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दैनिक भास्कर हिंदी: धूल घोंट रही दम, आए दिन हो रहे हादसे, पैदल चलना भी मुिश्कल, इधर मनाया जा रहा सड़क सुरक्षा माह

January 29th, 2021

विडंबना - शहर के किसी भी हिस्से में चले जाइए एक भी ऐसा मार्ग नहीं जिसमें पूरी तरह चलना हो सहज
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
राष्ट्रीय आह्वान पर शहर में सड़क सुरक्षा माह मनाजा रहा रहा है। कार्यक्रामों के माध्यम से लोगों को सड़क पर चलने के तौर-तरीकों से अवगत कराया जा रहा है। अवेयरनेस की बातें की जा रही हैं, लेकिन संस्कारधानी में हालात चौंकाने वाले हैं। कई लोग तो इस माह के आयोजन पर ही कटाक्ष करते नजर आ रहे हैं। उनका यह तर्क पूरी तरह गलत भी नहीं लगता कि जब शहर ठीक तरह से चलने लायक सड़कें ही नहीं हैं तो भला फिर ऐसे आयोजन का क्या औचित्य? चलने के नियम कायदों की ये बातें उन सड़कों के लिए हैं जो सपाट हैं। यहां तो सड़कों पर लोग ठीक तरह से पैदल भी नहीं चल पा रहे हैं। हर तरफ गड्ढों और धूल की भरमार है। बरसात के बाद अब  जाड़े का सीजन बीता जा रहा है,  लेकिन सड़कों की सूरत नहीं बदली। यहां तो यह बताया जाना चाहिए कि आदमी इन गड्ढों के बीच अपनी जान को कैसे महफूज रखे। उसे इनमें चलने के लिए भला कौन सा तरीका अपनाना चाहिए।उल्लेखनीय है कि बड़ी आबादी को प्रभावित करने वाली सड़क पर अमूमन हर शहर में पहले ध्यान दिया जाता है पर यहाँ तो छोटी हो या फिर बड़ी आबादी किसी भी हिस्से में समय के साथ सुधार नहीं होता है। सड़क सुरक्षा का सप्ताह या माह में तेज रफ्तार से चलने में मनाही, हैलमेट, सीट बैल्ट पहनना जरूरी, ट्रैफिक नियमों का पूरा पालन करने जैसे कई बिंदुओं पर गौर किया जाता है पर यहाँ तो नियम का पालन करने, सड़क पर धीमे चलने में भी जान के लाले पड़ जाते हैं। वाहन उम्र से पहले दम तोड़ रहे हैं तो लोगों की सेहत भी इन धूल, गड्ढों भरी सड़कों में बिगड़ रही है। करीब तीन दर्जन से अधिक सड़कों की हालत इस समय ज्यादा खराब है। 
150 करोड़ खर्च तो भी सुधार नहीं हो सका 
 बीते 11 सालों के अंदर नगर निगम सीमा में अलग-अलग क्षेत्रों में करीब 150 करोड़ की लागत से सड़कों का निर्माण किया गया है। खास बात यह है कि यह राशि स्मार्ट सिटी से किये गये सड़क निर्माण से अलग है। इतनी बड़ी राशि से जिन सड़कों को बनाया गया उनमें से कई ने शुरूआत में दम तोड़ दिया तो कुछ में एक साल के अंदर दोबारा बनाने की नौबत आ गई। अभी फिलहाल यह स्थिति है कि जिन सड़कों को कुछ साल पहले बनाया गया उन्हीं में अब फिर से डामर का लेप लगाया जा रहा है। यह सिलसिला वर्षों से चल रहा है। 
 

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