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 कब्र से निकाला नवजात का शव : पिता का दावा- स्वप्न में बेटे ने कहा मैं जीवित हूं

 कब्र से निकाला नवजात का शव : पिता का दावा- स्वप्न में बेटे ने कहा मैं जीवित हूं

डिजिटल डेस्क, सतना। आज भी अंधविश्वास लोगों के सिर चढ़कर बोलता है। इसी अंधविश्वास के चलते सोमवार को जिंदा होने की उम्मीद में एक नवजात की लाश कब्र से निकाल ली गई। लाश के निकालने के बाद उसे एक तांत्रिक पास ले जाया गया। झाडफ़ूंक कराई गई और उसे वापस घर लाया गया। नवजात के पिता ने दावा किया कि उसका नवजात बेटा उसके स्वप्न में आया और कहा कि वह जिंदा है उसे बाहर निकालो। यह खबर गांव में जंगल की आग की तरह फैल गई और तमाशबीनों का जमघट लग गया। नवजात का जन्म दो दिन पहले एम्बुलेंस में हुआ था। तबीयत खराब होने पर उसे जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था जहां दो दिन बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।

ये है मामला

मझगवां विकासखण्ड अंतर्गत रगौली ग्राम पंचायत के एक छोटे से गांव पवइया में रहने वाले लवकेश आदिवासी की पत्नी शीला आदिवासी का प्रसव 29 अगस्त को एम्बुलेंस में हो गया था। एम्बुलेंस का स्टाफ जच्चा-बच्चा को एहतियातन कोटर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ले गए जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों ने नवजात को विशेष नवजात चिकित्सा इकाई के आउट बॉर्न में एडमिट कर दिया। दो दिन भर्ती रहने के बाद 31 अगस्त की सुबह नवजात की मौत हो गई। जिसे परिजनों ने गांव में ही उसी दिन दफना दिया।

दो दिन बाद निकाला शव

नवजात के पिता लवकेश ने बताया कि 1 सितम्बर को रात में ख्वाब आया कि उसका बेटा कह रहा है कि वह जिंदा है उसे वहां से निकाल लिया जाए। यह बात उसने मोबाइल पर कारीगोही के नजदीक रहने वाले एक गोड़ तांत्रिक को बताई। तांत्रिक ने उसे शव को कब्र से निकालने की तरकीब बताई। लवकेश तांत्रिक के कहने पर अकेले ही नवजात की लाश को निकालकर अपने परिजनों समेत तांत्रिक के घर पहुंचा। वहां से झाडफ़ूंक कराकर वह अपने घर वापस लौट आया। 

बच्चे में नहीं थी कोई भी हरकत

बच्चे को लेकर लवकेश गांव पहुंचा तो वहां तमाशबीनों का मजमा लग चुका था। हर कोई अचंभित था कि आखिरकार दो दिनों तक कब्र में दफन रहने के बाद कोई जीवित कैसे रह सकता है। तांत्रिक की बातों में आकर लवकेश भी बच्चे को अस्पताल ले जाने को तैयार न हुआ। मगर नवजात के शरीर पर कोई भी हरकत नहीं थी। आंखें और मुंह खुला हुआ था। पता चला कि शाम को एक बार फिर बच्चे को वापस उसी कब्र में दफन कर दिया गया।

इनका कहना है

29 अगस्त को बच्चा भर्ती किया गया था जिसका वजन कम था। वह प्रीमेच्योर भी था। नवजात को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उसे वेंटीलेंटर में भी रखा गया मगर उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। डॉ. विजेता राजपूत इंचार्ज, एसएनसीयू
 

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