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प्रसव कराने स्टाफ नर्स ने ले लिए 5 हजार, कलेक्टर से शिकायत 

प्रसव कराने स्टाफ नर्स ने ले लिए 5 हजार, कलेक्टर से शिकायत 

डिजिटल डेस्क, अनूपपुर। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं व चिकित्सालयों की स्थिति दयनीय हो चली है। रही सही कसर चिकित्सालयों में पदस्थ स्टाफ पूरी कर देता है। 17 मई को कलेक्ट्रेट पहुंचकर पीड़ित रजनीकांत द्विवेदी ने बिजुरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ स्टाफ नर्स दीपा ताम्रकार के विरूद्ध लिखित शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि उसकी पत्नी का प्रसव कराने के लिए नर्स द्वारा 20 हजार रुपयों की मांग की गई। मौके पर ही 5 हजार भी ले लिए।

चिकित्सालय में प्रसव न कराकर वह अपने घर पर सुविधाएं देने व प्रसव कराने के लिए ले जाने की बात कही। जब प्रसव वेदना से कराह रही पत्नी ने दर्द के विषय में स्टाफ नर्स को बतलाया तो वह अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए बांझ तक  हो जाने की बात कह दी। चिकित्सालय से स्टाफ नर्स के घर ले जाते वक्त रास्ते में ही कार में प्रसव हो गया और प्रसूता ने स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दिया,जबकि स्टाफ नर्स जच्चा-बच्चा की जान खतरे में बतला रही थी। 

यह है मामला 
13 मई को शहडोल जिले के धनपुरी में निवास करने वाला रजनीकांत द्विवेदी अपने ससुराल बिजुरी गया हुआ था जहां  उसकी पत्नी राधिका द्विवेदी का प्रसव होना था। 13 मई की शाम 6 बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बिजुरी में प्रसव के लिए ले जाया गया। जहां ड्यूटी पर मौजूद डा. मनोज सिंह के द्वारा प्रसूता का परीक्षण करने के बाद स्टाफ नर्स दीपा ताम्रकार को दिखला देने के लिए निर्देशित किया।  दीपा ताम्रकार ने रजनीकांत को दवाओं की पर्ची पकड़ाते हुए  बाहर से दवा लाने के लिए कहा। रात्रि 8 बजे तक सबकुछ सामान्य रूप से चलता रहा। 

स्थिति गंभीर लगेंगे 25 हजार 
रात्रि 9 बजे स्टाफ नर्स ने प्रसूता के पति को बताया कि जच्चा-बच्चा की हालत गंभीर है। गर्भस्थ शिशु की धड़कन बंद हो चुकी है। तत्काल ही आपरेशन  या प्रसव कराना पड़ेगा। चिकित्सालय में सुविधा नहीं है, मेरे घर ले चलो। साथ ही उसने यह भी हिदायत दी कि सुरक्षित प्रसव कराने के लिए 25 हजार रुपए लगेंगे। रजनीकांत ने जब उतने पैसे नहीं होने की बात कही तो मौके पर ही उससे 5 हजार रुपए ले लिए शेष राशि बाद मे देने की बात भी तय कर ली गई। जिसके बाद प्रसूता को स्टाफ नर्स के घर पहुंचाने का निर्देश भी दीपा ताम्रकार ने दे दिया। 

कार मे हुआ प्रसव 
प्रसव वेदना से कराह रही राधिका ने कार में बैठने में असमर्थता व्यक्त की तो स्टाफ नर्स ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए बांझ तक हो जाने की बात कह दी। सिर्फ इतना ही नहीं कार में बैठाकर जब प्रसूता को स्टाफ नर्स के घर ले जाया जा रहा था तभी रास्ते में ही प्रसव हो गया। शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में लिखा है कि अब स्टाफ नर्स द्वारा शेष राशि के लिए उसे परेशान कर रही है। कलेक्टर को लिखे आवेदन में पूरे मामले की जांच कराकर कार्यवाही की मांग की गई। 

इनका कहना है 
पूरे मामले की जांच कराई जाएगी, दोषी पाए जाने पर कार्यवाही की जाएगी। 
चन्द्रमोहन ठाकुर, कलेक्टर अनूपपुर
 

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