ईडी की कार्रवाई: देशव्यापी डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी का भंडाफोड़, ईडी ने मुंबई से 2 आरोपियों को किया गिरफ्तार

देशव्यापी डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी का भंडाफोड़, ईडी ने मुंबई से 2 आरोपियों को किया गिरफ्तार
  • 27,850 करोड़ के संदिग्ध नेटवर्क का पर्दाफाश
  • 2904 करोड़ रुपए कैश में कराए गए जमा

Mumbai News. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देश भर में फैले एक बेहद जटिल और संगठित साइबर फ्रॉड व डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए ईडी ने मुंबई से दो मुख्य आरोपियों फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को गिरफ्तार किया है। ईडी के अनुसार, यह गिरोह 330 पीड़ित शिकायतों और 163 प्राथमिकी से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है, जिसमें आम नागरिकों को 417.49 करोड़ का सीधा चूना लगाया गया है।

एक प्राथमिकी से खुला अंतरराज्यीय नेटवर्क

इस घोटाले की नींव जून 2025 में उस वक्त पड़ी, जब उत्तर गोवा के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक महिला ने मामला दर्ज कराया। पीड़ित महिला को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर और फर्जी सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट्स में पैसे जमा करने के लिए विवश कर मई और जून के बीच 2.60 करोड़ ऐंठ लिए गए थे। जब ईडी ने इस मामले के वित्तीय लेन-देन की कड़ियां जोड़ीं, तो एक हैरान कर देने वाला तंत्र सामने आया। ठगी की रकम को महज कुछ ही घंटों के भीतर 400 से अधिक अलग-अलग खातों में बांटकर गायब कर दिया जाता था।

20 राज्यों में फैला जाल, 2,904 करोड़ का कैश डिपॉजिट

ईडी की गहन जांच में खुलासा हुआ कि इस सिंडिकेट से जुड़ी संस्थाओं ने देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 27,850 करोड़ से भी अधिक के बैंकिंग लेनदेन को अंजाम दिया है। इस पूरे नेटवर्क में 2,904 करोड़ से अधिक की राशि नकद जमा कराई गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें से 584.70 करोड़ का कैश देश के विभिन्न हिस्सों में लगी 61,448 बल्क नोट एक्सेप्टेंस मशीनों के जरिए बिना किसी मानवीय दखल के खातों में डाला गया था।

आरबीआई लाइसेंस प्राप्त मनी चेंजर्स से हवाला का खेल

एजेंसी के अनुसार, यह नेटवर्क साइबर फ्रॉड से मिले डिजिटल पैसों को पहले नकद में बदलता था। इसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई ) से लाइसेंस प्राप्त फुल फ्लेज्ड मनी चेंजर्स के जरिए इस रकम को विदेशी मुद्रा में बदलकर विदेश भेज दिया जाता था। इस अवैध धंधे के लिए चालकों, कर्मचारियों और स्लम में रहने वाले गरीब लोगों के नाम पर दर्जनों शैल कंपनियां खोली गई थीं। इन बेकसूर लोगों को कागजों पर निदेशक बनाया गया था, जबकि बैंक खातों का असली नियंत्रण मास्टरमाइंड्स के पास था।

छापेमारी में 3.25 करोड़ नकद जब्त

मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी ने मुंबई और गोवा में 20 से अधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस दौरान 3.25 करोड़ नकद, कई डिजिटल उपकरण, संदिग्ध वित्तीय दस्तावेज और वैधानिक रजिस्टर जब्त किए गए हैं। विशेष अदालत ने दोनों गिरफ्तार आरोपियों को आगे की जांच के लिए गोवा ले जाने हेतु ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया है। ईडी अब इस बात की जांच कर रही है कि इस फ्रॉड का मुख्य सरगना कौन है और विदेशों में पैसे भेजने के लिए किन अंतरराष्ट्रीय चैनलों का इस्तेमाल किया गया।

Created On :   24 Aug 2026 10:20 PM IST

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