Paritosh Tripathi News: हिंदी से आप कार, बंगला और सफलता सब हासिल कर सकते हैं- पारितोष त्रिपाठी

हिंदी से आप कार, बंगला और सफलता सब हासिल कर सकते हैं- पारितोष त्रिपाठी
टीवीएफ का नया शो ‘कवि सम्मेलन’ हिंदी कविता की परंपरा को डिजिटल मंच पर नए अंदाज में पेश कर रहा है। पारितोष त्रिपाठी शो की मेजबानी कर रहे हैं।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। टीवीएफ अपने देसीपन और जड़ों से जुड़े कंटेंट के लिए जाना जाता है। इसी कड़ी में अब उसका शो ‘कवि सम्मेलन’ यूट्यूब पर आ रहा है। अभिनेता, कवि और लेखक पारितोष त्रिपाठी इसके मेजबान हैं। शो में देशभर के कवि और जुड़ी हस्तियां अपनी कविताओं, हास्य, व्यंग्य और अनुभवों से मंच को जीवंत बना रहे हैं। कविता और कवि सम्मेलनों की पुरानी परंपरा को डिजिटल मंच पर नए अंदाज में पेश करने की यह कोशिश खास है। टीवीएफ ने अपने चिर-परिचित देसी अंदाज में इसे आम दर्शकों से जोड़ने की कोशिश की है। इसी शो और हिंदी भाषा की ताकत पर पारितोष त्रिपाठी ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में कहा, ‘हिंदी में बड़ी ताकत है।’ पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश...

युवाओं के लेखन का मंच

टीवीएफ ने देश के युवा लेखकों के लिए एक बढ़िया मंच तैयार किया है जो छोटे शहरों और कस्बों से आकर अपनी कलम की ताकत दिखा सकते हैं। वैसे भी यूट्यूब के बहुत कम शो पारिवारिक हैं इसलिए ‘कवि सम्मलेन’ परिवार के साथ बैठकर मजेदार समय बिताने का अच्छा अवसर है। मैं खुद युवा प्रतिभाओं की लेखनी से प्रभावित हूं। इसमें फिल्म कलाकार आकर भी अपनी प्रतिभा का मंचन कर रहे हैं। यह शो लोगों को बहुत पसंद आ रहा है।

11 साल की उम्र से कविता लिखने का शौक

मैंने 11 साल की उम्र से कविताएं लिखना शुरू कर दिया था। पहली कविता बहुत खराब थी, लेकिन धीरे-धीरे लिखना ठीक-ठाक आने लगा। 25 साल से कविताएं लिख हूं। किताबें लिखीं , एक और किताब पर काम कर रहा हूं। उसी प्रतिभा ने मुझे भी बाकी युवाओं की तरह मुंबई आकर अपनी पहचान बनाने का हौसला दिया। मेरा सपना था कि मायानगरी में कुछ करूं और अपनी जगह बनाऊं।

गॉडफादर नहीं था, इसलिए 8 साल किया संघर्ष

जब आपके परिवार में दूर-दूर तक कोई फिल्म लाइन में नहीं होता और कोई गॉडफादर नहीं होता, तो यहां संघर्ष बहुत कठिन हो जाता है। मैंने करीब आठ साल तक लेखनी और एक्टिंग के सहारे मुंबई में पैर जमाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। बीच-बीच में भुखमरी के दिन भी थे लेकिन शिकायत नहीं करुंगा क्योंकि किसी ने मुझ पर थोपा तो नहीं था। हम खुद ही इंडस्ट्री के इश्क में पड़ गए थे। जब मैं कानपुर लौटने की तैयारी कर रहा था, तभी टीवी पर ‘मामाजी’ वाली होस्टिंग का मौका मिला। वह शो सुपरहिट हो गया और यहीं से मेरी गाड़ी चल पड़ी। इसके बाद मैंने कई फिल्मों में काम किया और अब कुछ वेब सीरीज का हिस्सा हूं। अब ‘कवि सम्मेलन’ की मेजबानी की जिम्मेदारी मिली है, जो मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है।”

हिंदी से आप अमीर बन सकते हैं

लोगों को ऐसा क्यों लगता है कि आपको पैसा और पहचान सिर्फ अंग्रेजी से ही आ सकती है ? लोग अंग्रेजी से बेहद प्रभावित नजर आते हैं जबकि हिंदी से आप हर कामयाबी पैसा, आलिशान कार, बंगला सब हासिल कर सकते हैं। हिंदी की वजह से आज कई कवि दुनियाभर में हॉउसफुल शो कर रहे हैं, अपनी पहचान बना रहे हैं। लाखों, करोड़ों कमा रहे हैं। मैंने इंडस्ट्री में कभी हिंदी की वजह से छोटा महसूस नहीं किया बल्कि हिंदी आने और अच्छा लिखने की वजह से ही मुझे फिल्मों में मौका मिला कि मैं एक्टिंग के साथ लेखन में भी मदद कर दूंगा। मैं हमेशा अपनी हिंदी भाषा का आभारी रहूंगा। मेरी हिंदी की कविताएं सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं।

Created On :   24 Aug 2026 4:18 PM IST

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