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जानिए: ट्रोलिंग, साइबर बुलिंग, इन्फ्लुएंसर कल्चर और डिजिटल प्राइवेसी जैसे मुद्दों पर क्या सोचते हैं मास कम्युनिकेशन के Gen Z स्टूडेंट्स

डिजिटल डेस्क, नागपुर। इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के दौर में पैदा हुई और पली-बढ़ी पहली पीढ़ी है जेन जी, जो माइक्रोफोन के सामने पहुंची, तो चर्चा केवल लाइक, कमेंट और फॉलोअर्स तक सीमित नहीं रही। विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया के फायदे के साथ-साथ ट्रोलिंग, साइबर बुलिंग, इन्फ्लुएंसर कल्चर और डिजिटल प्राइवेसी जैसे मुद्दों पर भी खुलकर अपनी बात रखी।
मौका था, जब मास कम्युनिकेशन विभाग के विद्यार्थियों ने आकाशवाणी का दौरा किया। वहां उन्होंने ‘सोशल मीडिया इन द आइज ऑफ Gen Z’ विषय पर रिकॉर्डिंग में हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने बताया कि आज की युवा पीढ़ी बनावटी और बहुत ज्यादा सजाए गए कंटेंट की बजाय वास्तविक और भरोसेमंद सामग्री को अधिक पसंद करती है।
विद्यार्थियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर डाली गई कोई भी जानकारी सुरक्षित नहीं रहती। इसलिए अपनी निजी जानकारी साझा करते समय सावधानी जरूरी है। सोशल मीडिया पर खबर और जानकारी तेजी से फैलती है, लेकिन हर जानकारी सही नहीं होती। ऐसे में किसी भी पोस्ट को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है।
विभागाध्यक्ष डॉ. धर्मेश धावनकर के मार्गदर्शन में हुए इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया के प्रभाव पर अपने विचार रखे। डॉ. धावनकर भी चर्चा में शामिल हुए। डॉ. धावनकर ने कहा कि सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने का अधिकार मिलने के साथ उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ती है। उन्होंने FOMO (कुछ छूट जाने का डर) की जगह JOMO (कुछ चीजों से दूर रहने की खुशी) को अपनाने की जरूरत बताई। उन्होंने बिना जांचे किसी पोस्ट को आगे भेजने और नफरत फैलाने वाली सामग्री से बचने की अपील भी की।
कार्यक्रम प्रमुख डॉ. विजय सिंह राजपूत ने विद्यार्थियों से संवाद किया, जबकि रिकॉर्डिंग अश्विनी खवसे ने संचालित की।
कृतिका मिश्रा, अक्शा बागसरावाला, तनुजा मडावी, आफरीन नाज, अमृता नागपुरे और मानसी तुमडाम ने डिजिटल डिटॉक्स, ट्रोलिंग, साइबर बुलिंग, इन्फ्लुएंसर कल्चर और सोशल मीडिया मार्केटिंग जैसे विषयों पर बात की। विद्यार्थियों ने यह सवाल भी उठाया कि सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली जिंदगी वास्तव में कितनी सच्ची होती है।
कक्षा से निकलकर देखा रेडियो का काम
रिकॉर्डिंग के बाद विद्यार्थियों ने आकाशवाणी के विभिन्न विभागों का दौरा किया। कार्यक्रम कार्यकारी अतुल साखरकर ने रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया और कंसोल संचालन की जानकारी दी। कार्यक्रम कार्यकारी आशीष सातपुते ने विद्यार्थियों को टेप लाइब्रेरी, प्रोडक्शन कंट्रोल रूम, ड्यूटी रूम, प्लेबैक स्टूडियो, म्यूजिक स्टूडियो और थिएटर स्टूडियो के बारे में बताया। कैजुअल अनाउंसर राधा मंजरेकर भी विद्यार्थियों के साथ रहीं।
टेप लाइब्रेरी में पुराने कैसेट, सीडी और डीवीडी देखकर विद्यार्थियों को रेडियो के पुराने दौर की तकनीक को समझने का मौका मिला। वहीं आधुनिक रिकॉर्डिंग स्टूडियो और कंसोल देखकर उन्होंने रेडियो कार्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया को करीब से जाना।
इस दौरे में विद्यार्थियों ने एक ही दिन में सोशल मीडिया की तेज डिजिटल दुनिया और रेडियो की व्यवस्थित प्रसारण व्यवस्था को करीब से देखा। उनके लिए यह केवल शैक्षणिक दौरा नहीं, बल्कि मीडिया के कामकाज को व्यवहारिक रूप से समझने का अनुभव रहा।
Created On :   15 Sept 2026 8:16 PM IST
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