सियासत गरम: उदय सामंत बोले - राज्य सरकार ने अभी तक 3.16 लाख मराठों को दिया कुणबी प्रमाण पत्र, वाघमारे ने कहा - शिंदे पर हो रही बयान बाजी बर्दाश्त नहीं

उदय सामंत बोले - राज्य सरकार ने अभी तक 3.16 लाख मराठों को दिया कुणबी प्रमाण पत्र, वाघमारे ने कहा - शिंदे पर हो रही बयान बाजी बर्दाश्त नहीं
  • आलोचना करने के बजाय बातचीत के लिए आगे आएं- वाघमारे
  • एकनाथ शिंदे पर हो रही बयान बाजी बर्दाश्त नहीं करेंगे

डिजिटल डेस्क, मुंबई. कुणबी रिकॉर्ड वाले मराठों को ओबीसी प्रमाणपत्र देने की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील का आमरण अनशन 12वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन का अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। इसी बीच राज्य सरकार की ओर से मंत्री उदय सामंत ने कुणबी प्रमाणपत्र और जाति प्रमाणपत्रों से जुड़े आंकड़े सामने रखे हैं। संभाजीनगर में पत्रकारों से बातचीत में सामंत ने बताया कि शिंदे समिति के गठन के बाद मराठवाड़ा से कुणबी प्रमाणपत्र के लिए 3 लाख 17 हजार 559 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 3 लाख 16 हजार 977 लोगों को प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। केवल 548 आवेदनों को नियमों के तहत खारिज किया गया, जबकि 44 आवेदन अभी लंबित हैं। सामंत ने कहा कि खारिज किए गए आवेदनों के कारणों की जानकारी संबंधित अधिकारी देने के लिए तैयार हैं।

सावंत ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि 10 प्रतिशत एसईबीसी आरक्षण के तहत भी 2 लाख 95 हजार 305 प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। वहीं मराठवाड़ा में जाति प्रमाणपत्रों की जांच के लिए 21 हजार 51 आवेदन मिले, जिनमें से 16 हजार 110 प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। 2 हजार 314 मामले अभी लंबित हैं। इन मामलों को तत्काल निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। सामंत ने कहा कि जाति प्रमाणपत्र खारिज होने के प्रमुख कारणों में वंशावली सिद्ध न होना या उसमें विसंगति होना शामिल है। उन्होंने कहा कि मराठा समाज को उसका न्यायसंगत अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन ओबीसी आरक्षण को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। महायुति सरकार दोनों समुदायों के हितों का संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

आलोचना करने के बजाय बातचीत के लिए आगे आएं- वाघमारे

मराठा समाज की मांगों को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह संवेदनशील है और बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करने के लिए तैयार है। आंदोलन करना सभी का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन आंदोलन के नाम पर उपमुख्यमंत्री और शिवसेना (शिंदे) के मुख्य नेता एकनाथ शिंदे पर व्यक्तिगत टिप्पणी या आलोचना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह चेतावनी शिवसेना (शिंदे) सांसद डॉ. ज्योति वाघमारे ने मनोज जरांगे पाटील को दी। बालासाहेब भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में वाघमारे ने कहा कि एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री रहते हुए मराठा समाज को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला लिया। अपने ढाई साल के कार्यकाल में उन्होंने मराठा समाज के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए है। उन्होंने कहा कि मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले 36 लोगों के परिवारों को 10-10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई। शिंदे किसान परिवार में जन्मे हैं और मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे हैं। वे मराठा समाज से आते हैं। इसलिए मराठा समाज के प्रति उनके मन में हमेशा संवेदना रही है और समाज को न्याय दिलाने की उनकी भूमिका स्पष्ट है।

Created On :   9 Sept 2026 9:17 PM IST

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