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Nagpur News: पांच वर्षों में रोके 45 बाल विवाह , 14 मामलों में अपराध दर्ज

Nagpur News बाल विवाह सिर्फ एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि बचपन की हत्या है। यह वह अपराध है जो मासूम सपनों को समय से पहले जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा देता है। कानून सख्त है, फिर भी यह कुप्रथा आज भी समाज के अंधेरे कोनों में ज़िंदा है। नागपुर जिला भी इससे पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं। पिछले पांच वर्षों में नागपुर जिले में 45 बाल विवाह समय रहते रोके गए, लेकिन इनमें से सिर्फ 14 मामलों में ही अपराध दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई। यह संख्या भले ही कागजों में छोटी लगे, लेकिन हर मामला एक बच्चे के भविष्य, उसके सपनों और अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
ग्रामीण इलाकों में ज्यादा खतरा : नागपुर की कामठी, काटोल, सावनेर, उमरेड और नरखेड़ जैसी तहसीलों में बाल विवाह के सबसे अधिक प्रयास सामने आए हैं। यहां सामाजिक दबाव, पुरानी परंपराएं और आर्थिक तंगी आज भी मासूम बच्चों को बाल विवाह की आग में झोंकने की वजह बन रही है। वहीं नागपुर शहर में भी कुछ प्रकरण सामने आना चिंता को और गहरा करता है।
सतर्कता बनी बचाव की ढाल महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस प्रशासन और सामाजिक संगठनों की सतर्कता ने कई बच्चों को अंधे भविष्य से बचाया है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, गोपनीय सूचनाएं, जागरूक नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सजगता से समय रहते पुलिस तक जानकारी पहुंची और विवाह रुकवाए गए। बच्चों को सुरक्षित संरक्षण दिया गया।
कानून स्पष्ट, अपराध अक्षम्य : बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम 2006 के तहत विवाह की न्यूनतम आयु निर्धारित है। इससे कम उम्र में विवाह कराना अपराध है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। यदि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले, तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
Created On :   5 Feb 2026 2:59 PM IST















