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दैनिक भास्कर हिंदी: बालाघाट: एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत चिन्‍नौर चावल बनेगा बालाघाट जिले की पहचान

January 21st, 2021

डिजिटल डेस्क, बालाघाट। बालाघाट मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रदेश के विकास के लिए तैयार किये गये रोडमेप में एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत कलेक्‍टोरेट सभाकक्ष में जिला कलेक्‍टर श्री दीपक आर्य की अध्‍यक्षता में बैठक सम्‍पन्‍न हुई । श्री आर्य ने बालाघाट जिले में चिन्नौर चावल के उत्‍पादन को तीनगुना करने के संबंध में चर्चा की। उन्‍होंने कहा कि चिन्‍नौर चावल का जी.आई. कराकर इसे बालाघाट जिले की पहचान बनाना है। उन्‍होंने कहा कि वर्तमान में चिन्‍नौर धान का उत्‍पादन 5000 एकड़ में किया जाता है, इसे 15000 एकड़ में उत्‍पादित किया जायेगा। उन्‍होंने जिले में चिन्नौर चावल उत्‍पादन करने वाले एपीओज को चावल बेचने वाली कम्‍पनियों इंडिया गेट, इंडिया मार्ट, दावत, एबीवाई आदि को, जिले में आमंत्रित करने कहा ताकि चिन्‍नौर चावल को मार्केट मिलने के साथ-साथ उत्‍पादकों को बाजिब कीमत मिल सके।

बैठक में वेद प्रकाश पटले, बालाघाट बीज उत्‍पादक सहकारी समिति के अध्‍यक्ष ने बताया कि वर्तमान में जो चिन्‍नौर धान की फसल है वह फसल ज्‍यादा ऊॅची होती है, जिसके पकने के पहले ही खेतों में गि जाती है, इसके कारण पैदावार कम होती है, जिससे किसान चिन्‍नौर के उत्‍पादन में रूचि नहीं लेते। चिन्‍नौर को प्रापर मार्केटिंग की सुविधा नहीं होने के कारण बेचने में परेशानी होती है। कृषि विभाग कम ऊँचाई वाली चिन्‍नौर फसल के बीज तथा तथा नई तकनीक किसानों को मिल जाये जिससे पैदावार 6 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ हो जाये तो बहुत अच्‍छा होगा। कलेक्टर श्री आर्य ने बैठक में कहा कि किसान अपनी खाली एवं अनुपयोगी जमीन पर बांस की खेती करें तो उन्हें मनरेगा एवं बांस मिशन से अनुदान उपलब्ध कराया जायेगा। जिले में बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए कन्‍वर्सन प्रोजेक्‍टर बनाने के निर्देश दिये। उन्‍होंने कहा कि बांस की खेती से पहले चार साल तक कोई उत्पादन नहीं मिलेगा लेकिन उसके बाद हर वर्ष अन्य परंपरागत फसलों की तुलना में अधिक आय मिलने लगेगी। जिले में अगरबत्ती निर्माण के लिए बांस काड़ी के व्यवसाय को प्रोत्साहित किया जायेगा। इसके साथ ही बांस के फर्नीचर को भी प्रोत्साहित किया जायेगा।