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Nagpur News: बाघों की मौत के आंकड़ों में अंतर पर हाईकोर्ट सख्त, एनटीसीए से मांगा लिखित जवाब

Nagpur News बाघों की मौत के आंकड़ों में राज्य और केंद्र सरकार के बीच दिखाई दे रहे अंतर को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से जवाब मांगा है। एनटीसीए की ओर से कोर्ट को मौखिक रूप से बताया गया कि बाघों की मौत की प्रत्येक घटना का सत्यापन किया जाता है। इस प्रक्रिया में समय लगने के कारण उसकी वेबसाइट पर आंकड़े तुरंत अपडेट नहीं हो पाते। कोर्ट ने इस स्पष्टीकरण को लिखित रूप में पेश करने के लिए एनटीसीए को दो सप्ताह का समय दिया है।
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16 मौतों का आंकड़ा राज्य के रिकॉर्ड में नहीं
बाघों की मौत की घटनाओं का स्वत: संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने जनहित याचिका दर्ज की है। न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई में न्यायालयीन मित्र ने राज्य वन विभाग और एनटीसीए के आंकड़ों में अंतर का मुद्दा उठाया था।
बताया गया कि 2021 से 2025 के बीच एनटीसीए की केंद्रीय सूचना प्रणाली में दर्ज 16 बाघों की मौत राज्य के आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं है। सुनवाई के दौरान एनटीसीए की ओर से डेप्युटी सॉलिसिटर जनरल एड. कार्तिक शुकुल ने सत्यापन प्रक्रिया के कारण आंकड़े अपडेट होने में देरी की जानकारी दी। कोर्ट ने अब इसका लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। मामले में न्यायालयीन मित्र के रूप में एड. चैतन्य ध्रुव पैरवी कर रहे हैं।
करंट से 33 बाघों की मौत
बाघों की मौत में बिजली का करंट भी गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। अब तक 33 बाघों की मौत करंट लगने से होने की जानकारी सामने आई है। इसे रोकने के लिए महावितरण ने एबी केबल लगाने के लिए करीब 82.44 करोड़ रुपए के 127 प्रस्ताव तैयार किए हैं। हालांकि, किसी भी प्रस्ताव को पूरी राशि नहीं मिली है। इस मुद्दे पर महावितरण की ओर से अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है। हाईकोर्ट ने उसे जवाब दाखिल करने का एक और अवसर दिया है।
Created On :   28 Aug 2026 3:45 PM IST














