अंतरराष्ट्रीय रैकेट: फर्जी फॉर्म के ज़रिए देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बड़ा डाका, सेल कंपनी और सीए बेनकाब

फर्जी फॉर्म के ज़रिए देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बड़ा डाका, सेल कंपनी और सीए बेनकाब
  • आयकर अधिकारी की शिकायत पर एमआरए मार्ग पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी
  • शेल कंपनी को जाली फॉर्म थमाकर विदेश भेजे गए 3.15 करोड़ रुपए
  • फर्जी फॉर्म के ज़रिए देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बड़ा डाका
  • बिना खातों की जांच जारी किए फर्जी फॉर्म 15 सीबी

Mumbai News. मुंबई में फर्जी दस्तावेजों के जरिए देश के विदेशी मुद्रा भंडार को नुकसान पहुंचाने और सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। आयकर विभाग की जांच में सामने आया है कि नियमों को दरकिनार कर केवल कागजों पर चल रही एक बोगस कंपनी को फर्जी प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिसके सहारे 3 करोड़ 15 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि अवैध रूप से विदेश भेज दी गई। इस पूरे खेल में एक नामचीन चार्टर्ड अकाउंटेंट और शेल कंपनी के संचालकों की सांठगांठ पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। आयकर विभाग के अधिकारी की शिकायत पर एमआरए मार्ग पुलिस ने 23 अगस्त को केस दर्ज कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

बिना खातों की जांच जारी किए फर्जी फॉर्म 15 सीबी

आयकर विभाग के सहायक निदेशक (जांच), यूनिट-3.2, बेलार्ड पियर कार्यालय में कार्यरत प्रतीक नंदकिशोर मंत्री द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, दहिसर पश्चिम निवासी सीए गणेश अरुण पाटणे ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान इथेरिएल लॉजिस्टेक प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के लिए नियमों का सरेआम उल्लंघन किया। आरोप है कि सीए ने कंपनी के खातों की बही, वित्तीय समझौतों या किसी भी आवश्यक कानूनी दस्तावेज का सत्यापन नहीं किया। इसके बावजूद केवल अवैध वित्तीय लाभ कमाने के मकसद से उसने फॉर्म 15 सीबी के 8 फर्जी प्रमाणपत्र जारी कर दिए। इन्हीं जाली कागजातों का इस्तेमाल कर 3.15 करोड़ की विदेशी मुद्रा विदेश भेज दी गई।

जमीन पर गायब मिली कंपनी, कागजों में चल रहा था खेल

आयकर विभाग की टीम ने जब 18 अगस्त 2026 को आयकर अधिनियम 2025 की धारा 247 के तहत सहार रोड, अंधेरी स्थित कंपनी के दिए गए पते पर जाकर भौतिक जांच की, तो वहां ऐसी किसी कंपनी का वजूद ही नहीं मिला। पड़ताल में यह भी सामने आया कि कंपनी ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न में बेहद कम आय दर्शाई थी, जबकि उसके खातों से करोड़ों रुपये का विदेशी लेनदेन किया जा रहा था। इससे साफ हो गया कि इथेरिएल लॉजिस्टेक केवल टैक्स चोरी और हवाला के लिए बनाई गई एक बोगस यानी शेल कंपनी थी।

आरबीआई के नियमों की अनदेखी से देश को आर्थिक नुकसान

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों और इनकम टैक्स रूल्स 1962 के नियम 37 बीबी के तहत विदेश धन भेजते समय सीए की यह वैधानिक जिम्मेदारी होती है कि वह लेनदेन की सत्यता और अनिवार्य टीडीएस कटौती की पड़ताल करे। आरोपी सीए और शेल कंपनी के निदेशकों ने आपस में सांठगांठ कर न केवल सरकार का कर चुकाने से परहेज किया, बल्कि देश की आर्थिक अखंडता और विदेशी मुद्रा भंडार को गहरा आघात पहुंचाया।

एमआरए मार्ग पुलिस स्टेशन में केस दर्ज, आरोपियों की तलाश तेज

आयकर विभाग के फोर्ट स्थित सिंधिया हाउस कार्यालय के कार्यक्षेत्र के तहत आने वाले एमआरए मार्ग पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है। पूछताछ के दौरान सीए पाटणे ने अपना गुनाह कबूल करते हुए अमोल पाटकर, सैमसन कार्लोस फर्नांडिस, श्रीनिवास राव, सुनील चंदा सिंह, प्रसाद सुभाष सावंत और संतोष जायसवाल के नामों का खुलासा किया है। आयकर अधिकारी की शिकायत मिलने के बाद एमआरए मार्ग पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज बनाने और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस वित्तीय अपराध सिंडिकेट से जुड़े फरार आरोपियों की तलाश में जगह-जगह दबिश दे रही है।

Created On :   24 Aug 2026 10:12 PM IST

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