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दुष्कर्म से व्यथित नाबालिग ने किया सुसाईड -अज्ञात आरोपी की पतासाजी में जुटी पुलिस

दुष्कर्म से व्यथित नाबालिग ने किया सुसाईड -अज्ञात आरोपी की पतासाजी में जुटी पुलिस

डिजिटल डेस्क  बालाघाट। जिले के लांजी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कुल्पा में एक नाबालिग ने दुष्कर्म के बाद घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मर्ग विवेचना और एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर बहेला पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने और उसे आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित करने के मामले सहित पॉस्को एक्ट की धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। जिसके बाद पुलिस आरोपी की पतासाजी में जुटी है।
बहेला पुलिस के अनुसार ग्राम कुल्पा में 29 जनवरी 2020 को एक 16 वर्षीय नाबालिग ने अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जिसकी जानकारी मिलने के बाद लांजी पुलिस ने घटनास्थल से शव बरामद कर पंचनामा कार्यवाही के बाद शव का पीएम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया था। जिसमें पुलिस ने मर्ग कायम कर विवेचना में लिया था। जिसकी विवेचना और जांच उपरांत पुलिस को पता चला कि किसी अज्ञात आरोपी द्वारा नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। जिसके बाद पीडि़ता नाबालिग ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस मामले में पुलिस ने 2 जून को अज्ञात आरोपी के खिलाफ धारा 306,376 ताहि. 3,4 लैंगिक अपराधों से बालको का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत अपराध दर्ज किया है।
इनका कहना है
21 जनवरी 2020 को नाबालिग ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जिसमें पुलिस ने मर्ग कायम कर विवेचना में लिया था। मामले की विवेचना और एफएसएल रिपोर्ट के बाद नाबालिग के साथ दुष्कर्म कर उसे आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित करने के मामले में अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज किया गया है।
राकेश बघेल, उपनिरीक्षक, थाना लांजी
 

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Friendship Day Special: राजनीति की दुनिया में इन नेताओं ने कायम की दोस्ती की अनोखी मिसाल

Friendship Day Special: राजनीति की दुनिया में इन नेताओं ने कायम की दोस्ती की अनोखी मिसाल

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। फिल्मी दुनिया से लेकर आम लोगों के बीच तक दोस्ती के किस्से बहुत मशहूर होते हैं। पर बात राजनीति की हो तो अलग अलग या एक ही दल के नेताओं के बीच दोस्ती की दास्तानें मशहूर होना मुश्किल ही नजर आता है। पर, नामुमकिन नहीं है। फ्रैंडशिप डे के मौके पर जानिए ऐसे ही कुछ राजनेताओं की दोस्ती के किस्से जो सियासी गलियारों आज भी सुने और सुनाए जाते हैं।

अटल-नरसिम्हा 

On My Radar: Two Buddhas smiled - The Sunday Guardian Live

अटल बिहारी वाजपेयी और नरसिम्हा राव दोनों की दोस्ती बहुत पक्की थी। दोनों ही नेताओं के दोस्ती के किस्से सियासत की गलियों में काफी सुने जाते हैं। दोनों ही अलग पार्टी से थे और दोनों नेताओं की विचारधारा भी अलग थी। फिर भी दोनों नेता एक दूसरे की मदद लेने से या एक दूसरे की तारीफ करने से नहीं झिझकते थे।   

नरसिम्हा राव का अधूरा काम पूरा किया

पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव का एक अधूरा काम था, जो अटल बिहारी वाजपेयी ने पूरा किया था। बात साल 1996 की है, कांग्रेस चुनावों में हार चुकी थी और भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी थी। नरसिम्हा राव इस बात से खुश थे कि प्रधानमंत्री वाजपेयी जी बने हैं। जब शपथ समारोह शुरु हुआ था तो नरसिम्हा राव वाजपेयी जी के पास आये और कहा कि “अब मेरे अधूरे काम को पूरा करने का समय है”। ये अधुरा काम था परमाणु परीक्षण का। जो प्रधानमंत्री रहते राव पूरा नहीं कर सके थे। जब दोस्त को अपनी कुर्सी संभालते देखा तो ये उम्मीद भी बंधी की अधुरा काम वही परा करेंगे। अटलजी भी परमाणु परीक्षण कराकर दोस्ती की कसौटी पर खरे उतरे। 2004 में नरसिम्हा राव के अंतिम संस्कार के दो दिन बाद, वाजपेयी अपने पुराने दोस्त को श्रद्धांजली देने पहुंचे। इस कार्यक्रम में उन्होंने अपने दोस्त को परमाणु कार्यक्रम का 'true father' कहा था। वाजपेयी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री बनने के कुछ दिनों बाद मई 1996 में, ‘राव ने मुझे बताया था कि बम तैयार है। मैंने बस इसे आगे बढ़ाते हुए इसका विस्फोट किया।‘

पाकिस्तान को दो दोस्तों ने मिलकर हराया

यह बात है 27 फरवरी 1994 की जब पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के जरिए प्रस्ताव रखा था। उसने अपनी चाल खेलते हुए कश्मीर में हो रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर भारत की निंदा की। नरसिम्हा राव सरकार पर संकट के बादल गहराये हुए थे। भारत के सामने परेशानी यह थी कि अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता तो भारत को UNSC के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता।

नरसिम्हा राव उस समय कई तरफ से चुनौतियों का सामना कर रहे थे। तत्कालीन पीएम नरसिम्हा राव ने इस मसले को खुद अपने हाथों में लिया और जिनेवा में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए सावधानीपूर्वक एक टीम बनाई। कहते है कि संकट के समय हमें हमेशा अपने दोस्तों की याद आती है और नरसिम्हा को याद आयी अपने अटल की। उन्होंने तुरंत एक प्रतिनिधिमंडल बनाया, जिसमें उन्होंने वाजपेयी के अलावा तत्कालीन विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, ई. अहमद, नैशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला और हामिद अंसारी को शामिल किया। वाजपेयी जी उस समय विपक्ष के नेता थे और उन्हें इस टीम में शामिल करना मामुली बात नहीं थी।

इसके बाद नरसिम्हा राव और वाजपेयी ने उदार इस्लामिक देशों से संपर्क शुरू किया। राव और वाजपेयी ने ही OIC के प्रभावशाली 6 सदस्य देशों और अन्य पश्चिमी देशों के राजदूतों को नई दिल्ली बुलाने का प्रबंध किया। दूसरी तरफ, अटल बिहारी वाजपेयी ने जिनेवा में भारतीय मूल के व्यापारी हिंदूजा बंधुओं को तेहरान से बातचीत के लिए तैयार किया। वाजपेयी इसमें सफल हुए।

प्रस्ताव पर मतदान वाले दिन जिन देशों के पाकिस्तान के समर्थन में रहने की उम्मीद थी उन्होंने अपने हाथ पीछे खींच लिए। इंडोनेशिया और लीबिया ने OIC द्वारा पारित प्रस्ताव से खुद को अलग कर लिया। सीरिया ने भी यह कहकर पाकिस्तान के प्रस्ताव से दूरी बना ली कि वह इसके रिवाइज्ड ड्राफ्ट पर गौर करेगा। 9 मार्च 1994 को ईरान ने सलाह-मशवरे के बाद संशोधित प्रस्ताव पास करने की मांग की। चीन ने भी भारत का साथ दिया। अपने दो महत्पूर्ण समर्थकों चीन और ईरान को खोने के बाद पाकिस्तान ने शाम 5 बजे प्रस्ताव वापस ले लिया और भारत की जीत हुई। 

संजय गांधी-कमलनाथ

सीएम कमलनाथ ने अपने दोस्त 'संजय गांधी' को पुण्यतिथि पर ऐसे किया याद - kamalnath tribute to sanjay gandhi on his death anniversary - AajTak

कमलनाथ का राजनीतिक सफर जब भी लिखा जायेगा, तब उसमें एक नाम जरूर आयेगा और वो नाम संजय गांधी का है। संजय गांधी और कमलनाथ की दोस्ती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक दौर में यह नारा काफी मशहूर था- इंदिरा के दो हाथ, संजय और कमलनाथ। कमलनाथ को इंदिरा अपना तीसरा बेटा मानती थीं। कमलनाथ दून स्कूल के दिनों से ही संजय के बेहद करीब थे।  
वो घटना जिसके बाद संजय के और करीब आये कमलनाथ

इमरजेंसी के बाद बनी जनता पार्टी की सरकार ने संजय गांधी को गिरफ्तार कर लिया था। संजय को दिल्ली के तिहाड़ जेल में रखा गया था, लेकिन इंदिरा को जेल में उनकी सुरक्षा की चिंता सताने लगी। कमलनाथ को जब इंदिरा के डर का पता चला तो उन्होंने एक नायाब तरीका निकाला। कोर्ट में जब मामले की सुनवाई चल रही थी तब कमलनाथ ने कागज का गोला बनाकर जज के ऊपर फेंक दिया। इस अपराध में उन्हें भी जेल भेज दिया गया। कमलनाथ और इंदिरा यही चाहते भी थे। इसके बाद से ही कमलनाथ, इंदिरा गांधी के सबसे विश्वासपात्रों में शामिल हो गए। 

जयललिता-शशिकला

Sasikala and Jayalalithaa: An enigmatic relationship - The Financial Express

तमिलनाडु की पूर्व सीएम जयललिता और शशिकला की दोस्ती का किस्सा काफी दिलचस्प है। तत्कालीन सीएम एमजी रामचंद्रन के करीबी आईएएस अधिकारी चंद्रलेखा जयललिता और शशिकला की दोस्ती का जरिया बनीं। उस वक्त शशिकला के पति नटराजन चंद्रलेखा के सहयोगी थे। उन्होंने ही चंद्रलेखा से कह कर दोनों की मुलाकात करवाई। दरअसल शशिकला सीएम की करीबी नेता जयललिता का वीडियो शूट करा चाहती थीं। वीडियो शूटिंग के सिलसिले में हुई पहली मुलाकात दोनों की पक्की दोस्ती में बदल गई। 

वर्ष 1988 में शशिकला परिवार को लेकर जयललिता के घर आ गयीं और उनके साथ रहने लगीं। धीरे-धीरे शशिकला विश्वासपात्र बनती गयीं। पार्टी से जुड़े फैसलों में भी शशिकला की भूमिका बढ़ती गयी। पार्टी से निष्कासन और नियुक्ति जैसे कार्य शशिकला के ही जिम्मे थे। जानकारों का कहना है कि जयललिता की संपत्ति की देख-रेख की जिम्मेदारी शशिकला और उनके पति नटराजन के हाथों में ही थी।

सचिन-ज्योतिरादित्य 

Sad to see 'erstwhile colleague' too being sidelined: Jyotiraditya Scindia backs Sachin Pilot - India News

 सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ने ही अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी। दोनो ही कांग्रेस में युवा नेता के तौर पर जाने जाते थे। सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही काफी अच्छे दोस्त हैं। सचिन पायलट ने हाल ही में सिंधिया से ये दोस्ती निभायी भी। अभी मध्यप्रदेश में हुए उपचुनाव में सचिन पायलट ने सिंधिया के गढ़ ग्वालियर-चंबल में दनादन 9 सभाएं कीं लेकिन उन्होंने एक भी सभा में सिंधिया के खिलाफ कुछ भी नहीं बोला। जब मीडिया ने उनसे सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि वे अपनी पार्टी का काम करने आए हैं। वहीं सिंधिया ने कहा कि वे अपना काम कर रहे हैं और कांग्रेस अपना। सचिन पायलट सिंधिया के खिलाफ नहीं बोल रहे थे। इसके पीछे का कारण केवल एक ही था कि सचिन पायलट ने राजनीति से ऊपर दोस्ती को रखा। सिंधिया के बीजेपी में आने के बाद सचिन के भी कांग्रेस छोड़ने के कयास लगते रहे हैं।

नुसरत-मिमी 

TMC MPs Nusrat Jahan, Mimi Chakraborty take oath as LS members - The Economic Times

नुसरत जहां और मिमी चक्रवती दोनो बंगाल फिल्म इंडस्ट्री से हैं। दोनों ही युवा सांसद हैं और काफी मॉडर्न भी हैं। दोनों बंगाल फिल्म इंडस्ट्री की शान तो हैं ही राजनीति में दोनों एक साथ ही आईं। संयोग ये है कि दोनों ने एक साथ ही, एक ही पार्टी (टीएमसी) से लोकसभा चुनाव जीता। पहली जीत के बाद जब दोनों एक साथ संसद पहुंची तो सबकी नजरें उन्हीं पर टिकी हुई थीं। साड़ी और सूट की परंपरा वाली संसद में दोनों जींस टॉप में पहुंची थीं। तकरीबन एक जैसे लिबास और एक जैसे अंदाज वाली इन नेताओं की ट्रोलिंग भी हुई। इसके बाद नुसरत जहां अक्सर अपनी शादी, अपने मजहब को लेकर ट्रोल होती रहीं हैं। और मिमी अक्सर उनके बचाव के  लिए आगे आती रही हैं। 

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International Friendship Day: बॉलीवुड की 5 अभिनेत्रियां, जिनकी बेस्ट फ्रेंड हैं ग्लैमर की दुनिया से कोसों दूर

International Friendship Day: बॉलीवुड की 5 अभिनेत्रियां, जिनकी बेस्ट फ्रेंड हैं ग्लैमर की दुनिया से कोसों दूर

डिजिटल डेस्क,मुंबई। दुनियाभर में हर साल की तरह इस साल भी फ्रेंडशिप डे 1 अगस्त को सेलिब्रेट किया जाएगा। इस दिन सभी अपने दोस्तों के साथ एन्जॉय करते है। कई सेलिब्रिटी अपने बेस्ट फ्रेंड के साथ सोशल मीडिया पर पोस्ट भी शेयर करेंगे। हमे अक्सर लगता है कि सेलिब्रिटीज के दोस्त भी सेलिब्रिटी होंगे। लेकिन ऐसा नहीं है। आज हम आपको बॉलीवुड की उन 5 मशहूर अभिनेत्रियों की बेस्ट फ्रेंड से रुबरु करवाएंगे, जिनकी दोस्त ग्लैमर की दुनिया से कोसों दूर हैं। फिर भी इनकी दोस्ती आज तक बरकरार है। 

अनुष्का शर्मा और कनिका करवीनकोप 
कनिका और अनुष्का काफी अच्छे दोस्त हैं। लेकिन, कनिका कोई एक्ट्रेस नहीं बल्कि, स्टाइलिस्ट और Entrepreneurs है। कनिका उन गिने चुने लोगों में शामिल थीं, जिन्होंने इटली में अनुष्का और विराट की शादी अटेंड की थी।

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प्रियंका चोपड़ा और तमन्ना दत्त
प्रियंका चोपड़ा और तमन्ना दत्त की दोस्ती काफी पुरानी है। प्रियंका ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि,तमन्ना दत्ता और वो एक रूममेट्स के तौर पर मिले थे। अब इनकी दोस्ती को 20 साल से ज्यादा हो चुके हैं। 

Priyanka Chopra

परिणीति चोपड़ा और संजना बत्रा
अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा और संजना बत्रा दोनों काफी अच्छे दोस्त है। संजना बत्रा चमक-धमक से दूर एक स्टाइलिस्ट है। दोनों को कई बार साथ घूमते हुए स्पॉट किया गया है।  

Bollywood Celebrities And Their Non-Famous Friends

दीपिका पादुकोण और उर्वशी  केशवानी
एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण की सबसे अच्छी दोस्त उर्वशी केशवानी है। कुछ समय पहले दीपिका और रणवीर बैंगलोर एक शादी अटेंड करने गए थे, जहां उनका डांस वीडियो जमकर वायरल हुआ था। दरअसल, वो शादी उर्वशी केशवानी की ही थी।  

Deepika Padukone and Ranveer Singh hit the dance floor at Urvashi Keswani's Bengaluru wedding | Vogue India

सोनम कपूर और संयुक्ता नायर
हिंदी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री और फैशन दीवा सोनम कपूर आहूजा की दोस्त है संयुक्ता नायर। जो लीला पैलेस में इंटीरियर डिज़ाइन और ऑपरेशन की CEO है। सोनम और संयुक्ता काफी अच्छी दोस्त हैं और अक्सर दोनों को एक साथ छुटि्टयां बिताते और खास मौकों पर सेलिब्रेट करते हुआ देखा जाता है। 

Sonam Kapoor's bestie happens to be Samyukta Nair of The Leela, that's why



 

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MS Dhoni New Look: नए हेयरस्टाइल में नजर आए कैप्टन कूल, देखते ही देखते वायरल हो गया नया लुक

MS Dhoni New Look: नए हेयरस्टाइल में नजर आए कैप्टन कूल, देखते ही देखते वायरल हो गया नया लुक

डिजिटल डेस्क, मुंबई। कप्तान कूल महेंद्र सिंह धोनी बेशक क्रिकेट के मैदान से दूर हैं पर सुर्खियों से उन्हें दूर रखना मुश्किल है। धोनी के चाहने वाले उनकी एक झलक पाने के लिए आज भी बेताब रहते हैं। हाल ही में पूर्व कप्तान अपने हेयरस्टाइल को लेकर सुर्खिया बटोर रहे हैं। उनको ये नया लुक मशहूर हेयर स्टाइलिस्ट आलिम हाकिम ने दिया है।  आलिम हाकिम ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से कई तस्वीरें पोस्ट की , जिसमें धोनी एक नए लुक में नजर आ रहे हैं। ये तस्वीरें इंटरनेट पर काफी वायरल हो रही हैं। 

Image courtesy: Aalim Hakim

Image courtesy: Aalim Hakim

MS Dhoni with his hair stylist Aalim Hakim. [Image courtesy: Aalim Hakim]

Dhoni's different hairstyles throughout the years reflected his different moods and states of mind: Sapna Bhavnani | Off the field News - Times of India


अपने हेयरस्टाइल को लेकर धोनी हमेशा से ही सुर्खियों में रहे हैं। चाहे अपने करियर के शुरुआती दौर में लम्बे बालों के लिए हो चाहें 2011 वर्ल्ड कप के बाद मुंडन। 

When MS Dhoni 'shaved off his head' and pleasantly surprised Team India after the 2011 World Cup triumph

धोनी के लम्बे बालों की तारीफ पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जनरल परवेज मुशर्रफ भी कर चुके हैं। 

धोनी जल्द ही यूएई में आयोजित होने जा रहे आईपीएल 2021 के दूसरे फेज में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलते हुए नजर आएंगे।   

Mahendra Singh Dhoni's hairstyles: From dreadlocks to mohawks to a shaved head | Cricket - Hindustan Times


बता दें कि आलिम हकीम की गिनती देश के जाने-माने हेयरस्टाइलिस्ट के रूप में होती है।  बॉलीवुड के बड़े सितारे हो या फिर टीम इंडिया के स्टार्स प्लेयर्स  अक्सर आलिम हकीम के पास जाकर खुद को नया लुक देते हुए नजर आए हैं। 

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उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव 2022: योगी लोकप्रिय, फिर भी बीजेपी में क्यों है हार का डर, ये हैं 6 बड़े कारण

उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव 2022: योगी लोकप्रिय, फिर भी बीजेपी में क्यों है हार का डर, ये हैं 6 बड़े कारण

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तरप्रदेश में अगले साल यानि कि 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस चुनाव को लगातार दिलचस्प बना रहे हैं सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उनके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती। अखिलेश यादव की सक्रियता यूपी में देखने लायक है। बहन मायावती भी अब मुख्य चुनावी धारा में वापसी के लिए बेचैन नजर आने लगी हैं। पर मौजूदा हालात को देखते हुए यही कयास हैं कि बीजेपी की ही वापसी होगी। और संभवतः योगी आदित्यनाथ ही बीजेपी का चेहरा भी होंगे। इस चुनाव से पहले बीजेपी राम मंदिर मुद्दे को भी खत्म कर चुकी है। जनसंख्या नियंत्रण कानून पर भी चर्चा शुरू हो चुकी है। उसके बावजूद बीजेपी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नहीं बताई जाती। उसकी कुछ ये बड़ी वजह नजर आती हैं-

पूर्वांचल में पुराने साथियों का छूटना

2017 के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल फतह करने के लिए बीजेपी एक नए फॉर्मूले के साथ मैदान में उतरी थी। बीजेपी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में उन छोटे राजनीतिक दलों के साथ में गठबंधन किया, जिनका अपना जातिगत वोटबैंक है। इसी फॉर्मूले का फायदा बीजेपी को मिला और बीजेपी को 2017 के विधानसभा चुनाव में 28 जिलों की 170 सीटों में से 115 सीटें मिली थीं। यह नंबर सच में करिश्माई थे लेकिन इस आंकड़े को अकेले बीजेपी ने अपने दम पर हासिल नहीं किया था। उसकी मदद इन छोटे राजनीतिक दलों से जुड़े उनके जातिगत वोटबैंक ने की थी। आइये समझते है पूर्वांचल में इन छोटे राजनीतिक दलों की ताकत जो किसी का भी खेल बना और बिगाड़ सकते हैं। 

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सपा का गठबंधन  

दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है कुछ ऐसा ही हाल अखिलेश यादव का है। 2019 में बसपा का साथ लेकर सपा को जो नुकसान हुआ था। उसके बाद अब अखिलेश 2022 के लिए छोटे छोटे दलों के साथ गठबंधन कर रहे हैं। सपा ने राष्ट्रीय लोकदल, संजय चौहान की जनतावादी पार्टी और केशव मौर्या की महान दल के साथ में गठबंधन कर लिया है। 

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बनारस, मथुरा, अयोध्या में सपा की बल्ले बल्ले

जिला पंचायत चुनाव में भले ही बीजेपी ने बाजी मारी हो। पर कुछ नतीजे बीजेपी के लिए भी चौंकाने वाले थे। क्योंकि पार्टी को उन जगहों पर झटका लगा था जहां बिलकुल उम्मीद नहीं थी। अयोध्या में मंदिर मसला हल होने का फायदा जिला पंचायत चुनाव के नतीजों में नजर नहीं आया। यहां समाजवादी पार्टी का दबदबा दिखाई दिया। कमोबेश यही नतीजे बनारस और मथुरा में नजर आए। बता दें बनारस पीएम नरेंद्र मोदी की लोकसभा सीट है। 

ayodhya

किसान आंदोलन

देश में किसान पिछले 8 महीनों से आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन का असर उत्तर प्रदेश की सियासत पर देखने को मिल रहा है। किसान आंदोलन का सबसे अधिक असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जाट लैंड कहा जाता है, यहां पर एक कहावत कही जाती है कि 'जिसका जाट उसके ठाठ'। इसकी एक वजह यह है कि चौधराहट करने वाले इस समाज के निर्णय से कई जातियों का रुख तय होता है। किसान आंदोलन से यही जाट बीजेपी से खिसकते नजर आ रहे हैं।

kisan

ब्राह्मणों की नाराजगी 

साल 2017 में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की तो राजपूत समुदाय से आने वाले योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। यही वजह है कि योगी सरकार में राजपूत बनाम ब्राह्मण के विपक्ष के नैरेटिव के मद्देनजर ब्राह्मण वोटों का अपने पाले में जोड़ने के लिए बसपा से लेकर सपा और कांग्रेस तक सक्रिय है।  विकास दुबे और उसके साथि‍यों के एनकाउंटर के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश में योगी अदित्यनाथ की सरकार में  ब्राह्मणों पर अत्याचार बढ़ने का आरोप लगाया था। ब्राह्मण बुद्धिजीवियों का आरोप है कि एकतरफा समर्थन के बावजूद सरकार में ब्राह्मणों को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से किनारे कर दिया गया है। 

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मोदी बनाम योगी!

मोदी और योगी के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में मोदी बनाम योगी को लेकर काफी चर्चाएं हैं। इन चर्चाओं ने ऐसे ही जन्म नहीं लिया है, इनके पीछे कुछ ठोस वजह हैं। हालांकि बीजेपी ने हर बार यही जाहिर किया है कि पार्टी के अंदर ऐसी कोई कलह नहीं है।

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ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया से आए हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के अलावा जर्मन की महिला जिमनास्टिक्स ने फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपने मन के कपड़े पहनने की आजादी को अपने खेल के जरिए प्रमोट करने का फैसला किया है, जिससे उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness

जर्मनी की महिला जिमनास्ट रविवार को हुए टोक्यो ओलंपिक मुकाबले में फुल बॉडी सूट पहने नजर आई। खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूट को फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी को बढ़ावा देने साथ ही महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है जिसे पहनकर महिला खिलाड़ी आरामदायक महसूस कर सकें।

Germany's gymnasts wear body-covering unitards, rejecting 'sexualization' of sport - CNN 
 

जर्मनी की 4 जिमनास्ट जिनके नाम है पॉलीन शेफर-बेट्ज, सारा वॉस, एलिजाबेथ सेट्ज और किम बुई लाल और सफेद रंग के इस यूनिटार्ड सूट में नजर आई जो लियोटार्ड और लेगिंग्स को मिलाकर बनाया गया था। खिलाड़ी इसी को पहन कर मैदान में उतरीं थी। 

German gymnastics team, tired of 'sexualisation,' wears unitards | Deccan Herald
 

जर्मनी की टीम ने अपनी ट्रेनिंग में भी इसी तरह के कपड़े पहने हुए थे और अपने कई इंटरव्यूज में खिलाड़ियों ने कहा था कि इस साल फाइनल कॉम्पटीशन में भी वो फ्रीडम ऑफ चॉइस को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगी। खिलाड़ी सारा वॉस ने द जापान टाइम्स को बताया था यूनिटार्ड को फाइनल करने से पहले उन्होंने इस पर चर्चा भी की थी। सारा ने ये भी कहा कि जैसे जैसे एक महिला बड़ी होती जाती है, वैसे ही उसे अपने शरीर के साथ सहज होने में काफी मुश्किल होती हैं। हम ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसमें हम अच्छे भी दिखे और सहज भी महसूस करें। चाहे वो कोई लॉन्ग यूनिटार्ड हो या फिर शॉर्ट। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness
 

सारा ने यह भी बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में भी इसी तरह का फुल बॉडी सूट पहना था और इसका उद्देश्य सेक्सुलाइजेशन को कम करना है। हम लोगों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहते थे जिससे वो हमे फॉलो कर सकें। जर्मन के खिलाड़ियों की लोग काफी प्रशंसा भी कर रहे हैं। 


ओलंपिक प्रतियोगिताओं में जिमनास्ट महिलाओं को फुल या हाफ बाजू के पारंपरिक लियोटार्ड ही पहनना होता है साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुल कपड़े पहनने की अनुमति तो है लेकिन किसी भी महिला जिमनास्ट ने इस तरह के कपड़े नहीं पहने थे। यह पहली बार था जब जर्मन खिलाड़ी महिलाओं ने इस तरह के कपड़े पहने थे। 
बीते कुछ सालों में खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं के शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों को देख महिला खिलाड़ियो की चिंता बढ़ती जा रही है अब एथलीटों की सुरक्षा को देखते हुए नए सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं।