दैनिक भास्कर हिंदी: 70 की उम्र, 20 साल पुराना सपना, अब जाकर मिली अध्यात्म की राह

September 5th, 2018

डिजिटल डेस्क,भोपाल। मध्य प्रदेश के सियासी हलकों में इन दिनों दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा के खूब चर्चे हैं। भला चर्चे हों भी क्यों ना, 70 वर्षीय राजनेता जब 3300 किलोमीटर लंबी नर्मदा यात्रा के लिए पैदल चल पड़े, उबड़-खाबड़, पथरीले और दुरूह रास्तों से होकर गुजरे तो ध्यान तो खींचेंगे ही। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और देश की राजनीति के अहम किरदार दिग्विजय सिंह अपनी पत्नी अमृता सिंह के साथ नर्मदा परिक्रमा पर हैं। नर्मदा नदी यूं तो मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी है, साथ ही इस नदी का अपना  सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है। कम ही लोग हुए हैं, जो पैदल नर्मदा यात्रा कर पाए हैं। इस श्रृंखला में एक और नाम दिग्विजय सिंह और उनकी पत्नी का जुड़ रहा है। दोनों अपनी यात्रा के 1 महीने पूरे कर चुके हैं। उनका कारवां ओंकारेश्वर तक पहुंच चुका है। अक्सर अपने बयानों से चर्चा में रहने वाले दिग्विजय ने अपनी इस नर्मदा यात्रा के दौरान राजनीतिक और मीडिया से दूरी बनाकर रखी है।

अपने चुटीले अंदाज और साहसी तेवर के साथ राजनीति करने वाले दिग्विजय ने जब नर्मदा यात्रा का ऐलान किया तो किसी को सहसा यकीन नहीं हुआ। यकीन हुआ भी तो इस एहसास के साथ कि कहीं ये मध्य प्रदेश को नापने का दिग्विजयी शिगूफा तो नहीं, लेकिन दिग्विजय ने साफ कर दिया कि 6 महीने तक वो राजनीति से दूर रहेंगे। अपने अनूठे अंदाज के साथ सियासत करने वाले दिग्विजय के मन में क्या है, ये तो वही जानें, लेकिन सियासी शोर, राजनीतिक यात्राओं और जनसंपर्कों के मुकाबले उनका ये आध्यात्मिक कारवां ज्यादा सहज दिखाई दे रहा है।

दिग्विजय मां नर्मदा के किनारे-किनारे बढ़ते चले रहे हैं और रास्ते में पड़ने वाले गांवों, बस्तियों, मजरों में टोलियों की शक्ल में लोग उनके साथ जुड़ते चले जा रहे हैं। ये वो दिग्विजय नहीं हैं, जिन्हें लोग जानते हैं, बल्कि ये वो दिग्विजय हैं, जिनकी खोज खुद दिग्विजय कर रहे हैं। संस्कृति और अध्यात्म की पताका थामे आगे बढ़ रहे उनके कारवां को ग्रामीण अंचलों में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। घाटों पर होने वाली आरती, जयघोष और ग्रामीणों के साथ उनके संवाद की ताजगी को महसूस किया जा सकता है। इस दरमियां उनके राजनीतिक सहयोगी, चाहने वाले और परिचित उनसे मिलने भी पहुंच रहे हैं।

एक बड़ा वर्ग ये मानता है कि दिग्विजय सिंह 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले उन 120 विधानसभा सीटों की जमीन टटोल रहे हैं, जो नर्मदा यात्रा के दौरान मिलेंगी, लेकिन राजनीतिक सवालों से दिग्विजय की दूरी इसका जवाब तलाशने से इनकार करती है। वैसे वो ये भी साफ कर चुके हैं कि नर्मदा यात्रा पूरी करने के बाद वो फिर प्रदेश की यात्रा पर निकलेंगे, जो पूरी राजनीतिक होगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते 90 के दशक में दिग्विजय के उस दौरे को भला कौन भूल सकता है, जब उन्होंने हर जगह दस्तक देकर पार्टी को जिंदा किया था। फिलहाल इस यात्रा में ज्योतिरादित्य सिंधिया, अरुण यादव, सुरेश पचौरी जैसे नेता उनसे मिलने यात्रा के दौरान पहुंच चुके हैं, वहीं केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी दिग्विजय की यात्रा में शामिल होने की इच्छा जताई है।

पार्टी से मांगी इजाजत
बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी पैदल नर्मदा की परिक्रमा के लिए कांग्रेस हाईकमान से इजाजत मांगी थी। दिग्विजय नहीं चाहते थे कि यात्रा कोई राजनीतिक मुद्दा बन जाए। इसके लिए उन्होंने पहले पार्टी के आलाकमान को इस बारे में बताया। हालांकि पार्टी पसोपेश में थी, लेकिन बाद में यात्रा को हरी झंडी मिल गई। बताया जा रहा है कि दिग्विजय सिंह की काफी समय से नर्मदा परिक्रमा करने की इच्छा थी।

ये भी पढ़ें-नर्मदा परिक्रमा : दिग्विजय सिंह को सता रहा है धोती-लुंगी उतरने का डर

1998 में आया था विचार
दिग्विजय सिंह ने बताया कि किसी भी धार्मिक कार्य या यात्रा का जब तक योग नहीं बनता, तब तक शुभ कार्य का श्रीगणेश नहीं होता। भगवान की इच्छा के बाद भी किसी काम की शुरुआत होती है। सिंह ने बताया कि नर्मदा यात्रा का विचार उनके मन में साल 1998 में आया था। अब जाकर उनकी ये इच्छा पूरी हुई है। 

ये भी पढ़ें-नर्मदा यात्रा से पहले बोले दिग्विजय, मैं सीएम पद का दावेदार नहीं

साधु-संतों का भी आशीर्वाद
भारत माता मंदिर के संस्थापक महामंडलेश्वर पूर्व शंकराचार्य एवं पद्मविभूषित पूज्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी जी महाराज ने दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा यात्रा को आदर्श और अनुकरणीय करार दिया। उन्होंने एक पक्ष के माध्यम से इस यात्रा की सफलता और उनकी सभी मनोकामना पूरी होने के लिए शुभकामनाएं दी। पूर्व सीएम ने भी पत्र के माध्य से आभार प्रकट करते हुए कहा कि आपका आशीर्वाद मेरे लिए अद्वितीय एवं अनमोल उपहार है।

6 महीने में 3300 किमी का सफर

29 सितंबर (विजयादशमी) से शुरू नर्मदा यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह 6 महीने में करीब 3300 किलोमीटर का सफर तय करेंगे। दिग्विजय की यह यात्रा मध्यप्रदेश के 110 और गुजरात के 20 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। यात्रा मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के बरमान घाट से शुरू हुई । बरमान पहुंचे दिग्विजय सबसे पहले रेतघाट स्थित चंद्रमौलेश्वर शारदा मंदिर गए। जहां संस्कृत पाठशाला के विद्यार्थियों ने मंदिर के प्रवेश द्वार पर उनका स्वागत किया। इसके बाद सिंह ने मंदिर में पूजन अर्चना के साथ भगवान चंद्रमौलेश्वर का अभिषेक किया। वहीं उसके बाद कन्या पूजन कर उन्हें भोजन कराया।

30वें दिन पहुंचे ओंकारेश्वर
अपनी नर्मदा यात्रा के 30वें दिन दिग्वजिय सिंह का कारवां ओंकारेश्वर पहुंची। यहां उन्होंने ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर नागर घाट पर मां नर्मदा की आरती की। इस दौरान यात्रा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, पूर्व विधायक राजनारायणसिंह, प्रदेश कांग्रेस सचिव सचिन बिरला, प्रदेश किसान कांग्रेस उपाध्यक्ष नारायण पटेल शामिल थे ।यात्रा मंगलवार को ओंकारेश्वर, मोरटक्का, खेड़ीघाट होते हुए खरगोन जिले के ग्राम टोकसर पहुंची।

सिंधिया हुए शामिल
दिग्विजय की नर्मदा परिक्रमा यात्रा को 31वें दिन गुना सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का साथ मिला। दिग्गी ने गले मिलकर सिंधिया का स्वागत किया। सिंधिया ने भगवा झंडी उठाकर दिग्विजय सिंह के साथ यात्रा की। गौरतलब है कि नर्मदा यात्रा को राजनीति से दूर रखकर की जा रही है, लेकिन राजनीति से जुड़े लोग रोजाना यात्रा में शामिल हो रहे हैं। कांग्रस के वरिष्ठ नेता रामेश्वर नीखरा पहले दिन से दिग्विजय के साथ हैं। कमलनाथ के भी यात्रा में शामिल होने की उम्मीद है।  

केंद्रीय मंत्री उमा भारती का साथ

दिग्विजय सिंह की इस नर्मदा यात्रा को केंद्रीय मंत्री और मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का भी साथ मिला। भारती ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की नर्मदा यात्रा पर मीडिया कोई राजनीति न करे। उमा ने दावा किया  कि दिग्विजय और उनका परिवार बहुत ही धार्मिक हैं। उनसे उनका पुराना संबंध है। वह उनके राघवगढ़ के किले में प्रवचन कर चुकी हैं। अगर यात्रा के समापन पर आयोजित भंडारे में दिग्विजय ने बुलाया तो जरूर जाएंगी। उनकी यह भी कामना है कि दिग्विजय को नर्मदा यात्रा को पूरा फल मिले।

यात्रा के अंत में बड़ा खुलासा

दिग्विजय सिंह की 6 महीने की इस यात्रा के दौरान रोजाना 15-20 किलोमीटर चलने का लक्ष्य रखा गया है। इस यात्रा को लोगों के साथ ही कई राजनीतिक हस्तियों का भी समर्थन मिला है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि यात्रा खत्म होने के बाद वो बड़ा खुलासा करेंगे। हालांकि उनकी ये यात्रा किस करवट बैठती है ये देखने वाली बात होगी, लेकिन दिग्गी की इस यात्रा को राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर अपना कद बढ़ाने के मास्टरस्ट्रोक के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि बताया ये भी जा रहा है कि वो यात्रा के दौरान अवैध उत्खनन के सबूत जुटाने की कोशिश करेंगे।