हाई कोर्ट: नार्वेकर के इशारे पर नामांकन पत्र खारिज किए जाने के आरोप को लेकर 8 इच्छुक उम्मीदवारों ने दरवाजा खटखटाया

नार्वेकर के इशारे पर नामांकन पत्र खारिज किए जाने के आरोप को लेकर 8 इच्छुक उम्मीदवारों ने दरवाजा खटखटाया
  • अदालत ने मामले की तत्काल सुनवाई से किया इनकार
  • नामांकन पत्र खारिज किए जाने के आरोप को लेकर 8 इच्छुक उम्मीदवारों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

Mumbai News. भाजपा विधायक और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के इशारे पर नामांकन पत्र खारिज किए जाने के आरोप को लेकर 8 इच्छुक उम्मीदवारों ने मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने याचिका में दावा किया है कि मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव के लिए उनके नामांकन फॉर्म को निर्वाचन अधिकारी ने नार्वेकर के इशारे पर स्वीकार नहीं किया। बीएमसी का चुनाव 15 जनवरी को होगा।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ के समक्ष दायर 8 इच्छुक उम्मीदवारों की याचिकाओं में तत्काल सुनवाई की मांग की गई, लेकिन पीठ ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि उनकी याचिकाओं पर उचित समय पर सुनवाई की जाएगी। नार्वेकर के भाई मकरंद नार्वेकर, बहन गौरी शिवलकर और भाभी हर्षिता शिवलकर वार्ड 225, 226 और 227 से बीजेपी के टिकट पर बीएमसी चुनाव मैदान में हैं। विपक्षी दलों ने नार्वेकर पर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने, नामांकन प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और इस प्रक्रिया से जुड़े सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है। विधानसभा अध्यक्ष ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।

8 इच्छुक उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिका में अदालत से राज्य निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों को उनके नामांकन पत्र स्वीकार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि याचिकाकर्ताओं और कई अन्य स्वतंत्र उम्मीदवारों ने वार्ड संख्या 224 से 227 के लिए आवश्यक दस्तावेजों और सुरक्षा जमा राशि के साथ अपने फार्म जमा किए, लेकिन नार्वेकर द्वारा निर्वाचन अधिकारी पर उन्हें स्वीकार नहीं करने का दबाव डाला गया।

ये वार्ड दक्षिण मुंबई में नार्वेकर के कोलाबा विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। नार्वेकर ने विधानसभा अध्यक्ष के रूप में अपनी राजनीतिक शक्ति और पद का दुरुपयोग करते हुए निष्पक्ष चुनावों में हस्तक्षेप किया और पुलिस बल को निर्वाचन अधिकारी के परिसर से उम्मीदवारों (याचिकाकर्ताओं) को बाहर निकालने के लिए मजबूर किया। याचिका में दावा किया गया कि राज्य निर्वाचन आयोग से उम्मीदवारों की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया।

Created On :   6 Jan 2026 9:29 PM IST

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