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डिजिटल नक्शा खत्म करेगा विभागों के बीच सीमा विवाद , सैटेलाइट इमेज का किया गया उपयोग

डिजिटल नक्शा खत्म करेगा विभागों के बीच सीमा विवाद , सैटेलाइट इमेज का किया गया उपयोग

डिजिटल डेस्क दमोह । राजस्व विभाग और वन विभाग के बीच सीमा विवाद खत्म करने और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए वन विभाग ने डिजिटल नक्शा तैयार कर लिया है । दमोह सहित 64 वन प्रभाग को मिलाकर यह नक्शा तैयार किया गया है ।इसमें राजस्व, कृषि और वन भूमि का नक्शा भी शामिल कर सैटेलाइट इमेज की मदद से इसे तैयार किया गया है। डिजिटल नक्शा लगभग तैयार हो चुका है लेकिन इसे लागू करने में अभी लगभग 3 से 4 माह का वक्त और लगेगा।
 पेंच कैसे कैसे
 जो गांव राजस्व और वन विभाग के सीमा विवाद के बीच फंसे हैं ऐसे गांव में ग्रामीण ना तो अपनी जमीन बेच सकते थे और ना ही बैंक में गिरवी रख कर कर्ज ले सकते थे। इसके साथ ही बन सीमा से लगे हुए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर भी अड़ंगा लगा रहता था ।सीमा विवाद के कारण जंगलों की फेंसिंग नहीं हो पा रही थी जिसके कारण जंगली जानवर गांव में प्रवेश कर जाते थे और दुर्घटनाएं होती थी। इसी के साथ सड़क, राजमार्ग ,रेल पथ आदि के निर्माण में भी समस्या पैदा होती थी।
 जारी है प्रक्रिया
 नक्शा तैयार होने के बाद वन विभाग के अधिकारी और राजस्व विभाग के अधिकारी इसका परीक्षण कर रहे हैं ।ताकि सीमा विवाद सुलझाया जा सके ।यह पहल जिला स्तर पर शुरू हो चुकी है जिसके तहत राजस्व और वन विभाग के अधिकारियों द्वारा एक दूसरे के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत किए जा रहे हैं। विवाद जिला स्तर पर नहीं सुलझने की स्थिति में शासन स्तर पर इसका निराकरण किया जाएगा। इसके लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा और इस कमेटी का निर्णय ही अंतरिम निर्णय होगा।
 सुलझ जाएंगी जटिल उलझने
 उल्लेखनीय है कि प्रदेश के जंगलों को 16 क्षेत्रीय वन मंडल, 9 राष्ट्रीय उद्यान और 25 अभ्यारण में विभाजित किया गया है ।इन 16 मंडलों में 64 वन प्रभाग शामिल हैं। जिनकी हजारों एकड़ जमीन राजस्व और कृषि भूमि के सही आंकलन ना होने के कारण विवादों में रहती है। राजस्व विभाग और वन विभाग के बीच वर्षो से सीमा विवाद भी उलझता रहता है ।इससे ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर भी असर पड़ता है। अब वन विभाग द्वारा सेटेलाइट  इमेज के जरिए राजस्व विभाग और वन विभाग  के नक्शों को मिलाकर नया डिजिटल नक्शा तैयार किया गया है जो सीमा विवाद सुलझाने में मदद करेगा।राजस्व  अधिकारी इस नक्शा का परीक्षण कर रहे हैं जिसके बाद अनुमति मिलते ही वर्षों से चले आ रहे सीमा विवादों का निपटारा हो जाएगा ।
इनका कहना है 
वन विभाग का डिजिटल नक्शा लगभग तैयार है इसके साथ ही राजस्व के साथ मिलकर भी नक्शा बनाने का कार्य चल रहा है। जिसके सीमा विवादों के सुलझाने का काम भी चल रहा है। वन विभाग और राजस्व विभाग की यह पहल सही साबित होगी।
 तरुण राठी कलेक्टर दमोह 
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।