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हाईकोर्ट में चल रही है नए जजों की नियुक्ति प्रक्रिया, फिलहाल नहीं कर सकते हस्तक्षेेप

हाईकोर्ट में चल रही है नए जजों की नियुक्ति प्रक्रिया, फिलहाल नहीं कर सकते हस्तक्षेेप

जजों की नियुक्ति के लिए दायर जनहित याचिका का निराकरण
डिजिटल डेस्क जबलपुर
। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की डिवीजन बैंच ने एक अहम आदेश में कहा है कि मप्र हाईकोर्ट में नए जजों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। प्रशासनिक स्तर पर नियुक्ति को लेकर विचार-विमर्श किया जा रहा है। फिलहाल इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीजन बैंच ने यह आदेश मप्र हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए दायर जनहित याचिका का निराकरण करते हुए सुनाया है। 
जबलपुर निवासी डॉ. एमए खान और अमरजीत पनवार की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि मप्र हाईकोर्ट में जजों के स्वीकृत पद 53 हैं, लेकिन वर्तमान में 28 जज ही कार्यरत हैं। हाईकोर्ट में जजों के पद रिक्त होने से लंबित प्रकरणों का निराकरण नहीं हो पा रहा है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2021 में 8 जज सेवानिवृत्त हो जाएँगे। ऐसे में हाईकोर्ट में जजों की संख्या घटकर 20 रह जाएगी। अधिवक्ता अजय रायजादा, अंजना श्रीवास्तव और अभिमन्यु सिंह ने कहा कि याचिका में सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांतों का हवाला देते हुए कहा गया कि जजों की नियुक्ति प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, ताकि किसी जज के सेवानिवृत्त होने के पूर्व नया जज पदभार ग्रहण कर ले। इससे न्यायिक व्यवस्था में संतुलन बना रहता है। 
7 वकील और न्यायिक सेवा से 6 नाम भेजे गए
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि 1 जून 2020 को हाईकोर्ट जज के लिए 13 नाम भेजे गए हैं। वकीलों में महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव, पूर्व महाधिवक्ता शशांक शेखर, डॉ. विवेक शरन, राघवेन्द्र दीक्षित, मनोज कुमार द्विवेदी,  प्रणय वर्मा और निधि पाटनकर के नाम शामिल  हैं। इसके साथ ही उच्च न्यायिक सेवा से 6 नाम भेजे गए हैं। फिलहाल नए जजों की नियुक्ति की  प्रक्रिया चल रही है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद डिवीजन बैंच ने याचिका का निराकरण कर दिया है।
जस्टिस सुजय पॉल और सुबोध अभ्यंकर की इंदौर पदस्थापना,

जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और वीरेंदर सिंह इंदौर से जबलपुर आएँगे 
हाईकोर्ट जबलपुर में पदस्थ जस्टिस सुजय पॉल और जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की इंदौर खंडपीठ में पदस्थापना की गई है। इसके साथ ही इंदौर खंडपीठ में पदस्थ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस वीरेंदर सिंह का मुख्यपीठ जबलपुर में पदस्थापना की गई है। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश के अनुसार सुबोध अभ्यंकर 28 फरवरी तक इंदौर खंडपीठ में रहेंगे। यह व्यवस्था 11 जनवरी से प्रभावशील होगी। 
 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।