आह्वान: डॉ. भागवत ने कहा - डेमोक्रेटिक डिविडेंड के सही उपयोग से भारत बनेगा विश्वगुरु, युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत

डॉ. भागवत ने कहा - डेमोक्रेटिक डिविडेंड के सही उपयोग से भारत बनेगा विश्वगुरु, युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत
  • युवा शक्ति को सही दिशा और अवसर देने का आह्वान
  • युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत
  • विरोध करें, लेकिन संविधान की मर्यादा का रखें ध्यान

Nagpur News. युवा शक्ति को सही दिशा और अवसर देने का आह्वान करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि डेमोक्रेटिक डिविडेंड यानी लोकतांत्रिक अधिकारों और अवसरों के सही उपयोग से भारत विश्वगुरु बन सकता है। उन्होंने कहा कि युवा आबादी केवल जनसंख्या का आंकड़ा नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी ताकत और अवसर है। शनिवार को कस्तूरचंद पार्क मैदान में 200 फीट ऊंचे राष्ट्रध्वज का ध्वजारोहण सरसंघचालक डॉ. भागवत ने किया। इस अवसर पर पूर्व सांसद विजय दर्डा, महापौर नीता ठाकरे सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

डॉ. भागवत ने कहा कि अनेक पीढ़ियों ने देश के लिए त्याग और बलिदान किया, जिसके कारण आज की पीढ़ी स्वतंत्रता का लाभ उठा रही है। अब आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ करने की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है। युवाओं में ऊर्जा, सपने और कुछ अलग करने की ललक होती है। दुनिया के संघर्षों का पर्याप्त अनुभव नहीं होने के कारण उनमें आशावाद भी अधिक होता है। इस ऊर्जा को सही दिशा देना और राष्ट्र निर्माण में उसका उपयोग करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी क्षमता पर विश्वास रखते हुए बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें साकार करने के लिए पूरी ताकत से जुट जाना चाहिए। भारत की युवा आबादी देश के लिए एक बड़ा अवसर है और इसका सदुपयोग देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।

विरोध करें, लेकिन संविधान की मर्यादा का रखें ध्यान

सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचार और विरोधी दृष्टिकोण होना स्वाभाविक है। सवाल मजबूती से उठाना, आंदोलन करना और विरोध दर्ज कराना लोकतंत्र का हिस्सा है। हालांकि, ऐसा करते समय संविधान और उसकी मर्यादाओं का ध्यान रखना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि अपने कानून, संविधान, प्राचीन संस्कृति, संस्कार और शील को नुकसान न पहुंचे, इसकी जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक को निभानी चाहिए। विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद मन में वैमनस्य नहीं होना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेदों के साथ आपसी सम्मान और सामाजिक समरसता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

Created On :   16 Aug 2026 7:59 PM IST

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