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Nagpur News: अब वेटरनरी अस्पतालों में पशुओं की होगी रोबोटिक सर्जरी

Nagpur News पशु चिकित्सा क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक को शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। वेटरनरी अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी शुरू करने की तैयारी चल रही है, ताकि जटिल शल्यक्रियाएं अधिक सटीकता, सुरक्षा और कम समय में की जा सकें। हालांकि अभी तक दूरबीन विधि से ही उपचार किया जा रहा है। महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय (माफसू) द्वारा मुंबई स्थित पशु चिकित्सा महाविद्यालय में रोबोटिक सर्जरी केंद्र स्थापित करने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के उपयोग से पशु चिकित्सा सेवाओं में एक नई दिशा मिलेगी।
550 शोध प्रस्तुत किए जाएंगे : भारतीय श्वान चिकित्सक संगठन के वार्षिक अधिवेशन और तीन दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद पशु चिकित्सा महाविद्यालय नागपुर में आयोजित किया गया है। ‘एकल स्वास्थ्य में श्वानों की भूमिका’ विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय परिसंवाद में देशभर से 150 से अधिक पशु चिकित्सक, शोधकर्ता और विद्यार्थी शामिल हुए हैं। कार्यक्रम में 550 से अधिक शोध प्रस्तुत किए जाएंगे। श्वानों के स्वास्थ्य सुधार, उनसे मनुष्यों में फैलने वाले रोग और वन हेल्थ की अवधारणा पर विशेष चर्चा की जाएगी। अधिवेशन के दौरान शुक्रवार को मुंबई पशु चिकित्सा महाविद्यालय के सहयोगी प्राफेसर डॉ. शाहीर गायकवाड़ और डॉ. संतोषमणि त्रिपाठी ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में यह जानकारी दी।
श्वानों और बिल्लियों पर सफल सर्जरी : डॉ. गायकवाड़ मुंबई स्थित पशु चिकित्सा महाविद्यालय में छाती संबंधी रोगों से पीड़ित श्वानों और बिल्लियों की ओपन सर्जरी तथा दूरबीन पद्धति से बिना टांके की सर्जरी करने के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने बताया कि यह केंद्र वर्ष 2015 में शुरू किया गया था। यहां अब तक करीब 70 श्वानों और बिल्लियों की ओपन व दूरबीन पद्धति से सफल सर्जरी की जा चुकी है। हाल ही में 500 ग्राम वजन के बिल्ली के बच्चे की भी सफल शल्यक्रिया की गई।
भारत में एकमात्र सुविधा : मुंबई पशु चिकित्सा महाविद्यालय में डॉ. संतोषमणि त्रिपाठी श्वान, बिल्ली, खरगोश और पक्षियों के पेट संबंधी रोगों की दूरबीन पद्धति से सर्जरी करते हैं। उन्होंने पिछले 20 वर्षों में 1500 से 2000 पशुओं की सफल शल्यक्रिया की है। डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि छाती और पेट के रोगों की दूरबीन पद्धति से सर्जरी की यह सुविधा पूरे भारत में एकमात्र है। यहां विभिन्न राज्यों से पशु चिकित्सक प्रशिक्षण लेने आते हैं।
मात्र 5 हजार में उपचार : डॉ. गायकवाड़ और डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि वर्तमान में जन्मजात मामलों में बिल्लियों में छाती और पेट के बीच का पर्दा फटा होने के कई प्रकरण सामने आ रहे हैं। इसके अलावा लगभग 5 से 10 प्रतिशत श्वान और बिल्लियां छाती व पेट संबंधी रोगों से ग्रस्त होती हैं। उनके केंद्र में ऐसी सर्जरी मात्र 5 हजार रुपए में की जा रही है, जबकि निजी अस्पतालों में इसी उपचार का खर्च लगभग 60 हजार से डेढ़ लाख रुपए तक होता है।
Created On :   14 Feb 2026 4:28 PM IST













