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गरीब माँ कैसे उठा पाएगी उसके विवाह का खर्च - इसी चिंता का अंत करने बेटी ने कर ली आत्महत्या

गरीब माँ कैसे उठा पाएगी उसके विवाह का खर्च - इसी चिंता का अंत करने बेटी ने कर ली आत्महत्या

डिजिटल डेस्क बालाघाट । दिहाड़ी मजूदर मां की बेबसी और लाचारी को भांपकर एक बेटी ने आत्मघाती कदम उठाकर अपनी शादी के चार दिन पहले जहर खाकर जान दे दी। आर्थिक तंगदस्ती के साए में जीवन गुजार रहे इस परिवार के समक्ष आर्थिक समस्या मुंह बांए खड़े थी। हालात ऐसे बने की मजदूर मां की लाड़ली बेटी मां के परेशानी को देख नही पाई और मौका देख अपनी जीवन लीला समाप्त करने के लिए कीटनाशक का सेवन कर लिया जिसकी उपचार के दौरान अस्पताल में मौत हो गई। 
25 जून को होने थे हाथ पीले 
जानकारी के अनुसार चार दिन बाद 25 जून का युवती का विवाह होने वाला था,  लेकिन शनिवार को घर से उसकी अर्थी उठी। शव को विदा करते हुए न केवल मां रो-रही थी बल्कि हर वह शख्स गमजदा था, जो उस परिवार से जुड़ा और परिचित था।
लांजी के अंधियाटोला का है मामला 
मामला जिले के लांजी क्षेत्र के बहेला थाना अंतर्गत ग्राम अंधियाटोला का हैं। यहां 24 वर्षीय युवती कौशल्या पिता दिलीप चौरागढ़े ने विवाह के चार दिन पहले जहर खाकर जान दे दी। वह मजदूर मां पर विवाह के आर्थिक बोझ से परेशान थी और इसी परेशानी के चलते उसने 19 जून की रात घर में जहरीली दवा का सेवन कर लिया, जिसे मां सरस्वतीबाई ने उपचारार्थ लांजी अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां से उसकी हालत को देखते हुए उसे जिला चिकित्सालय लाया गया था। जिसकी आज 20 जून को जिला चिकित्सालय में ईलाज के दौरान मौत हो गई। अस्पताल से युवती की मिली तहरीर के बाद अस्पताल चौकी प्रभारी एएसआई लखन भीमटे ने युवती का शव बरामद कर शव पंचनामा कार्यवाही के बाद पीएम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया है। मामले की अग्रिम जांच बहेला पुलिस द्वारा की जायेगी।
बेटी की मौत के बाद मां ने सुनाई व्यथा 
बेटी की मौत को लेकर पुलिस को दिये गये बयान में मृतिका की मां सरस्वतीबाई चौरागढ़े का कहना रहा कि 23 साल पहले, उसके पति से उसका तलाक हो गया था, जिसके बाद वह मजदूरी कर अपनी दो बेटियों के साथ जीवन निर्वाह कर रही थी।
गोंदिया में हुआ था रिश्ता तय 
मां के अनुसार बड़ी बेटी का विवाह हो चुका था, जबकि छोटी बेटी कौशल्या का विवाह आगामी 25 जून को होना था, जिसकी बारात गोंदिया से आनी थी। मां सरस्वतीबाई ने बताया 19 जून की रात खाना बनने के बाद बेटी कौशल्या को उसने खाने बोला, लेकिन बेटी ने कहा कि वह खाना खा ले, जिसके बाद उसने खाना खाया। वह खाना खाकर उठी ही थी कि तभी देखा कि सामने आंगन से किसी के गिरने की आवाज सुनी। जब जाकर देखा तो बेटी कौशल्या खड़े-खड़े दीवाल से लडखड़़ा रही थी।
मां सरस्वती बाई का कहना रहा पूछने पर बेटी ने बताया कि उसने कचरे में डालने वाली जहरीली दवा खा ली हैं, जिसके बाद उसने आवाज देकर आसपास के लोगों को बुलाया और उनकी मदद से बेटी कौशल्या को लेकर वह ईलाज कराने लांजी अस्पताल पहुंची, जहां से प्राथमिकी उपचार के बाद जहरीली दवा खाने से गंभीर रूप से बीमार कौशल्या को लेकर परिजन रात्रि 1 बजे जिला चिकित्सालय पहुंचे जिसकी शनिवार 20 जून की सुबह लगभग 11.55 बजे मौत हो गई।  
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।