दैनिक भास्कर हिंदी: कलेक्टर सतेन्द्र सिंह की फेक आईडी बनाकर ठगी करने वाले झारखंड से गिरफ्तार, ट्रांजिट रिमांड पर लाएगी पुलिस  

August 8th, 2019

डिजिटल डेस्क, सतना। कलेक्टर डॉ.सतेन्द्र सिंह की फेसबुक पर फेक आईडी बनाकर 20 हजार की ठगी करने के 4 आरोपियों को झारखंड की जमदेशपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पूर्वी सिंहभूमि के एसएसपी अनूप बिरथरे ने बताया कि  आरोपी  ट्रांजिट रिमांड पर सतना पुलिस के हवाले कर दिए गए हैं। माना जा रहा है कि यहां से गई पुलिस पार्टी इन आरोपियों को लेकर 8 अगस्त की रात यहां पहुंच जाएगी। बताया गया है कि अंतराज्यीय साइबर गैंग का ये एक बड़ा पर्दाफाश है। गैंग लीडर पुष्पाकर आर्या को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी के खिलाफ यहां सिविल लाइन थाने में आईपीसी की दफा 420 और आईटी एक्ट के सेक्सन 66 (सी) के तहत 31 जुलाई को अपराध कायम कराया गया था।  

ये हैं आरोपी 

  • पुष्पाकर आर्या पिता स्व. मोहन आर्या ,नानदा बस्ती गोलमुरी जमशेदपुर 
  • योगेन्द्र उर्फ चंदन अग्रवाल पिता कैलाश, हाउस नंबर1078 शिवजी पथ उलियान कदमा जमशेदपुर 
  • चिट्टू सतपथी पिता आदित्य सतपथी , हाउस नम्बर 56 इच्छापुर गोवाला पाड़ा नियर सहारा गार्डेन आदित्यपुर-2 थाना सरायकेला खरसावां 
  • अनीत कुमार सिन्हा पिता विनय प्रसाद पता न्यू मीरूडीह बस्ती आदित्यपुर  थाना आरआईटी सरायकेला खरसावां   

मोबाइल और 4 एटीएम कार्ड बरामद 

पुलिस के हत्थे चढ़े 4 जालासाजों से 6 मोबाइल फोन, पंजाब नेशनल बैंक और इंडियन बैंक के 4 एटीएम कार्ड और पंजाबनेशनल बैंक की एक पासबुक बरामद कर जब्त की गई है। एसएसपी ने बताया कि सभी आरोपियों ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। उन्होंने बताया कि आरोपियों की गिरफतारी में जमशेद पुलिस के साथ सतना पुलिस ने भी अहम भूमिका निभाई।  

बाइक की डिग्गी से निकाले किसान के 2.30 लाख

हसरी गांव निवासी किसान छोटे लाल यादव पिता रामदयाल यादव के बाइक की डिग्गी से 2 लाख 30 हजार रुपए निकाल लिए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि किसान छोटेलाल अपनी बाइक से पैसे निकालने के लिए घुवारा स्थित एसबीआई बैंक आया। दो बजे के करीब किसान ने बैंक से पैसे निकालकर बाहर खड़ी अपनी बाइक की डिग्गी में रख दिए। वह अपने किसी काम से शाहगढ़ के लिए बाइक से रवाना हो गया। किसान जब शाहगढ़ पहुंचा और बाइक की डिग्गी से पैसे निकालने के लिए डिग्गी खोली तो उसमें से पैसे गायब थे। छोटेलाल के साथ बाइक में उनके गांव का ही धनप्रसाद यादव भी बैठा था, लेकिन वह भी नहीं समझ पाया कि पैसे डिग्गी से कहां गायब हो गए या किसने निकाल लिए।