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पानी सड़क, बिजली तो देखी ही नही, योजनाओं के लाभ से वंचित बैगाजन 

पानी सड़क, बिजली तो देखी ही नही, योजनाओं के लाभ से वंचित बैगाजन 

डिजिटल डेस्क, बालाघाट। बैगा आदिवासियों के विकास के लिए अरबों रूपए की योजनाएं बनी, लेकिन इन योजनाओं का सही मायने में धरातल पर क्रियान्यन नही हो पाया है, यही वजह है कि बालाघाट जिले के बीहड़ जंगलों वाले दुर्गम स्थानों पर रहने वाले बैगाजन आज भी विकास की मुख्यधारा में शामिल ना होकर बेफिक्र जिन्दगी गुजार रहें है। जंगलों के पगडडी रास्ते न तो सड़क बन पाई है,और ना पेयजल के कोई साधन उपलब्ध है, पहाड़ से गिरने वाले झिरिया के पानी से ही उन्हें प्यास बुझानी पड़ती है। बिजली की चकाचौंध तो उन्होने देखी तक नही है। घास-फूंस की झोपड़ी में रहकर फाका मस्त जिन्दगी गुजार रहे इन बैगाओ  के उत्थान के लिए आने वाली राशि उनके हाथों तक पहुंच ही नही पाती है।

गुजार रहे नारकीय जीवन 

जानकरी के अनुसार म.प्र और छत्तीसगढ़ सीमा से लगे बालाघाट जिले के   बैहर तहसील के जनपद पंचायत बिरसा अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत  देवगांव के अधीन ग्राम बेलटोला के हालात बेहद बद्तर है यहां ना तो ग्रामीणजनो को दो वक्त पानी मिलता है और ना ही स्वास्थ्य सेवाओ को लेकर किसी प्रकार के कोई साधन उपलब्ध है। 

योजनाओं का क्रियान्वयन नही

यहां पर रहने वाले बैगा, आदिवासियों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में कोई भी जानकारी नहीं है इतना ही नहीं यह गांव विकास से कोषो दूर है।  कुछ वर्ष पहले गोबरगैस योजना के अन्तर्गत गांव में गोबर से गैस और बिजली बनाने के लिये प्लांट गये थे, लेकिन यह प्लांट अधूरे में ही पड़े हुये है।

65 घरो की बस्ती 

जानकारी के अनुसार बैहर तहसील से लगभग 32 किमी. दूर देवगांव पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम बेलटोला में 65 घरो की बस्ती है जहां पर लगभग 290 परिवार पुनर्वास कर रहे है। जंगल के रास्ते जरूरत पडऩे पर 15 किमी का जंगली रास्ता तय कर ग्राम मण्डई पहुंचते है और अपनी आजीविका को लेकर जरूरी चीजे ले जाते है। गांव के आदिवासी सुद्दूसिंह मेरावी, गणेश सिंह, सुखीराम गोंड, रामबाई ने बताया गांव में यदि किसी का स्वास्थ्य खराब हो जाये तो गांव वाले उसे खटिया या कुर्सी में बैठालकर जंगल के रास्ते ग्राम मण्डई ले जाते है और वहां से 15 किमी दूर किसी भी साधन से बिरसा हास्पिटल पहुंचकर इलाज कराते है। 

सूचना देकर बुलाते है मंडई

ग्रामीणों का कहना रहा इस गांव में आज तक कोई सरकारी अमला नही पहुंचा है। किसी भी प्रकार की जानकारी देने के लिए सूचना देकर उन्हें 15 किमी दूर ग्राम मंडई बुलाया जाता है। गांव में व्याप्त अव्यवस्था के चलते कोई भी सरकारी मुलाजिम नही पहुंच पाता है। 

इनका कहना है

यह मेरी जानकारी में नही है, जानकारी लेकर सभी सुविधाएं ग्रामीणजनो को शीघ्र मुहैया कराने हेतु कार्यवाही की जाएगी। दीपक आर्य कलेक्टर
 

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