अक्टूबर तक जनसंवाद यात्रा

आदिवासी बच्चों को मातृभाषा में पढ़ाने गांव-गांव पहुंची मुहिम, 17 से 20 अक्टूबर तक जनसंवाद यात्रा
  • पहली से चौथी तक अपनी भाषा में शिक्षा देने की मांग
  • ग्रामीणों की भागीदारी से बढ़ेगी मुहिम

डिजिटल डेस्क, नागपुर. बच्चे जिस भाषा में घर पर बात करते हैं, उसी भाषा में उन्हें पढ़ने का अवसर क्यों नहीं मिले? आदिवासी बच्चों को उनकी मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा दिलाने के लिए शुरू की गई मुहिम अब गांव-गांव पहुंच रही है। गड़चिरोली जिले में 17 से 20 अक्टूबर 2026 तक आयोजित जनसंवाद यात्रा के पहले चरण में ग्रामीणों से संवाद किया गया। इस दौरान मातृभाषा में शिक्षा की मांग को सकारात्मक प्रतिसाद मिला।

पहली से चौथी तक मातृभाषा में पढ़ाई की मांग

आदिवासी मातृभाषा शिक्षण अधिकार मुहिम के तहत प्रमुख मांग है कि जिला परिषद के विद्यालयों में आदिवासी मातृभाषाओं के माध्यम से पढ़ाई शुरू की जाए। पहली से चौथी कक्षा तक मातृभाषा में शिक्षा दी जाए, आदिवासी संस्कृति से जुड़े संदर्भों वाली पाठ्यपुस्तकें तैयार हों और मातृभाषा बोलने वाले शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।

ग्रामीणों की भागीदारी से बढ़ेगी मुहिम

यात्रा के दौरान सामने आया कि अनेक गांवों में माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चों को अपनी भाषा में शिक्षा मिले। हालांकि, यह भावना अब तक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक मांग का रूप नहीं ले सकी है। अब कई गांवों में ग्रामीण स्वयं इस मुहिम को आगे बढ़ाने लगे हैं.

शिक्षा के साथ संस्कृति बचाने का सवाल

इस मुहिम का संयोजन मातृभाषा शिक्षण हक्क समिति - लोकसंघ कर रही है। इसके संयोजक एड. बोधी रामटेके हैं। आगे और गांवों तक पहुंचने, शासन के समक्ष ठोस नीतिगत मांगें रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर न्यायालयीन लड़ाई लड़ने की योजना है। एड. बोधी रामटेके ने कहा कि, मातृभाषा में शिक्षा का सवाल केवल पढ़ाई की भाषा तक सीमित नहीं है। यह आदिवासी बच्चों की सांस्कृतिक पहचान, शिक्षा में समान अवसर और भाषाई न्याय से भी जुड़ा है।


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