लीज शर्तों का उल्लंघन: मुंबई के 16 जिमखानों पर सरकार का शिकंजा, बावनकुले ने लीज रद्द होने तक की दी चेतावनी

मुंबई के 16 जिमखानों पर सरकार का शिकंजा, बावनकुले ने लीज रद्द होने तक की दी चेतावनी
  • नियमों के विरुद्ध काम करने पर क्यों न करें आपका अग्रीमेंट रद्द, बावनकुले का आदेश
  • लीज शर्तों के उल्लंघन पर सरकार सख्त

Mumbai News. मुंबई की बेशकीमती सरकारी जमीन पर दशकों से संचालित 16 ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित जिमखाने अब महाराष्ट्र सरकार के रडार पर हैं। राज्य सरकार इन जिमखानों के लिए नई और सख्त लीज नीति तैयार कर रही है। नियमों और लीज की शर्तों का उल्लंघन करने वाले क्लबों (जिमखानों) के खिलाफ लीज या एग्रीमेंट रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है। मुंबई और उपनगर जिला कलेक्टर कार्यालय की ओर से इन 16 जिमखानों को नोटिस जारी कर उनसे उनकी गतिविधियों, लीज शर्तों के पालन और जमीन के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि सरकारी जमीन का इस्तेमाल केवल चुनिंदा सदस्यों के हितों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि लीज की मूल शर्तों और सार्वजनिक हित का भी पालन होना चाहिए।

लीज शर्तों के उल्लंघन पर सरकार सख्त

राजस्व विभाग के अधिकारियों के नेतृत्व में गठित समिति की जांच में जिमखानों की कार्यप्रणाली से जुड़े कई मुद्दे सामने आए हैं। जांच में मुख्य रूप से सरकारी जमीन के इस्तेमाल, व्यावसायिक गतिविधियों और खिलाड़ियों एवं निजी लोगों को सदस्यता देने जैसी शर्तों के पालन पर सवाल उठाए गए हैं। सरकार की मौजूदा नीति के अनुसार जिमखाना के खेल मैदानों का इस्तेमाल साल में अधिकतम 45 दिनों तक शादियों अथवा व्यावसायिक कार्यक्रमों के लिए किया जा सकता है। हालांकि, जांच में कुछ क्लबों द्वारा इस सीमा से अधिक व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने की बात सामने आई है। सरकार यह भी देख रही है कि जिन दिनों मैदानों का इस्तेमाल खेल के बजाय शादी या अन्य व्यावसायिक कार्यक्रमों के लिए किया गया, उसका पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं।

ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था पर भी सवाल

सरकार की जांच में एक अहम मुद्दा पारदर्शिता का भी सामने आया है। बताया गया है कि कई जिमखानों में मैदानों की बुकिंग और व्यावसायिक कार्यक्रमों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने के लिए कोई प्रभावी ऑनलाइन पोर्टल नहीं है। ऐसे में प्रशासन के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि मैदान कितने दिनों तक खेल गतिविधियों के लिए उपलब्ध रहे और कितने दिनों तक उनका इस्तेमाल शादी या दूसरे व्यावसायिक कार्यक्रमों के लिए किया गया। नई नीति में ऐसी गतिविधियों का रिकॉर्ड पारदर्शी रखने और जरूरत पड़ने पर प्रशासन को उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा सकता है।

मामूली किराए पर करोड़ों की जमीन का इस्तेमाल?

मुंबई के ये जिमखाने ऐतिहासिक महत्व रखते हैं। बॉम्बे जिमखाना, हिंदू जिमखाना, इस्लाम जिमखाना, पारसी जिमखाना और गोरेगांव स्पोर्ट्स क्लब जैसे क्लब लंबे समय से सरकारी जमीन पर संचालित होते आए हैं। सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुंबई जैसे शहर में करोड़ों रुपये की बाजार कीमत वाली जमीन बेहद कम लीज राशि पर लंबे समय से कुछ चुनिंदा संस्थाओं के पास है। दूसरी ओर कई प्रतिष्ठित क्लबों की सदस्यता हासिल करने के लिए भारी रकम खर्च करनी पड़ती है। इसी वजह से सरकार अब सरकारी जमीन के इस्तेमाल और उससे मिलने वाले राजस्व की समीक्षा करना चाहती है।

सरकार की प्रस्तावित नीति के प्रमुख बिंदु

• 16 प्रमुख जिमखानों की लीज और गतिविधियों की समीक्षा।

• लीज शर्तों के उल्लंघन पर कार्रवाई, जरूरत पड़ने पर एग्रीमेंट रद्द करने की संभावना।

• जिमखाना प्रबंधन बोर्ड में जिला कलेक्टर को पदेन सदस्य बनाने का प्रस्ताव।

• कलेक्टर की सिफारिशों को महत्वपूर्ण/बाध्यकारी बनाने की योजना।

• किराए को हर पांच वर्ष में बाजार दर के अनुसार अपडेट करने का प्रस्ताव।

• व्यावसायिक कार्यक्रमों और खेल गतिविधियों का पारदर्शी रिकॉर्ड।

Created On :   9 Sept 2026 9:34 PM IST

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