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पोल्यूशन में चंद्रपुर आगे, 201 कारखाने रेड जोन में

पोल्यूशन में चंद्रपुर आगे, 201 कारखाने रेड जोन में

डिजिटल डेस्क, चंद्रपुर। हाल ही में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने वर्ष 2018-19 वर्ष की प्रदूषण रिपोर्ट में राज्य के 25 शहरों में से सर्वाधिक प्रदूषित शहर के रूप में चंद्रपुर का उल्लेख किया है। धूल प्रदूषण में चंद्रपुर लगातार 8 वर्षों से अग्रसर है। औद्योगिक जिले के रूप में चंद्रपुर की जो पहचान बनी है, वह प्रदूषण के कारण जानलेवा स्थल के तौर पर सामने आने लगी है। एमपीसीबी की स्थानीय रिपोर्ट में जिले में वर्तमान में कुल 564  कारखाने हैं। इनमें से 201  कारखाने रेड जोन में होने के कारण अत्यधिक प्रदूषणकारी माने जाते हैं। वहीं 180  कारखानों को मध्यम प्रदूषणकारी की सूची में डाला गया हैं। जबकि ग्रीन जोन में 183  कारखाने शामिल हैं। 

ज्ञात हो कि बीते सप्ताह ही ग्रीन प्लैनेट सोसाइटी के अध्यक्ष व पर्यावरण अध्ययनकर्ता प्रा.सुरेश चोपने ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट में दर्ज जानकारी को साझा करते हुए वायु प्रदूषण एवं नदियों के प्रदूषण पर गंभीर चिंता जाहिर की थी। रिपोर्ट में यह कहा गया था कि महाराष्ट्र में प्रदूषण के मामले में चंद्रपुर शहर टॉप पर चल रहा है। यहां धूल प्रदूषण अधिक है। यहां के वातावरण में सल्फर डायऑक्साइड, बेंजीन, ओजोन और नायट्रोजन डाय ऑक्साइड का प्रदूषण बेतहाशा बढ़ गया है। चंद्रपुर के अलावा घुग्घुस की स्थिति बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। जिले में राजुरा, बल्लारपुर और ताड़ाली भी अत्यधिक प्रदूषित है।

अत्यधिक प्रदूषित 50 कारखाने बड़े
एमपीसीबी की 10 वर्ष पुरानी रिपोर्ट कहती है कि अत्यधिक प्रदूषित कारखानों की सूची में उस समय 151 कारखाने हुआ करते थे। जबकि वर्तमान में इनकी संख्या बढ़कर 201 हो चुकी है। हैरत की बात है कि, बीते 10  वर्षों में 197  कारखाने किसी न किसी कारणों के चलते घट चुके हैं। एक ओर जहां कारखानों की कुल संख्या 761 से घटकर अब 564  तक पहुंच चुकी हैं, वहीं रेड जोन के कारखानों की संख्या में 50 का इजाफा होना बेहद चिंता का विषय बन गया है। हालांकि यह भी सच है कि मध्यम प्रदूषित कारखाने 206 से घटकर अब 180 पर आ पहुंचे हैं।  वहीं ग्रीन जोन में जो 404 कारखाने हुआ करते थे।  वह अब घटकर 183 तक पहुंच चुके हैं।

नजर नहीं आते 5.23  करोड़ पौधे 
प्रदूषणकारी कारखानों की स्थिति का जायजा लेते समय सरकार के पौधारोपण मुहिम पर जब गौर किया गया तो सरकारी आंकड़ें चौंकाने वाले मिले। बीते वर्ष ही सरकार ने अपने पौधारोपण के महत्वाकांक्षी योजना के तहत 1 करोड़ 67 लाख पौधों का रोपण किया था। बीते 10 वर्षों के सरकारी आंकड़ें बताते हैं कि जिले में अब तक कुल 5 करोड़ 23 लाख से अधिक के पौधे रोपित किये गये हैं। जबकि जिले की भौगोलिक स्थिति के अनुसार पूर्व से ही 40 प्रतिशत भूभाग वन से आच्छादित है। ऐसे में 5.23  करोड़ पौधे रोपने के बावजूद राज्य में चंद्रपुर शहर प्रदूषण की सूची में टॉप कर जाना पौधारोपन योजना की विफलता को उजागर करता है। करोड़ों की राशि इस पौधारोपण योजना पर फूंक दी गई। परंतु शहर अब तक हराभरा नहीं किया जा सका और इस पौधारोपण के चलते प्रदूषण घटने की जानकारी नहीं मिल पाई है। जबकि प्रशासन द्वारा 62 प्रतिशत से अधिक पौधे जीवित होने का दावा करता आया है।  

वायु प्रदूषण का मुख्य कारण कोयला
चंद्रपुर शहर के 40 किलोमीटर के दायरे में 30 से अधिक कोयला खदानें हैं। यहां से प्रतिदिन  38,000 मीट्रिक टन कोयला निकलता है। वहीं 40  किमी के दायरे में 4 बड़े थर्मल प्लांट धूल और धुंआ वातावरण में छोड़ते हैं। इसके अलावा 26 से अधिक अवैध कोल डिपो भी लगातार प्रदूषण फैला रहे हंै। इन कोल डिपो को तत्काल बंद करने के आदेश जारी होकर 3 माह बीत चुके हैं। परंतु एमपीसीबी एवं जिला प्रशासन इन कोल डिपो को बंद कराने में अब तक नाकाम ही रहा है। यही वजह है कि राज्य में प्रदूषण के मामले में सबसे बदतर स्थिति में चंद्रपुर पहुंच चुका है। इसके बावजूद एमपीसीबी प्रशासन के पास ठोस कार्रवाई एवं नियोजन का अभाव नजर आता है। 

पर्यावरणविदों के दावे झूठे
ग्रीन प्लैनेट सोसाइटी के अध्यक्ष व पर्यावरण अध्ययनकर्ता प्रा. सुरेश चोपने ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की जिस रिपोर्ट के हवाले से चंद्रपुर को राज्य का सर्वाधिक प्रदूषित शहर बताया है, वह रिपोर्ट अब तक प्रादेशिक कार्यालय तक नहीं पहुंची है। उन्होंने किन आधारों पर चंद्रपुर को सर्वाधिक प्रदूषित कहा हंै, वह हम नहीं जानते। उनकी रिपोर्ट गलत व बेबुनियाद है। शीघ्र ही हम असली रिपोर्ट को जारी करेंगे।
- एम. आर. लाड, क्षेत्रीय अधिकारी, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल कार्यालय, चंद्रपुर

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