Nagpur News: नागपुर आरएसएस का नहीं, लोकतंत्र और संविधान का गढ़ होगा

नागपुर आरएसएस का नहीं, लोकतंत्र और संविधान का गढ़ होगा
  • आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा बोलीं- आने वाले वर्षों में नागपुरवासी इसे साबित करें
  • शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ ‘रेजिस्टेंस-सब याद रखा जाएगा!’ कार्यक्रम में आदिवासी छात्रों के आंदोलन को समर्थन
  • कहा- छात्रों के पक्ष में खड़ा होना एंटी-भाजपा राजनीति नहीं, जनता की आवाज उठाना है

Nagpur News नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का गढ़ नहीं है। अगर नागपुर किसी चीज का गढ़ है, तो वह लोकतंत्र और संविधान का गढ़ होगा। यह जुल्म के खिलाफ न्याय की आवाज और आजादी के आंदोलन के सबसे खूबसूरत मूल्यों का गढ़ होगा। आने वाले वर्षों में नागपुरवासी इसे साबित करें, ऐसी उम्मीद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने जताई। वह विदर्भ छात्र संयुक्त समिति की ओर से गुरुवार को डॉ. वसंतराव देशपांडे सभागृह में शिक्षा व्यवस्था की गिरती स्थिति के खिलाफ आयोजित ‘रेजिस्टेंस-सब याद रखा जाएगा!’ कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रही थीं।

सत्ता में नहीं देखना चाहते : नेहा ने कहा कि जिस विदर्भ में विकास के वादे के साथ भाजपा सत्ता में आती है, उसी विदर्भ में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। आदिवासी छात्र पिछले 14 दिनों से बारिश में खुले आसमान के नीचे आंदोलन करने को मजबूर हैं। आदिवासी छात्राएं छुट्टियों के बाद छात्रावास लौटती हैं, तो उनका अनिवार्य गर्भावस्था परीक्षण कराया जाता है।

छात्रावासों को जानबूझकर शहर से दूर रखा जाता है, ताकि वहां छात्रों के साथ होने वाले व्यवहार पर किसी की नजर न पड़े। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में भाजपा ने कल्पना भी नहीं की होगी कि वह युवाओं के बीच इतनी अलोकप्रिय हो जाएगी। इस अलोकप्रियता के लिए हमें जिम्मेदार ठहराया जाता है। भाजपा यह बात बिल्कुल सही समझती है कि देश के छात्र और युवा उसे सत्ता में नहीं देखना चाहते।

अंत की शुरुआत मानें : नेहा बोरा ने कहा कि जंतर-मंतर पर आंदोलन के दौरान जिस दिन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बात आई, उस दिन हमसे पूछा गया था कि आप क्या चाहेंगे? छात्रों के इस आंदोलन की जीत को इतिहास में कैसे याद किया जाए? हमने कहा कि जंतर-मंतर के छात्रों के आंदोलन की जीत को भाजपा और आरएसएस के देश पर कब्जे के अंत की शुरुआत के रूप में याद किया जाए।

आंदोलन को दिया समर्थन : उन्होंने शहर में पिछले 14 दिनों से चल रहे आदिवासी छात्रों के आंदोलन को समर्थन जताया। छात्रों के आंदोलन के दौरान नागपुर से जंतर-मंतर गए और पुलिस की लाठियां झेलने वाले भरत बानायत, माहिमा और तेजस ने भी कार्यक्रम में अपने विचार रखे। इसके अलावा आदिवासी छात्र-छात्राओं ने मंच से अपनी मांगें रखीं। रांची में नेहा बोरा पर स्याही फेंके जाने के विरोध में नागपुर के कार्यक्रम में छात्रों से लेकर नागरिकों तक ने गाल और शर्ट पर स्याही के स्टीकर लगाए।

‘प्रो-स्टूडेंट’ का मतलब एंटी-भाजपा नहीं : राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बारे में पूछे जाने पर नेहा बोरा ने कहा कि विपक्ष का काम जनता की आवाज उठाना है। जो भी राजनीतिक दल जनता के साथ खड़े हैं, उनके प्रति सम्मान है। जिस दिन वे जनता की आवाज का प्रतिनिधित्व करना बंद कर देंगे, उस दिन उनके प्रति सम्मान भी खत्म हो जाएगा। छात्रों के पक्ष में राजनीति करने का मतलब एंटी-भाजपा राजनीति करना नहीं है। कर्नाटक और केरल जैसे कांग्रेस शासित राज्यों में भी छात्रों ने आंदोलन किए और उनके खिलाफ मामले दर्ज हुए। यह स्वीकार्य नहीं है। जो राजनीतिक दल छात्रों के मुद्दों के प्रति संवेदनशील हैं और उनकी आवाज उठाना चाहते हैं, उन्हें यह सिलसिला जारी रखना चाहिए।


Created On :   28 Aug 2026 4:22 PM IST

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