दैनिक भास्कर हिंदी: सारस लैंड होगी बालाघाट की नई पहचान -पूरा किया गणना का कार्य, 

June 20th, 2020

डिजिटल डेस्क बालाघाट । बालाघाट देश में सबसे उंचे पक्षियों में शुमार सारस, जिसे इंडियन क्रेन या क्रौंच भी कहा जाता है का नया घरौंदा बन कर सामने आया है। क्षेत्रिय किसानो और युवाओ के प्रयासों से जिले ने सारसों की संख्या के मामले में सारस लैंड के नाम से पहचाने जाने वाले महाराष्ट्र के गोंदिया को पछाड़ दिया है। कलेक्टर दीपक आर्य ने पिछले एक सप्ताह से चल रही सारसों की गणना के आंकड़े आज जारी करतेे हुए कहा है कि बालाघाट की नई पहचान अब सारस लैंड के रूप में भी होगी। पर्यावरण एवं वन्य जीव संरक्षण तथा संवर्धन के लिए कार्यरत संस्था सेवा गोंदिया के अध्यक्ष सावन बहेकार ने तकनीकी आधार पर गणना उपरांत यह आंंकड़े कलेक्टर दीपक आर्य को सौपे जिन्होने इसे आज जारी कर दिया है। प्राप्त आंकड़ो के अनुसार बालाघाट में सारसों की संख्या 58 और पड़ोसी जिले महाराष्ट्र के गोंदिया में यह संख्या 45 से 47 के बीच बताई जा रही है। 
ऐसे हुई सारसों की गणना 
विदित हो की 13 से 18 जून 2020 तक गोंदिया जिले में 23 टीमें तथा बालाघाट जिले में 21 टीमें बनाकर सारस की गणना की गई। यह सभी टीमें प्रतिदिन सुबह 5 बजे से 10 बजे तक विभिन्न स्थानों में प्रत्यक्ष रूप से जाकर सारस के विश्राम स्थलों पर सारस गणना करती थी। बालाघाट जिले में बालाघाट टूरिज्म प्रमोशन काउंसिलग वन विभाग एवं वन्य प्राणी संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े कृषक एवं स्वयंसेवी लोग इस कार्य में लगे रहे सेवा संस्था के सदस्य पूरे वर्ष भर सारस के विश्राम स्थल प्रजनन अधिवास तथा भोजन के लिए प्रयुक्त भ्रमण पद का अभ्यास किया जाता है साथ ही सारस के अधिवास एवं उनके आसपास रहने वाले किसानों को सारस का महत्व बताकर उसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रेरित किया जाता है।
बाघ और वैनगंगा के इर्दगीर्द है सारसों का डेरा 
बाघ एवं वैनगंगा नदी महाराष्ट्र मध्य प्रदेश के गोंदिया तथा बालाघाट जिलों को विभाजित करती है भौगोलिक दृष्टिकोण से नदी के दोनों ओर के प्रदेश की जैव विविधता में काफी समानता पाई जाती है अत: कुछ सारस के जोड़े अधिवास तथा भोजन के लिए दोनों ओर के प्रदेशों में समान रूप से विचरण करते पाए जाते हैं सीमाओं का बन्धन उनके लिए मायने नहीं रखता है जो मनुष्य के लिए अच्छा सबक है।
सारसों के संरक्षण हेतु कलेंडर लॉच
कलेक्टर दीपक आर्य ने बताया कि जो परिणाम आए हैं उसमें सेवा संस्था वन्य जीव संरक्षण से जुड़े लोग एवं जिले के जागरूक कृषकों के कारण इनकी संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है जो सारस के लिए एक अच्छे संकेत हैं। जिससे जिले का नाम सारस लैंड के नाम से भी जाना जाएगा। कार्यक्रम के अंत में कलेक्टर दीपक आर्य ने सारस संरक्षण से जुड़ी संस्था एवं सभी व्यक्तियों का आभार प्रकट किया। उन्होंने सभी लोगो से अपील की कि सारस संरक्षण हेतु जागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि जिले में इनकी संख्या ओर अधिक हो सके । कार्यक्रम में कलेक्टर दीपक आर्य द्वारा सारस संरक्षण हेतु तैयार किए गए पोस्टर का विमोचन किया तथा गणना के दौरान खींची गई फोटो का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सहायक कलेक्टर दलीप कुमार, अभय कोचर, खगेश कावरे, चेतन जतानी, अविजित परिहार, रवि पालेवार उपस्थित रहे।